महामीडिया न्यूज सर्विस
46 साल में गरीबी 57% से घटकर 30% हुई

46 साल में गरीबी 57% से घटकर 30% हुई

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 10 दिन 21 घंटे पूर्व
12/10/2017
नई दिल्ली (महामीडिया) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गरीबी हटाओ का नारा दिया। उन्होंने 5 साल में देश से गरीबी खत्म करने का लक्ष्य रखा है। 1971 में इंदिरा गांधी ने पहली बार गरीबी हटाओ का नारा दिया था। उनके बाद से 46 साल में अब तक चार प्रधानमंत्री देश से गरीबी हटाने के लिए कैंपेन लांच कर चुके हैं। इन 46 वर्षों में गरीबी करीब 27% घटी है। 1971 में गरीबी कुल आबादी की 57% थी। अभी करीब 30% आबादी गरीब है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक भारत में करीब 22.4 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। यानी वे रोजाना 120 रुपए (अंतरराष्ट्रीय पैमाना) से कम में अपना खर्च चला रहे हैं। दुनिया में संख्या के लिहाज से सबसे ज्यादा गरीब भारत में रहते हैं। यह दुनिया के दूसरे सबसे गरीब देश नाइजीरिया से करीब 2.5 गुना ज्यादा है। नाइजीरिया में 8.6 करोड़ गरीब हैं। दुनिया के हर तीन में से एक गरीब भारत में रहता है।भारत के 7 राज्यों छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, मप्र, ओडिशा, राजस्थान और यूपी में करीब 60% गरीब आबादी रहती है। 80% गरीब भारत के ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। 
मोदी से पहले चार प्रधानमंत्री देश से गरीबी हटाने के लिए कैंपेन लांच कर चुके हैं. इंदिरा गांधी- 1980 में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना को शुरू किया। मकसद ग्रामीण भारत में गरीबी को खत्म करना था। इंद्र कुमार गुजराल- 1997 में रक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली शुरू की। राशन दुकानों पर कम दाम पर अनाज मुहैया कराना।  अटल बिहारी वाजपेयी- 2000 में प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना शुरू की। लक्ष्य गांवों का विकास कर गरीबी खत्म करना था। मनमोहन सिंह: 2006 में नरेगा लॉन्च किया। उद्देश्य गांवों में मजदूरों को 100 दिन का कानूनी रोजगार गारंटी प्रदान करना।
कांग्रेस के विभाजन के बाद इंदिरा ने 1971 में ?गरीबी हटाओ? का नारा दिया था। 1971 के चुनाव में वह जनसभाओं में बोलती थीं, ?वो कहते हैं इंदिरा हटाओ, हम कहते हैं गरीबी हटाओ?। चुनाव में कांग्रेस को 352 सीटें मिलीं।  1989 में राजीव गांधी ने भी गरीबी हटाओ नारा दिया। हालांकि उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इंदिरा ने 1971 में गरीबी हटाओ मिशन के तहत किसानों के लिए विकास कार्यक्रम और 1975 में गरीबी उन्मूलन के लिए 20 सूत्रीय कार्यक्रम लागू किए। इसके 5 साल बाद 1977 में गरीबी दर 57% से घटकर 52% हो गई। 1983 में यह 44% और 1987 में 38.9% पर आ गई. सबसे ज्यादा बीमारी भोजन और पानी की कमी से होती है।जनसंख्या वृद्धि से गरीबी बढ़ती है।
देश में अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं, पर किसानों को उपज से पर्याप्त रकम नहीं मिलती। 5 साल में गरीबी हटाने के लिए ये करना होगा. जीडीपी ग्रोथ 10% करनी होगी। फिलहाल जीडीपी ग्रोथ रेट 5.7%है। 17.5 करोड़ नई जॉब क्रिएट करनी होगी। इकोनॉमी 651 लाख करोड़। अभी 130 लाख करोड़ रु. की है। गांवों में हर व्यक्ति तक नेट की पहुंच। किसान की आय दोगुना और हर घर में बिजली-पानी।कृषि उत्पादन में करीब 50% की वृद्धि। देश में गरीबी की स्थिति का आंकलन करने के लिए यूपीए सरकार ने 2012 में सी. रंगराजन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति ने 2014 में सरकार को रिपोर्ट पेश की। बताया कि भारत में 2011-12 में करीब 29.5% लोग गरीबी की रेखा के नीचे थे। देश में हर 10 में से 3 व्यक्ति गरीब हैं। रंगराजन समिति के मुताबिक शहरी व्यक्ति यदि 1 महीने में 1,407 रु.(47 रु. प्रति दिन) से कम खर्च करता है तो वह गरीब है। समिति ने ग्रामीण इलाकों में प्रति माह 972 रु.(32 रु. प्रति दिन) से कम खर्च करने वाले लोगों को गरीबों की श्रेणी में रखा जाए। समिति के अनुसार, 2011-12 में भारत में गरीबों की संख्या 36.3 करोड़ थी, 2009-10 में यह आंकड़ा 45.4 करोड़ था।
रोटी, कपड़ा, मकान है तो गरीब नहीं हैं. योजना आयोग ने गरीबी रेखा को गरीबी मापने का एक पैमाना माना था। पहली कैलोरी का और दूसरी कैलोरी पर खर्च होने वाली न्यूनतम आय। किसी भी व्यक्ति की आय का वह स्तर जिससे वह अपने पोषण स्तर को पूरा कर सके। इसे गरीबी रेखा कहते है। वे लोग जो बुनियादी जरूरतें रोटी, कपड़ा, मकान की व्यवस्था नहीं कर सकें। गरीबी रेखा से नीचे माने जाते हैं।
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