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GST का साइड इफैक्ट, जरूरी दवा भी नहीं बची बाजारों में

GST का साइड इफैक्ट, जरूरी दवा भी नहीं बची बाजारों में

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 130 दिन 2 घंटे पूर्व
03/08/2017
 नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) ने मई-जून में दवा विक्रेताओं को जो झटका दिया था, उसका असर अभी तक दिख रहा है। जी.एस.टी. लागू हुए महीना भर हो चुका है, लेकिन दवाइयों का भंडार अभी तक पहले जैसा नहीं हो पाया है क्योंकि विक्रेताओं पर अच्छी खासी चोट पड़ी है। दिल्ली के दवा कारोबारियों का कहना है कि पहले कम्पनियां उन्हें तमाम तरह के प्रोत्साहन देती थीं, लेकिन जी.एस.टी. के बाद सब बंद हो गया है, इसीलिए दवाइयों का अधिक स्टॉक रखने की कोई तुक उन्हें नजर नहीं आती।
पूर्वी दिल्ली के एक दवा विक्रेता ने कहा कि ज्यादातर कम्पनियां वितरकों को हुए नुक्सान की भरपाई नहीं कर रही हैं। नतीजा यह हुआ है कि वितरक उससे पडऩे वाली चोट का बोझ खुदरा विक्रेताओं के ऊपर डाल रहे हैं। दवा विक्रेताओं ने कहा कि आम बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की इस समय बाजार में कमी है।
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (ए.आई.ओ.सी.डी.) ने कहा कि स्टॉकिस्ट दवाइयों का अधिक स्टॉक रखने से बच रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा 3 सप्ताह के लिए जरूरी स्टॉक ही उनके पास है। ए.आई.ओ.सी.डी. के अनुसार जून में दवाओं के स्टॉक पर हुए नुक्सान की भरपाई में ही 2 से 3 महीने लग जाएंगे। जून में बाजार में 17 दिन के लिए जरूरी दवाओं का स्टॉक था, जो जुलाई में बढ़कर 22 दिन तक पहुंच गया है।

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