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शिक्षक को गुरू बनने से कोई नहीं रोक सकता- ब्रह्मचारी गिरीश

शिक्षक को गुरू बनने से कोई नहीं रोक सकता- ब्रह्मचारी गिरीश

admin | पोस्ट किया गया 208 दिन 22 घंटे पूर्व
31/10/2017
भोपाल (महामीडिया) यदि सभी शिक्षक समुदाय के लोग प्रतिदिन अपनी दैनिक दिनचर्या की समय सारणी बनाकर पालन करें और उसमें सुबह एवं शाम को समय निकालकर भावातीत ध्यान एवं योग को शामिल कर लें तो उन्हें गुरू बनने से कोई रोक नहीं सकता। एक शिक्षक छात्रों का गुरू तभी बन सकता है जब वह छात्रों की कठिनाईयों को प्रत्येक स्तर पर सुलझाने के लिए स्वयं के इर्द-गिर्द इतनी सकारात्मक ऊर्जा से प्रवाहमान हो कि उनके छात्र भी इस सकारात्मक ऊर्जा को महसूस कर सकें। यही सकारात्मक ऊर्जा गुरू एवं शिष्य के बीच उन संबंधों को निर्मित करती है जो वर्षों तक जीवंत रहते हैं उक्त विचार आज ब्रह्मचारी गिरीश जी महर्षि सेंटर फार एजूकेशनल एक्सीलेंस, लांबाखेड़ा में व्यक्त किये।
महर्षि विश्व शांति आंदोलन द्वारा एक दिवसीय शिक्षक समागम में शिक्षक समुदाय को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कई संस्मरणों को समाहित करते हुये अपना व्याख्यान दिया। बहुत ही सहज शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा कि एक बार मैंने अपने जीवन के समस्त गुरूओं एवं सहपाठियों को बुलाकर कार्यक्रम रखा एवं सभी को शाल, श्री फल एवं भेंट देकर विदाई दी तब से सभी के बीच संबंध इतने प्रगाढ़ हुए की आज जो भी विदेश में है वह भी सप्ताह में एक बार कुशलक्षेम अवश्य पूंछते हैं।
ब्रह्मचारी जी के अतिरिक्त महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति भुवनेश शर्मा, निदेशक व्ही. आर. खरे एवं सोलंकी जी ने अपने विचार प्रस्तुत किये। इसके पश्चात् द्वितीय सत्र में सामाजिक, मनौवैज्ञानिक शिक्षकों का ग्रुप बनाकर उन युक्तियों को हल करने एवं शिक्षण-प्रशिक्षण में छोटी-छोटी बातों के प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि कक्षा में कोई छात्र या शिक्षक वी की जगह आई का उपयोग करता है तो हमें इसके लिए सावधान होना चाहिए। इसकी पुनरावृत्ति को तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने इस दौरान शिक्षकों को कई जरूरी विशेषज्ञतापूर्ण टिप्स देकर उसे उपयोग में लाने के लिए प्रयास करने को कहा।
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