महामीडिया न्यूज सर्विस
नीतीश के खिलाफ लड़ाई में शरद को दोहरा झटका

नीतीश के खिलाफ लड़ाई में शरद को दोहरा झटका

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 37 दिन 22 घंटे पूर्व
13/09/2017
 पटना (महामीडिया):    महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ दोबारा से मिलकर बिहार में नयी सरकार के गठन के नीतीश कुमार के फैसले से नाराज चल रहे जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को बुधवार को दोहरा झटका लगा है. एक ओर चुनाव आयोग ने जहां जनता दल यूनाइटेट पर शरद यादव के दावे काे खारिज करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जदयू को ही असली करार दिया है. वहीं दूसरी ओर राज्यसभा सचिवालय ने जदयू के बागी सांसदों शरद यादव और अली अनवर से स्पष्टीकरण मांगा है और पूछा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में क्यों न दोनों सांसदों की सदस्यता रद्द कर दी जाएं. राज्यसभा ने दोनों सांसदों से एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है.  
चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए जदयू के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि आयोग का निर्णय सराहनीय है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद अब शरद यादव की राज्यसभा की सदस्यता रद्द होने का रास्ता भी साफ हो गया है. राज्यसभा सचिवालय ने शरद यादव को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब देने कहा है. केसी त्यागी ने कहा कि शरद यादव ने राज्यसभा के सभापति से पहले ही यह कह रखा है कि जब तक चुनाव आयोग में मामला लंबित है, उनकी सदस्यता के मामले पर सुनवाई नहीं हो. अब जबकि चुनाव आयोग का फैसला आ गया है, तो स्पष्ट है कि उनकी सदस्यता भी जायेगी. 
केसी त्यागी ने कहा कि कांग्रेस व राजद के सहयोग से कुछ नेता भ्रांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आयोग के निर्णय से यह साफ हो जाता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व में पूरी पार्टी एकजुट है. गौर हो कि जदयू ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को उनकी सदस्यता रद्द करने का ज्ञापन दिया था, जिसके आलोक में सचिवालय ने यह कदम उठाया है.  निर्वाचन आयोग ने जदयू के चुनाव चिह्न पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव गुट के दावे पर संज्ञान नहीं लिया है. आयोग के मुताबिक शरद यादव गुट द्वारा गत 25 अगस्त को पेश दावे में पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव को संज्ञान नहीं लेने का मुख्य आधार है. शरद यादव ने जदयू के अधिकांश पदाधिकारियों के समर्थन का दावा करते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न उनके गुट को देने की आयोग से मांग की थी.

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