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गुरू कृपा बिन जीवन में आनन्द की प्राप्ति नहीं: ब्रह्मचारी गिरीश

गुरू कृपा बिन जीवन में आनन्द की प्राप्ति नहीं: ब्रह्मचारी गिरीश

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 770 दिन 9 घंटे पूर्व
09/07/2017
भोपाल। ??जीवन आन्नद है, लेकिन वर्तमान समय में हम गुरूओं के ज्ञान को भूलकर जीवन को जटिल बना रहे हैं। महर्षि महेश योगी जी ने गुरुदेव अनन्त श्री विभूषित स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती जी महाराज की कृपा से हमें ऐसी युक्ति प्रदान की है जिसे अपनाकर सारे ब्रम्हाण्ड में शांति स्थापित की जा सकती है। यह बात महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष ब्रम्हचारी गिरीश जी ने एमसीईई परिसर लांबाखेडा में गुरू पूर्णिमा महोत्सव के कार्यक्रम के दौरान कही। ब्रम्हचारी जी ने आगे कहा कि यह वर्ष महर्षि जी का जन्म शताब्दी वर्ष है इसलिए हमारे लिए आज का दिन बड़ा ही गौरवमय है। हमारी परंपरा है कि हमें जो भी प्राप्त हो वह गुरू के चरणों में अर्पित कर दें। हमारा सौभाग्य है कि हमें महर्षि जी की सेवा के 25 वर्ष मिले। इसी का परिणाम रहा कि जो हमें प्राप्त नहीं होने वाला था वह भी प्राप्त हो गया। चेतना सारे प्रकृति के नियमों का घर है। लक्षित मंजिल पाने के लिए मन के भावों की चेतना का जागरण जरूरी है। ब्रह्मचारी गिरीश जी ने गुरू की महता के बारे में बताते हुए कहा कि हमें गुरू की सेवा कैसी करना चाहिए यह भी महर्षि जी से सीखना चाहिए। 
महर्षि जी वैदिक भारत के स्वर्णिम इतिहास में एक ऐतिहासिक अद्वितीय उदाहरण छोड़ गये। जब हम अपने गुरु के लिए ब्रह्मा, विष्णु, शिव और परब्रह्म की उपाधियुक्त स्तुति करते हैं तो कि जिससे त्रिदेवों का भाव तो जागृत होता है किन्तु उन भक्ति के क्षणों में देवों के गुणों अथवा उनके कार्यों की व्याख्या नहीं हो पाती। महर्षि जी ने कभी भी न स्वयं को गुरु कहा और न किसी से अपने को गुरु कहलवाया। उन्होंने अपना सारा जीवन अपने परमाराध्य गुरुदेव अनन्त श्री विभूषित स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती जी महाराज के श्रीचरणों का स्मरण, उनका पूजन और सारे विश्व में जय गुरुदेव का उद्घोष कर उनकी जय जयकार करते रहे और करवाते रहे। जिस तरह महर्षि जी ने समस्त भूमण्डल में हजारों वर्षों के अन्तराल के पश्चात वेदों के सार को हम तक पहुंचाया उसे हम सब को हर मानव तक पहुंचाने आगे आना चाहिए। ब्रह्म्रचारी जी बताया कि हम 12 जनवरी 2017 को नई दिल्ली में महर्षि जी के जन्म शताब्दी समारोह के उद्घाटन से अब तक 30 शहरों में यह समारोह अयोजित हो चुके हैं। आज 80 अन्य शहरों में यह समारोह एक साथ मनाया जा रहा है। साथ ही आज देश के 300 शहरों में गुरू पूजन के कार्यक्रम हो रहे हैं। 
कार्यक्रम के दौरान महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलपति भुवनेश शर्मा ने कहा कि महर्षि शताब्दी वर्ष होने के चलते गुरू पूर्णिमा का यह पर्व विशेष है। आज संकल्प लेकर हमें महर्षि जी के पूर्ण ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना है। महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने महर्षि विद्यालय की उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया। महर्षि विश्व शांति आंदोलन के रक्षा मंत्री मेजर कुलवंत सिंह ने भावातीत ध्यान की पद्धति से भारतीय सीमाओं को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है इस पर विस्तार से बताया। प्रो. पंकज चांदे ने कहा कि महर्षि जी की विरासत को  ब्रह्मचारी गिरीश जी ने संभाल के रखा है यह सबसे बड़ी बात। 
इस अवसर पर नासा के सलाहकार डा.ॅ विरेन्द्र गोस्वामी, वेद विज्ञान विद्यापीठ के नारायण दत्त तिवारी, महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के संचार एवं जनसम्पर्क निदेशक व्ही. आर. खरे ने गुरू पूर्णिमा की बधाई देते हुए सभी का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह का मासिक सूचना पत्र ई-ज्ञान, महर्षि विश्व शांति आंदोलन का ई-न्यूजलेटर एवं महामडिया मासिक पत्रिका का विमोचन भी किया गया। 
कार्यक्रम के अंत में श्री. व्ही. आर. खरे ने उपस्थितजनों का आभार प्रकट किया। 
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