महामीडिया न्यूज सर्विस
सबसे बड़ी एल्युमीनियम निर्माता बनेगी वेदांत

सबसे बड़ी एल्युमीनियम निर्माता बनेगी वेदांत

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 188 दिन 33 मिनट पूर्व
21/11/2017
भुवनेश्वर(महामीडिया) अनिल अग्रवाल के मालिकाना हक वाली वेदांत लिमिटेड मौजूदा वित्त वर्ष में आदित्य बिड़ला समूह को पीछे छोड़ते हुए देश की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक बन सकती है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में वेदांत का कुल एल्युमीनियम उत्पादन 9.6 लाख टन है और कंपनी इस साल सालाना उत्पादन 16 लाख टन पर पहुंचाने की राह पर है। इसकी तुलना में आदित्य एल्युमीनियम और हिंडाल्को का उत्पादन ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश स्थिर चार संयंत्रों में 13.2 लाख टन है। वित्त वर्ष 2017 में समूह का कुल उत्पादन 12.6 लाख टन रहा। एल्युमीनियम की अन्य प्रमुख उत्पादक है सरकारी क्षेत्र की नैशनल एल्युमीनियम कंपनी, जो 4.2 लाख टन सालाना क्षमता के साथ तीसरे स्थान पर है। वेदांत लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी अभिजित पाटी ने कहा, समूह के तौर पर हम वित्त वर्ष 2018 में 16 लाख टन एल्युमीनियम का उत्पादन करेंगे, जो पिछले साल के 9.6 लाख टन के मुकाबले 66 फीसदी ज्यादा होगा। कंपनी के एल्युमीनियम उत्पादन में मुख्य रूप से मजबूती ओडिशा के झारसुगुड़ा संयंत्र में आई है, जहां विस्तार हो रहा है। इस साल झारसुगुड़ा स्मेल्टर की क्षमता 11 लाख टन हो जाएगी और छत्तीसगढ़ में बालको संयंत्र की क्षमता 5.6 लाख टन होगी। झारसुगुड़ा संयंत्र ने पिछले वित्त में 7.6 लाख टन एल्युमीनियम का उत्पादन किया था। उन्होंने कहा, झारसुगुड़ा में उत्पादन के चार नए लाइन तैयार हो रहे हैं, जिसमें से 2.5 लाइन का काम पहले ही पूरा हो चुका है। बाकी काम इस साल पूरा हो जाएगा। इसलिए मार्च 2018 तक झारसुगुड़ा की क्षमता 14 लाख टन पर पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी ने 25,000 करोड़ रुपये की लागत से झारसुगुड़ा में दो स्मेल्टर बनाए थे और इनकी संयुकक्त क्षमता 17.5 लाख टन है,जो दुनिया भर मेंं किसी एक जगह सबसे ज्यादा उत्पादन वाला एकल एल्युमीनियम संयंत्र है। कुछ समय से 5 लाख टन वाला छोटा स्मेल्टर चल रहा है, बड़े की क्षमता 12.5 लाख टन है और एसईजेड का दर्जा मोटे तौर पर बेकार पड़ा हुआ है क्योंकि बिजली प्राधिकरण के साथ विवाद है। कैप्टिव पावर प्लांट से बिजली लेने पर राज्य सरका के साथ विवाद के समाधान और लंदन मेटल एक्सचेंज पर एल्युमीनियम की कीमतों में तेजी ने कंपनी को बेकार पड़ी क्षमता के इस्तेमाल करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
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