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एलएलएम का एक वर्षीय पाठ्यक्रम प्रारंभ करें प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालय

एलएलएम का एक वर्षीय पाठ्यक्रम प्रारंभ करें प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालय

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 397 दिन 11 घंटे पूर्व
13/11/2017
भोपाल (महामीडिया राजकुमार शर्मा मध्यप्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालय निजी क्षेत्र के साथ जारी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ते जा रहे हैं। जहां एक ओर प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय फास्टट्रेक एवं बाजारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की अनुमति लेकर करोड़ों रूपये की कमाई कर रहे हैं वहीं सरकारी विश्वविद्यालय अभी भी दशकों पुराने पाठ्यक्रमों को ढो रहे हैं। ज्ञात हो कि विधि के क्षेत्र में 2012 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एलएलएम के एक वर्षीय फास्टट्रेक पाठ्यक्रम को अनुमति दे चुका है लेकिन म.प्र. के किसी भी सरकारी विश्वविद्यालय में अभी तक मान्यता तक हासिल नहीं है कुलपतियों की अदूदर्शिता एवं अनुभवहीनता के चलते सरकारी विश्वविद्यालय केवल सफेद हाथी बनकर रह गये हैं। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विगत 25 वर्षों से महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों एवं ट्रेकिंग एवं मानीटरिंग के व्यवसाय कर रहे निजी पारिवारिक एलएलपी सेंटर फार एडव्होकेसी एंड डेवलपमेंट मझगवां (कटनी) म.प्र. की राज्य समन्वयक एवं पूर्व जिला पशु कल्याण अधिकारी श्रीमती निर्मला शर्मा का कहना है कि सरकारी विश्विद्यालयों एवं कुलपतियों की अदूदर्शिता का खामियाजा प्रदेश के छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की निजी क्षेत्र के साथ सांठगांठ है जो निजी क्षेत्र के लाभ के लिए ऐसे पाठ्यक्रमों की मान्यता नहीं ले रहे हैं जो सरकारी लाभ की दृष्टि से उचित हैं उनका मानना है कि प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को इसी शैक्षण्कि सत्र से पुराने पाठ्यक्रम के स्थान पर एलएलएम एक वर्षीय फास्टट्रेक पाठ्यक्रम प्रारंभ करने पर विचार करना चाहिए। ज्ञात हो कि बाजार में दो वर्षीय एलएलएम पाठ्यक्रम की मांग एवं रूझान समाप्त हो चुका है जबकि एलएलएम एक वर्षीय फास्टट्रेक की निरंतर मांग बनी हुई है और सर्वाधिक कैम्पस इसी से हो रहे हैं। 
मध्यप्रदेश में विगत 20 वर्षों के दौरान इतने निकम्मे एवं अयोग्य लोग कमीशन के दम पर कुलपति के पद पर आसीन हुए हैं इसका अनुमान सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि भोज विश्विद्यालय के एलएलएम पाठ्यक्रम की मान्यता सिर्फ इसलिए रद्द हुई कि कुलपति को एलएलएम फास्ट ट्रेक की मान्यता के लिए प्रस्ताव बनाना ही नहीं आता था। यदि आता तो दो वर्षीय पाठ्यम की जगह एक वर्षीय पाठ्यक्रम की अनुमति मिल जाती और ऐसा करने से 100 छात्र मिल सकते थे, जिससे मान्यता को बचाया जा सकता था।

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