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अनेकता में एकता का संदेश देता महर्षि राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव

अनेकता में एकता का संदेश देता महर्षि राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 660 दिन 13 घंटे पूर्व
27/10/2017
भोपाल (महामीडिया) गणपति की वंदना पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति के दौरान महर्षि विद्या मंदिर रतनपुर की छात्राओं ने गणेश की प्रतिमा प्रदर्शित कर मनमोहक नृत्य किया जिसे देखकर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। महर्षि सेंटर फार एजूकेशन एक्सीलेंस, लांबाखेड़ा में चल रहे राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव का आज दूसरा दिन है। इसके पश्चात् सत्यम शिवम सुंदरम के बोल पर भगवान शिव की अराधना पर शानदार प्रस्तुति दी गई। पूरे देश के विभिन्न राज्यों से पधारे छात्र प्रतिभागियों का पूरा कार्यक्रम अनेकता में एकता का संदेश दे रहा है। देश की विभिन्न संस्कृतियों का संगम यहां स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। संस्कृत भाषा में दक्षिण क्षेत्र के एक नृत्य में सभी प्रतिभागी बच्चों ने शानदार प्रस्तुति को अंजाम दिया। इसके पश्चात् एक स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया ऐसा पावन, सुधवन समय आज है के बोल पर स्वागत गीत की शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को झकझोर दिया। इसके आगे मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरा मोती के बोल पर शानदार प्रस्तुति से महर्षि जी के संदेश की भारत विश्व गुरू बनकर रहेगा कि स्मृति साकार हो उठी। श्रीकृष्ण के विद्रोह को राधा द्वारा पर्णित करती नृत्य नाटिका का प्रदर्शन हुआ जिसमें श्रीकृष्ण के वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य सहित पूर्णकाल अर्थात बाल जीवन का चित्रण बहुत ही मनमोहक रूप से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए हनुमान चालीसा पर आधारित एक गायन की प्रस्तुति दी गई, जिसमें उपस्थित दर्शकों को झकझोर कर रख दिया एवं भारतीय परंपराओं को समर्थ रूप से परिपूर्ण प्रस्तुति देने में सक्षम रहा। इसके आगे देश मेरी शान है, इस पर जीवन कुर्बान है, का देशभक्ति पूर्ण नृत्य ने समां बांध लिया और कल उद्घाटन भाषण में समूह के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश जी द्वारा इस महर्षि जन्म शताब्दी वर्ष में भोपाल की धरती पर महर्षि राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन की पृष्ठभूमि को रेखांकित किया।
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