महामीडिया न्यूज सर्विस
70% भारतीयों में विटामिन की कमी

70% भारतीयों में विटामिन की कमी

admin | पोस्ट किया गया 354 दिन 10 घंटे पूर्व
03/10/2017
एक रिपोर्ट के मुताबिक हर 10 भारतीय में से 7 ऐसे हैं जो विटामिन की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि एक सच यह भी है कि इस कमी को पूरा करने के लिए कई बार युवा ऐसी चीजों का इस्तेमाल करने लगते हैं जो ज्यादा नुकसानदेह साबित होती हैं।
1. 70% भारतीयों में विटामिन की कमी 14,96,683 लोगों पर हुई रिसर्च में सामने आया।
2. 81.28% में विटामिन डी की बेहद कमी पाई गई।
3. 21.02% लोग विटामिन बी12 की कमी से ग्रसित थे।
4. 15.06% लोगों में विटामिन बी9 की मात्रा अपर्याप्त थी।
इंडियन मेडिकल एशोसिएशन की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश भारतीयों में विटामिन बी12 की कमी है। 70 फीसदी भारतीय विटामिन की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि अन्य 15 फीसदी भारतीय भी पर्याप्त मात्रा में विटामिन का सेवन नहीं कर पाते। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक इससे एनीमिया, थकान, कब्ज, याददाश्त में कमी, मुंह में छाले, बांझपन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं एक तथ्य यह भी है कि कमी के नाम पर लोग कई बार विटामिन युक्त पद्धार्थ आवश्यकता से अधिक लेने लगते हैं, जिसके भी दुष्परिणाम सामने आने लगते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इनकी खुराक अगर जरूरत से ज्यादा हो जाए तो हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं। अधिक मात्रा में मल्टीविटामिन लेना खतरनाक हो सकता है। इससे लॉन्ग टर्म डिसीज की आशंका भी बढ़ जाती है।

कमी पर हर रिसर्च के अलग नतीजे-

1. उम्रदराज लोगों पर मानसिक असर (यूनिवर्सिटी आॅफ एकेस्टर मेडिकल स्कूल)-
यहां के ताजा शोध में कहा गया है कि विटामिन डी की कमी से उम्रदराज लोगों में पागलपन का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। ब्रिटेन के शोधकर्ता 65 साल से अधिक की उम्र के करीब 1,650 लोगों पर किए अध्ययन के बाद इस नतीजे पर पहुँचे हैं। जिन व्यक्तियों में विटामिन डी का स्तर बहुत कम था, उनमें से पांच में से एक में पागलपन का खतरा होने की आशंका जताई गई।

2. प्रोस्टेड कैंसर की आशंका (फ्रीनबर्ग स्कूल आॅफ मेडीसिन)-
अमेरिका की इस यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में बताया, गया कि विटामिन डी की कमी एक बायोमार्ककर के रूप में प्रोस्टेट कैंसर की भविष्यवाणी कर सकती है। पुरूषों में विटामिन डी की कमी से प्रोस्टेड कैंसर की आशंका कई गुना तक बढ़ जाती है। यह शोध पत्रिका क्लीनिकल आॅफ ओन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

3. गर्भावस्था में गंभीर परिणाम (हार्वड यूनिवर्सिटी)-
यहां हुए शोध में कहा गया कि गर्भावस्था के दौरान विटामिन डी की कमी वाली महिलाओं की संतान में वयस्कता के दौरान मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) रोग होने का अधिक खतरा होता है। विटामिन डी का उच्च स्तर वयस्कता में एमएस के कम जोखिम से संबंधित है। मल्टीपल स्कलेरोसिस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की बीमारी है, जो मांसपेशी नियंत्रण और शक्ति, दृष्टि संतुलन, भावना और सोच की समस्याएं पैदा करती है।

कितनी मात्रा लें यह जानना बेहद जरूरी
इन 3 शोधों के उलट सेफ्टी जनरल आॅफ अमेरिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक विटामिन डी के ज्यादा इस्तेमाल से शरीर में कैल्शियम का लेवल बढ़ता है, जिसे हाइपरक्लमेंशिया कहते हैं। इसमें कॉन्सटीपेशन, बेहोशी के साथ किडनी भी खराब हो सकती है। यूनिवर्सिटी आॅफ कोपनहेगन के मुताबिक विटामिन डी की ज्यादा खुराक हृदयरोग का खतरा दोगुना करती है। जिन लोगों के रक्त में विटामिन डी का स्तर ज्यादा होता है, उनमें हृदयघात का खतरा 2.8 प्रतिशत तक हो जाता है।
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