महामीडिया न्यूज सर्विस
भारतीय कला को दुनिया के आगे रखेगा संघ का यह आयोजन

भारतीय कला को दुनिया के आगे रखेगा संघ का यह आयोजन

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 675 दिन 14 घंटे पूर्व
16/11/2017
नई दिल्ली (महामीडिया)  भारतीय ज्ञान और भारतीय कला परंपरा को दुनिया के सामने रखने के लिए अब तक का सबसे बड़ा आयोजन होने जा रहा है। इसकी शुरूआत अगले महीने उत्तर प्रदेश से होगी। यह आयोजन सीधे तौर पर तो संघ का नहीं है लेकिन इसमें संघ से जुड़े नेता से लेकर कलाकार तक सभी शामिल हैं। आयोजन को संस्कृति नैमिषेय नाम दिया गया है। इसके तहत यूपी के सीतापुर के नैमिषारण्य में 7-8 दिसंबर को अखिल भारतीय ज्ञान सत्र आयोजित होना है। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए एक साल से भी ज्यादा वक्त से तैयारी चल रही है। सबसे पहले 27 मई 2016 को संघ नेता भैयाजी जोशी को नासिक में संघ के संगठन संस्कार भारती के अध्यक्ष और कलाकार वासुदेव कामत ने कुछ कलाकारों के साथ मिलकर संस्कृति नैमिषेय का प्रजेंटेशन दिया। उसके बाद संघ नेता कृष्ण गोपाल, सुरेश सोनी, बीजेपी चीफ अमित शाह, संगठन मंत्री रामलाल, मोदी सरकार में मंत्री महेश शर्मा, सुष्मा स्वराज, स्मृति इरानी के साथ ही अनुपम खेर, परेश रावल, पंडित जसराज और लता मंगेशकर को भी आयोजन के बारे में प्रजेंटेंशन दिया। सूत्रों के मुताबिक लता मंगेशकर ने संस्कृति नैमिषेय के मुख्य मार्गदर्शन के लिए अपनी सहमति भी दी है। पिछले साल नवंबर में संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी इसका प्रजेंटेशन दिया गया। जिसके बाद इसी साल जून में बीजेपी शासित 11 राज्यों के संस्कृति मंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, संघ के सह सरकार्यवाह और कला जगत के लोगों के साथ हुई मीटिंग में इसका स्वरूप फाइनल किया गया। संघ के सूत्रों के मुताबिक यह आयोजन सांस्कृतिक और वैचारिक अश्वमेघ की तरह है। इसमें भारत की महान ज्ञान, कला और विज्ञान संपदा का विराट प्रदर्शन होगा। नैमिषारण्य में अलग अलग राज्यों से आए कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। संघ के एक नेता के मुताबिक नैमिषारण्य को इसलिए चुना गया है क्योंकि इसी जगह हजारों साल पहले 18 पुराण विकिसत हुए थे। यहां पर 88 हजार ऋषि अलग अलग जगह से आते थे और उनकी महासंगोष्ठी होती थी। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद जनवरी में मकर संक्रांति के दिन काशी से नैमिषेय प्रदक्षिणा शुरू करने की योजना है। प्रस्ताव के मुताबिक यह परिक्रमा देश के पूर्वी हिस्से से होते हुए दक्षिणी, मध्य भारत, पश्चिमी, उत्तरी भाग से होते हुए फिर काशी पहुंचेगी। तब काशी में भारत की सभ्यता, संस्कृति की गौरवशाली यात्रा को अलग-अलग माध्यमों से दर्शाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इसमें अलग-अलग राज्यों के संस्कृति मंत्रालयों के जरिए ज्यादा से ज्यादा टूरिस्टों को आकर्षित करने की योजना भी है। यह परिक्रमा करीब 8-9 महीने चलेगी, जिसके बाद इसका समापन होगा।
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