महामीडिया न्यूज सर्विस
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और बनारस हिन्‍दू यूनिवर्सिटी को लेकर UGC का अहम सुझाव

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और बनारस हिन्‍दू यूनिवर्सिटी को लेकर UGC का अहम सुझाव

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 13 दिन 20 घंटे 52 सेकंड पूर्व
09/10/2017
 नई दिल्ली। UGC ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक सरकारी ऑडिट में सलाह दी गई है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के नाम से 'मुस्लिम' और बनारस हिन्‍दू यूनिवर्सिटी (BHU) के नाम से 'हिन्‍दू' शब्‍द हटा लिया जाए। जिससे यूनिवर्सिटी का सेक्‍युलर चरित्र प्रदर्शित हो सके। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा बनाई गई पांच कमेटियों में से एक ने यह ऑडिट 25 अप्रैल को मानव संसाधन मंत्रालय के कहने पर किया था। मंत्रालय 10 सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अनियमितताओं की शिकायतों की जांच चाहता था। एएमयू ऑडिट में बीएचयू शामिल नहीं था मगर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इसका संदर्भ दिया है। एएमयू के अलावा जिन विश्‍वविद्यालयों का 'शैक्षिक, शोध, वित्‍तीय और मूलभूत संरचना ऑडिट' कराया गया है उनमें पांडिचेरी यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी, झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी, राजस्‍थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जम्‍मू सेंट्रल यूनिवर्सिटी, वर्धा की महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय, त्रिपुरा सेंट्रल यूनिवर्सिटी, मध्‍य प्रदेश की हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी शामिल है। एएमयू के साथ पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी के ऑडिट का जिम्मा जिस समिति को दिया गया था उसकी अध्यक्षता आईआईटी-मद्रास के प्रोफेसर श्रीपाद करमालकर कर रहे थे। समिति में महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी के कुलपति कैलाश सोडानी, गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मज़हर आसिफ और आईआईएम-बेंगलुरू के प्रोफेसर संकर्षण बासु सदस्य शामिल थे। ऑडिट समितियों को संबंधित विश्वविद्यालयों में मूलभूत ढांचे-सुविधाओं की स्थिति, अध्ययन-अध्यापन के इंतज़ाम, शोध और वित्तीय प्रबंधन के हालात का जायजा लेने की ज़िम्मेदारी दी गई थी। एएमयू ऑडिट में कमेटी ने सुझाव दिया है कि कि संस्‍थान को या तो सिर्फ 'अलीगढ़ यूनिवर्सिटी' कहा जाए या फिर इसके संस्‍थापक, सर सैयद अहमद खान के नाम पर रख दिया जाए। यही वजह बीएचयू का नाम बदलने के लिए भी दी गई। इसके पीछे पैनल की दलील है कि इन सभी यूनिवर्सिटी को पैसा केंद्र द्वारा दिया जाता है। उसकी प्रकृति भी पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष है। इसलिए उसे या तो सिर्फ अलीगढ़ यूनिवर्सिटी कहा जाना चाहिए। पैनल सदस्‍यों ने इस सुझाव के पीछे यह तर्क है कि एएमयू, केंद्र द्वारा वित्‍त पोषित होने के कारण सेक्‍युलर संस्‍था है। कमेटी ने एएमयू की प्रकृति को 'सामंती' बताया है और कैंपस में गरीब मुस्लिमों को ऊपर उठाने के लिए कदम उठाने की जरूरत बताई है। साथ ही यूनिवर्सिटी की फीस में बढ़ोत्तरी की भी सिफारिश की है। जिससे विवि की सुविधाओं में इजाफा हो सके।  

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