महामीडिया न्यूज सर्विस
पर्वतीय राज्यों के उद्योगों में GST नहीं

पर्वतीय राज्यों के उद्योगों में GST नहीं

admin | पोस्ट किया गया 116 दिन 4 घंटे पूर्व
17/08/2017
नई दिल्ली [महामीडिया]: मोदी सरकार ने पर्वतीय राज्यों को भारी भरकम 27,413 करोड़ रुपये के औद्योगिक पैकेज का तोहफा दिया है। इस पैकेज के तहत उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर सहित पर्वतीय राज्यों में उद्योगों को मार्च 2027 तक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में छूट की सुविधा मिलती रहेगी। हालांकि उद्योगों को यह सुविधा रिफंड के रूप में मिलेगी। एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद इन राज्यों में लगने वाले उद्योगों को परोक्ष कर में छूट की सुविधा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। हालांकि सरकार ने अब यह कदम उठाया है जिससे पूर्वोत्तर के आठ प्रदेशों सहित कुल 11 राज्यों को फायदा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों संबंधी समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि जीएसटी कानून के फेमवर्क के दायरे में उद्योगों को 31 मार्च 2027 तक टैक्स रिफंड की सुविधा जारी रहेगी। सरकार अपने बजट से राशि आवंटित कर इन राज्यों में लगने वाली औद्योगिक इकाइयों को जीएसटी रिफंड जारी करेगी।
जिन राज्यों को यह सुविधा मिलेगी उनमें सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और त्रिपुरा भी शामिल हैं। औद्योगिक इकाइयों को यह मदद जिस तारीख से उन्होंने व्यवसायिक उत्पादन शुरू किया है, उसके बाद दस साल की अवधि में से शेष समय के लिए ही की जाएगी। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग इस योजना के विस्तृत दिशानिर्देश जल्द ही जारी करेगा।  उल्लेखनीय है कि जीएसटी कानून के तहत परोक्ष कर से छूट का प्रावधान नहीं है। हालांकि अगर केंद्र या राज्य सरकार किसी उद्योग को छूट देना चाहती है तो वह जीएसटी राशि रिफंड कर सकती है। जेटली ने कहा कि उद्योगों को रिफंड की सुविधा डीबीटी के माध्यम से मिलेगी। इस सुविधा का लाभ 4,284 कंपनियों को मिलेगा। इसके लिए सरकार ने भारी भरकम 27,413 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह राशि एक जुलाई 2017 से 31 मार्च 2027 तक  के लिए उपलब्ध रहेगी। जीएसटी के लागू होने से पहले इन उद्योगों को केंद्रीय उत्पाद शुल्क में छूट का लाभ हासिल था। सरकार यह योजना 2007 से चला रही है।


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