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खतरे में बैंक वालों की नौकरी

खतरे में बैंक वालों की नौकरी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 398 दिन 16 घंटे पूर्व
15/09/2017
मुंबई। बैंकों के कुछ काउंटर हमेशा के लिए बंद होने वाले हैं। मसलन, पासबुक अपडेट करने वाले क्लर्क नजर नहीं आएंगे। उनके जैसे कुछ अन्य बैंक कर्मचारियों की भी जरूरत नहीं रह जाएगी। ऑटोमेशन के दौर में ऐसी नौकरियां खत्म हो रही हैं।
कुछ बैंक शाखाओं में ये बदलाव अभी से नजर आने लगे हैं। ग्लोबल बैंकिंग कंपनी सिटीग्रुप को साल 2008 के वित्तीय संकट से उबारने वाले विक्रम पंडित ने बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते ऑटोमेशन का समर्थन किया है।
पंडित का कहना है कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से अगले पांच वर्षों में करीब 30 फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। पंडित ने एक इंटरव्यू में कहा है कि आने वाले समय में बैंक-ऑफिस जैसे कामकाज के लिए काफी कम कर्मचारियों की जरूरत रह जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्घि) और रोबोटिक्स ऐसे काम निपटाने में सक्षम हैं।
हालांकि, पंडित का यह नजरिया और अनुमान अमेरिका और यूरोप के लिए है, लेकिन भारतीय बैंक भी इसी राह चलते नजर आ रहे हैं। घरेलू बैंकिंग सिस्टम में यह चलन देखा जा सकता है। अब पासबुक अपडेट, कैश डिपॉजिट, केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) वेरिफिकेशन और खातों में वेतन का ट्रांसफर डिजिटल तरीके से होने लगा है। नतीजतन कर्मचारियों की जरूरत कम होती जा रही है।
एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने लगे हैं। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई भी इस मामले में काफी आगे नजर आ रहा है। इन सभी बैंकों ने रोजमर्रा के कामकाज सेंट्रलाइज करने के लिए रोबोटिक्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस वजह से इन बैंकों की शाखाओं पर कर्मचारियों की जरूरत कम रह गई है।
राहत की बात केवल इतनी है कि पिछले कुछ वर्षों से कर्मचारियों की जगह मशीनों का इस्तेमाल करने के मामले में भारतीय बैंकिंग उद्योग की रफ्तार थोड़ी कम हुई है। फिर भी मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने से कर्मचारियों की भर्ती घट गई है। जो भर्तियां हो रही हैं, उनमें ऐसी हुनर होनी चाहिए, जो बैंकों में ऑटोमेशन को बढ़ावा देने में जरूरी हो।

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