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नवरात्र के पांचवें दिन करें स्कंदमाता की पूजा

नवरात्र के पांचवें दिन करें स्कंदमाता की पूजा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 692 दिन 16 घंटे पूर्व
25/09/2017
भोपाल [महामीडिया]: सोमवार को नवरात्री का पांचवा दिन हैं और इस दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का पांचवां रुप स्कंदमाता का है। वे देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने स्कन्द कुमार की माता हैं, इसीलिए स्कंदमाता के नाम से जानी जाती है। स्कन्द कुमार को कार्तिकेय, सुब्रमण्यम और मुरुगन के नाम से भी जाता है। यह बुद्ध ग्रह पर अपना आधिपत्य रखती हैं। स्कंदमाता का स्वरुप उस महिला या पुरुष का है जो माता-पिता बनकर अपने बच्चों का लालन-पोषण करते हैं। इनका पूजन करने से भगवान कार्तिकेय के पूजन का भी लाभ प्राप्त होता है। शास्त्रनुसार देवी अपनी ऊपर वाली दाईं भुजा में बाल कार्तिकेय को गोद में उठाए हैं। नीचे वाली दाईं भुजा में कमल पुष्प लिए हुए हैं। ऊपर वाली बाईं भुजा से इन्होंने जगत तारण वरदमुद्रा बना रखी है व नीचे वाली बाईं भुजा में कमल पुष्प है। देवी स्कंदमाता का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है अर्थात मिश्रित है। यह कमल पर विराजमान हैं, इसी कारण इन्हें ?पद्मासना विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहते हैं।
शास्त्रनुसार इनकी सवारी सिंह है। देवी स्कंदमाता की साधना का संबंध बुद्ध ग्रह से है। कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में बुद्ध ग्रह का संबंध तीसरे व छठे घर से होता है अतः देवी स्कंदमाता की साधना का संबंध व्यक्ति के सेहत, बुद्धिमत्ता, चेतना, तंत्रिका-तंत्र व रोगमुक्ति से है। 
वास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार देवी स्कंदमाता की दिशा उत्तर है, निवास में वो स्थान जहां पर उपवन या हरियाली हो। स्कंदमाता का अर्थ है स्कंद अर्थात भगवान कार्तिकेय की माता। इन्हें दुर्गा सप्तसती शास्त्र में चेतान्सी कहकर संबोधित किया गया है। देवी स्कंदमाता विद्वानों व सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति हैं। 

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