महामीडिया न्यूज सर्विस
भारत में स्वास्थ्य नीति का विकास

भारत में स्वास्थ्य नीति का विकास

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 68 दिन 15 घंटे पूर्व
16/12/2017
भोपाल (महामीडिया) राजकुमार शर्मा भारत आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश एवं पर्यावरण संरक्षण के तीन स्तंभों पर टिके अपने ही विकास के मार्ग में परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। नई स्वास्थ्य नीति में ये उद्देश्य पूरे करने की दृष्टि होनी चाहिए और लक्ष्य निर्धारित करने एवं इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वित्तीय, तकनीकी तथा प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने के मामले में व्यवहारिक भी होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2014 के जिस मसौदे की घोषणा हुई थी, वह भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रशासन के पिछले छह दशकों में तीसरी नीति है। अल्मा अटा घोषणापत्र के बाद 2000 तक सभी के लिए स्वास्थ्य के वैश्विक दृष्टिकोण के साथ 1983 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति तैयार की गई थी। उसमें बुनियादी ढांचे के विकास, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा एवं स्वास्थ्य पेशेवरों के सुप्रशिक्षित वर्ग के विकास पर बहुत जोर दिया गया। किंतु यह दृष्टिपत्र बनकर ही रह गया क्योंकि इसमें प्राप्त किए जाने वाले लक्ष्यों एवं उनके लिए संसाधनों की आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया था। देश वर्ष 2000 तक सभी के लिए स्वास्थ्य का उद्देश्य प्राप्त करने के कहीं से भी करीब नहीं था।
सहस्राब्दी घोषणापत्र 2000 और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों को स्वीकार किए जाने से 2002 में नई स्वास्थ्य नीति के निर्माण को बल मिला। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2002 में सभी के लिए स्वास्थ्य का लक्ष्य प्राप्त करने में खामियों और चुनौतियों को स्पष्ट रूप से पहचाना गया तथा लोगों के स्वास्थ्य मानकों में सुधार के लिए अधिक व्यावहारिक तरीका अपनाया गया। उसने निकृष्ट संसाधन आधार को लोगों के लिए न्यूनतम स्वास्थ्य मानक सुनिश्चित करने के मार्ग में गंभीर बाधा के रूप में पहचान कर एकदम नया काम किया। उसमें सिफारिश की गई कि स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को 10 वर्ष के भीतर सकल घरेलू उत्पाद के 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया जाना चाहिए। उसमें यह कहते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पर जोर दिया गया कि स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय का कम से कम 50 प्रतिशत भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पर खर्च किया जाना चाहिए। उसमें पहली बार विभिन्न स्वास्थ्य परिणामों के लिए स्पष्ट रूप से पहचाने गए लक्ष्यों का उल्लेख किया गया, जिन्हें अगले 10 वर्ष के भीतर प्राप्त किया जाना था।
उस नीति स्वास्थ्य के लिए सरकारी खर्च पर अधिक जोर देने की वकालत की गई थी, इसके बावजूद स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च अगले 10 वर्ष तक जीडीपी के 1 प्रतिशत पर ही ठहरा रहा। यद्यपि रोग नियंत्रण तथा माता एवं शिशु स्वास्थ्य के संबंध में नीति में निर्धारित कुछ लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में देश ने अच्छा प्रदर्शन किया किंतु असंक्रामक रोगों के नियंत्रण, गरीबों और हाशिये पर पड़े लोगों को पक्षपात के बगैर स्वास्थ्य पेशेवरों की भारी कमी दूर करने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में वह वांछित उपलब्धियां प्राप्त नहीं कर सका।
नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2014 का मसौदा कई मामलों में सुखद रूप से अलग दृष्टिकोण वाला है। सरकार ने विशेषज्ञों और आम जनता की व्यापक प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए मसौदे को सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत कर नीति निर्माण में पारदर्शिता का सिद्धांत अपनाया हैं नीति के मसौदे में स्वास्थ्य क्षेत्र के संदर्भ में परिवर्तन पर कई प्रकार से विचार किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण है कि इसमें स्वास्थ्य सेवाओं की लागत के कारण कमरतोड़ खर्च की घटनाएं बढ़ने की बात स्वीकार की गई है और माना गया है कि गरीबी बढ़ाने में इसका बड़ा योगदान है। 

और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in