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श्वेतार्क गणपति की महिमा

श्वेतार्क गणपति की महिमा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 485 दिन 22 घंटे पूर्व
17/08/2017
 श्वेतार्क, अकाव के पौधे को कहते हैं तथा सामान्य बोलचाल की भाषा में इसे अकउआ भी कहते है। ये दो प्रकार के होते हैं, एक सफेद और एक नीला जो कि बहुतायत में पाया जाता है। वैसे तो यह एक जहरीला पौधा होता है परन्तु इसके फल, फूल, पत्ते एवं दुग्ध आदि का बड़ा औषधीय महत्व है। विभिन्न व्याधियों के लिए इनसे दवाएं बनती हेै।ज्योतिष में श्वेतार्क का बड़ा महत्व है। जहां श्वेतार्क के फूल भगवान षिव को अर्पित किए जाते हैं तो वहीं श्वेतार्क के गणपति जी की बड़ी महिमा है। वर्णन है कि पुष्य नक्षत्र में अभिमंत्रित करके श्वेतार्क के पेड़ की जड़ निकालकर उन्हें घर में सिंदूर आदि अर्पणकर पूजन करने से अभीष्ट की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि रवि पुष्य से एक दिन पूर्व शनिवार को ष्वेतार्क पौधे के पास जाकर जल, सिंदूर एवं अक्षत अर्पित कर उन्हें आमंत्रण देते हैं कि ?हे विघ्नहर्ता गणेष जी कल मैं पुष्य नक्षत्र के दिन आपको अपने घर ले जाउंगा, कृपापूर्वक मेरे घर में विराजकर विघ्नबाधा समाप्त कीजिए एवं सभी तरह से कल्याण कीजिए।? इस विधान से श्वेतार्क गणपति जी की घर पर स्थापना की जाती है और उन्हें सिंदूर, अक्षत, दूर्वा आदि अर्पित कर श्रृद्धाभाव से ?संकटनाषक गणेषेस्त्रोतम? अथवा ?गणेषअथर्वषीषं? अथवा मात्र ?गं गणपतये नमः? मंत्र का पाठ किया जाता है और श्री गणेष भगवान की कृपादृष्टि होने लगती है। श्वेतार्क की लकड़ी को सुखाकर पावडर बनाकर कलाकारों द्वारा सांचे से गणेष प्रतिमा बनाकर रखना भी प्रचलन में हैै परन्तु श्वेतार्क की अंगुष्ठभर के आकार की लकड़ी को मूलरुप में ही घर में प्रतिष्ठित करना सर्वोत्तम बताया गया है। 
प्रणम पटेरिया
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