महामीडिया न्यूज सर्विस
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चुनाव को लेकर शशि थरूर ने ब्रिटेन की बखिया उधेड़ी

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चुनाव को लेकर शशि थरूर ने ब्रिटेन की बखिया उधेड़ी

admin | पोस्ट किया गया 6 दिन 10 घंटे पूर्व
14/11/2017
नई दिल्ली (महामीडिया)  केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने संयक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य ब्रिटेन की बखिया उधेड़ दी. थरूर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में बतौर जज नियुक्ति के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बावजूद भारतीय उम्मीदवार जस्टिस दलवीर भंडारी की नियुक्ति में अड़ंगा डालने को लेकर भड़के हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि 'ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र महासभा के बहुमत की इच्छा को बाधित करने की कोशिश कर रहा है सयुक्त राष्ट्र के तय नियमों के मुताबिक, आईसीजे में बतौर जज नियुक्ति के लिए उम्मीदवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 97 वोट हासिल और सुरक्षा परिषद से 8 वोट हासिल करने होते हैं. आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ के एक तिहाई सदस्य हर तीन साल में नौ वर्ष के लिए चुने जाते हैं. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद में अलग अलग लेकिन एक ही समय चुनाव कराए जाते हैं. आईसीजे में चुनाव के लिए मैदान में उतरे कुल छह में से चार उम्मीदवारों को महासभा और सुरक्षा परिषद दोनों में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद चुन लिया गया. इनमें फ्रांस के रॉनी अब्राहम, सोमालिया के अब्दुलकावी अहमद यूसुफ, ब्राजील के एंतोनियो अगस्ते कानकाडो त्रिनदादे और लेबनान के नवाफ सलाफ शामिल हैं. ऐसे में जज के एक पद के लिए भंडारी और ब्रिटिश उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड के बीच मुकाबला था. यहां इस एक सीट को लेकर पांच राउंड के चुनाव कराए गए, जहां भंडारी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना वोट 115 से बढ़ाकर 121 कर, जबकि ग्रीनवुड का कुल वोट 76 से घटकर सोमवार को 68 पर पहुंच गया. हालांकि इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद की बैठक आगे के लिए टाल दिया गया. इससे भड़के थरूर ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर करके ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र के ढांचे पर सवाल उठाए. थरूर ने लिखा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा जब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जज के लिए भारत और ब्रिटेन के उम्मीदवारों के बीच चुनाव हो रहे हैं, ऐसे वक्त में संयुक्त राष्ट्र की वैधता और प्रभावशीलता दांव पर लगी है. महासभा की आवाज लंबे समय से अनसुनी की जाती रही है. इसके साथ ही वह ब्रिटेन पर प्रहार करते हुए कहते हैं, 'इस बार संयुक्त राष्ट्र के स्थायी सदस्य का उम्मीदवार महासभा में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा. महासभा का वोट बीते 70 से अधिक वर्षों से विशेषाधिकारों को अनुचित बढ़ावा दिए के लिए विरोध था. पी5 40 वोटों से हार गईं! इसके साथ ही उन्होंने कहा, यह बस भारत या किसी एक देश के बारे में नहीं. यह न्याय, समानता और निष्पक्षता के विचार को लेकर है. यह उस भविष्य को लेकर है, जो हम संयुक्त राष्ट्र को लेकर देखते हैं. अब सुधार का वक्त आ गया है.
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