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कजलियों के साथ आज से शुरु हो गया भादों

कजलियों के साथ आज से शुरु हो गया भादों

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 746 दिन 8 घंटे पूर्व
08/08/2017
प्रेम-भाईचारा का पर्व कजलियां आज पूरे उत्साह, उमंग से मनाया जा रहा है। स्नेह के प्रतीक इस पर्व को देश भर में अलग-अलग तरह से लोग अपनी-अपनी संस्कृति के अनुरुप मनाते हैं। मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश के बीच में बसे बुंदेलखंड में इस पर्व को बुंदेली अंदाज में मनाया जाता है। इसमें नागपंचमी के आसपास बोए गए गेहूं को सींच कर उनसे उत्पन्न बाली रुप कजलियां एक दूसरे को देकर गले मिला जाता है, वहीं तिलक-टीका कर मुंह भी मीठा कराया जाता है। पर्व के रुप में प्रेम और भाईचारे की इस अद्भुत मिसाल पर बड़ों के द्वारा छोटों को उपहार भी दिया जाता है।  कजलियां पर्व के बारे में कुछ मान्यताएं  आल्हा-ऊदल के कालखंड से जुड़ी हैं तो कुछ उससे भी पहले की हैं। व्यवहारिक रुप से यह माना जाता है कि किसान गेहूं से उत्पन्न बाली को देख आगामी फसल कैसी होगी इसका अनुमान लगा लेते हैं। पर्व के चलते आज शहर के सभी पुराने मोहल्लों, बस्तियों, नदी-तालाबों के आसपास कजलियों का मेला लगा हुआ है और लोग एक दूसरे के कान में कजलियां लगा कर बधाई दे रहे हैं। दूसरा पहलू यह भी है कि आधुनिक होने की होड़ में परंपरागत रुप से मनाए जाने वाला यह पर्व शहरों से गायब होता जा रहा है। हालांकि शहरों के पुराने मोहल्लों में यह पर्व आज भी जीवित है। इसका प्रमाण गढ़ा-पुरवा, ग्वारीघाट, दीक्षितपुरा, मिलौनीगंज, लालमिट्टी, हनुमानताल, अधारताल आदि में लोग कजलियां मिल रहे हैं। 
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