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सहस्त्रचण्डी महायज्ञ में समृद्धि की हो रही कामना

सहस्त्रचण्डी महायज्ञ में समृद्धि की हो रही कामना

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 867 दिन 6 घंटे पूर्व
03/04/2017
भोपाल। नवरात्र के पावन अवसर पर महर्षि महेष योगी जी की दिव्य कृपा से महर्षि उत्सव प्रांगण भोजपुर रोड दीपडी में सहस्त्रचण्डी महायज्ञ के माध्यम से मानव जीवन में आनन्द एवं समृदि की कामना की जा रही है। सैकड़ों वैदिक पण्डितों द्वारा किए जा रहे हवन में वैदिक मंत्रोचार से पूरा क्षेत्र गूंजायमान हो रहा है। नवरात्र के आज सातवें दिन चण्डीपाठ कर माॅ कालरात्रि की पूजा की गई। यज्ञ मण्डप में नवग्रह एवं देवताओं की पूजा की गई। पूजन के पष्चात आरती हुई। सुबह 9 बजे से 12ः30 दोपहर तक यह आयोजन जारी रहता है। 
प्रांगण में ही शाम 4 बजे से वृन्दावन से पधारे कथा व्यास पं श्री उपदेष कृष्ण शास्त्री द्वारा अष्टम दिवस की द्धितीय बेला में गुरू विष्वामित्र के आश्रम में भगवान श्री राम की लीलाओं का चित्रण किया गया। इस दौरान आश्रम के महत्व को बताया गया। पं शास्त्री ने कहा-आश्रम का अर्थ श्रम करने से है। वही आश्रम श्रेष्ठ है जहां निःस्वार्थ भाव से सब की सेवा होती है। 
आज के मानव की प्रवृति का उल्लेख करते हुए बताया गया कि आज व्यक्ति काम कम और अनुदान ज्यादा लेना चाहता है,जिसके चलते सेवा का भाव कम हो रहा है।कथा के दौरान भगवान राम के द्वारा पत्थर की अहिल्या का उद्धार करने का वृतांत बड़े ही मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया। 
साधु के महत्व पर प्रकाष डालते हुए कथावाचक ने कहा कि ?? मेरा बिगड़ता है तो बिगड़ जाए लेकिन दूसरे का ना बिगड़े ऐसा सोचने वाला व्यक्ति साधू होता है??। ऐसे व्यक्ति पर एक दिन रघुनाथ की कृपा अवष्य होती है। देवी अहिल्या की तरह रघुनाथ उनका कल्याण अवष्य करते हैं। 
कथा के दौरान भगवान राम के गंगा पूजन एवं मानव जीवन में नदियों के महत्व पर प्रकाष डाला गया। गंगाजल के महत्व को बताते हुए कहा गया कि शराब की बोतल को बदलने की जरूरत नहीं है, उसके पानी को बदल दिया जाए तो जीवन में आनन्द आ सकता है। गंगाजल के प्रातःकाल पान करने से कई रोग एवं पाप नष्ट हो जाते है। 
योगेन्द्र पटेल

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