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आज नागपंचमी है

आज नागपंचमी है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 1460 दिन 9 घंटे पूर्व
19/08/2015
नाग पंचमी सुख, शांति, समृद्धि का प्रतीक पर्व है। इस वर्ष नाग पंचमी पर आज 13 वर्षो के बाद दुलर्भ संयोग बन रहा है। नाग पंचमी के दिन सूर्य और वृहस्पति सिंह राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में होंगे।नाग पंचमी पर होगा सूर्य गुरु यूति संयोग ऐसा संयोग 13 वर्षों के बाद आ रहा है। यह संयोग सुख शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला है। नाग पंचमी के दिन भगवान शिव के विधिवत पूजन से हर प्रकार का लाभ प्राप्त होता है।विधिवत शिव पूजा करने से मिलेगा लाभ जिसकी कुंडली में काल सर्प दोष के कारण जीवन में अनके प्रकार की परेशानियां आती हों, नौकरी और व्यापार में रुकावट हो, राहु के महादशा में केतु का अंतरदशा और केतु के महादशा में राहु की अंतरदशा हो, इसके कारण दुर्घटना, पति- पत्नी में वियोग हो तो बुधवार को राहु काल में शिव की आराधना करनी चाहिए।ऐसा संयोग बार-बार नहीं आता। ऐसा संयोग भक्तों के लिए वरदान के समान है। नागपंचमी के दिन तीन धातुओं से बना नाग- नागिन भगवान शिव पर चढ़ाकर पूजन करना शुभ रहेगा। प्रत्यक्ष नाग का पूजन एवं नाग को दुध पिलाना शास्त्रो में वर्जित बताया है अत:नाग-नागिन को दुध नही पिलाना चाहिए। पौराणिक लिहाज से बुधवार को नाग पंचमी पर आमतौर पर पांच नागों की पूजा की जाती है जो क्रमश: अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक व पिंगल हैं। अनंत (शेष) नाग की शय्या पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। वासुकि नाग को मंदराचल से लपेटकर समुद्र-मंथन हुआ था।पुराणों के अनुसार तक्षक नाग के डसने से राजा परीक्षित की मृत्यु हुई थी। नागवंशी कर्कोटक के छल से रुष्ट होकर नारदजी ने उसे शाप दिया था। तब राजा नल ने उसके प्राणों की रक्षा की थी। हिंदू व बौद्ध साहित्य में पिंगल नाग को कलिंग में छिपे खजाने का संरक्षक माना गया है।इन दिनों नासिक में कुंभ मेला चल रहा है। नासिक में ही स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में नाग पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रद्धालुओं को नासिक के त्र्यंबकेश्वर, औरंगाबाद के घृष्णेश्वर, उज्जैन के महाकालेश्वर या अन्य ज्योतिर्लिंगों में जाकर विधि-विधान से पूजा पाठ करवाने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।शिव पुराण में कहा गया है कि काल सर्प दोषयुक्त कुंडली वाला व्यक्ति यदि नागपंचमी पर नाग की पूजा करें और शिवजी पर सहस्राभिषेक करें तो सर्वमनोकामना सिद्धि प्राप्त होती है।इस दिन नाग दर्शन का विशेष महत्व होता है। इस दिन सर्पहत्‍या की मनाही है। पूरे श्रावण माह विशेष कर नागपंचमी के दिन धरती खोदना निषिद्ध है।
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