महामीडिया न्यूज सर्विस
स्वास्थ्य नीति का लोक व्यापीकरण

स्वास्थ्य नीति का लोक व्यापीकरण

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 68 दिन 15 घंटे पूर्व
16/12/2017
भोपाल (महामीडिया) राजकुमार शर्मा स्वास्थ्य सेवाओं की लागत के कारण पारिवारिक आय में लगने वाली सेंध आय में होने वाली वृद्धि को और गरीबी घटाने के लिए चलाई जा रही प्रत्येक सरकारी योजना को निष्प्रभावी कर सकती है। स्वास्थ्य की लागत के कारण असहनीय खर्च से जूझ रहे परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसमें यह भी स्वीकार किया गया है कि सेवा आपूर्ति में अधिकांश वृद्धि प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य से जुड़ी चुनिंदा सेवाओं तथा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम में हुई थी, आम जनता के स्वास्थ्य मानक सुधारने के लिए आवश्यक व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं में नहीं। संक्रामक रोगों एवं माता तथा नवजात के रोगों की बजाए असंक्रामक रोगों एवं चोटों के मामले बढ़ने पर नई नीति के मसौदे में पर्याप्त महत्व दिया गया है, जो दोनों के बीच संतुलन बिठाने का प्रयास करता है।
नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के मसौदे का प्राथमिक लक्ष्य निष्पक्षता, सर्वव्यापिता एवं समावेशी साझेदारी के कुछ निश्चित मुख्य सिद्धांतों का पालन करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था के सभी आयाम तैयार करने में सरकार की भूमिका की जानकारी देना, उसे स्पष्ट करना, सुदृढ़ करना एवं उसकी प्राथमिकता तय करना है।
किंतु दृष्टिपत्र और राष्ट्रीय नीति में बुनियादी अंतर होता है। राष्ट्रीय नीति परिणामोन्मुखी होनी चाहिए और संसाधनों की आवश्यकता के स्पष्ट उल्लेख के साथ विशिष्ट समयसीमा होनी चाहिए। नीति का ध्यान इसी बात पर होना चाहिए कि सरकार नियामकीय एवं विकासात्मक भूमिकाओं में क्या करना चाहती है।
वर्तमान नीति में निर्धारित किए गए उद्देश्य आकांक्षा से संबंधित हैं, जैसे दृष्टिपत्र में होते हैं। उन्हें एक नीति में परिवर्तन करने की आवश्यकता है, जिससे सुस्पष्ट लक्ष्य होने चाहिए, उन्हें प्राप्त करने के लिए निर्धारित समयावणि होनी चाहिए और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक वित्तीय तथा तकनीकी संसाधनों का उल्लेख होना चाहिए।
नीति में 10 से 15 वर्ष की अवधि का लक्ष्य होना चाहिए तथा उसके परिणामों अथवा लक्ष्यों का सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्वास्थ्य के संदर्भ में अन्य देशों के साथ भारत द्वारा भी स्वीकार किए गए सतत विकास के लक्ष्यों के साथ तालमेल होना चाहिए। सतत विकास के लक्ष्यों को 2030 तक प्राप्त किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों के विभिन्न घटकों के लिए समग्र लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। बुनियादी सिद्धांत के रूप में निष्पक्षता पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। वर्ष 2015 के बाद के विकास एजेंडा के अनुसार ?कोई भी छूट नहीं जाए? के वैश्विक सिद्धांत की प्रतिध्वनि राष्ट्रीय नीति के प्रारूप में होनी चाहिए।
पहली बार राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2002 में निवेश के उस स्तर का संकेत जीडीपी के प्रतिशत के रूप में किया गया था, जो स्वास्थ्य सेवाओं का अभीष्ट स्तर प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। यदि उसे प्राप्त किया जाना था तो अपनी जनता के स्वास्थ्य स्तर के मामले में भारत की तुलना ब्राजील और श्रीलंका के साथ की गई होती, जो अपने जीडीपी का 2 प्रतिशत से अधिक स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं। वर्तमान नीति में इस असंतुलन को ठीक करने का शानदार अवसर मिला है। वास्तव में नीति में निवेश को बढ़ाकर जीडीपी के 2 प्रतिशत तक ले जाने का संकल्प दोहराया गया है किंतु यह लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं की गई है। राज्य सरकारों के लिए भी लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए कि कुल सरकारी व्यय का कितना अंश उन्हें स्वास्थ्य पर खर्च करना है। विकसित अर्थव्यवस्था और पड़ोसी देश श्रीलंका तथा हमारे अपने केरल राज्य में सरकारी खर्च के 11 प्रतिशत अंश को अभीष्ट माना जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने हेतु प्रशासन की बेहतर व्यवस्थाओं एवं कानूनी ढांचे को प्रभावी स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण घटक होना चाहिए।
संविधान के अंतर्गत स्वास्थ्य राज्य का विषय है। किंतु विभिन्न रोग नियंत्रण एवं उन्मूलन कार्यक्रम तथा जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम लागू करने के लिए केंद्र सरकार भी समान रूप से उत्तरदायी है। केंद्र एवं राज्य सरकारों के दायित्व स्पष्ट रूप से विभाजित होने चाहिए तथा प्रदर्शन के मामले में जवाबदेही स्पष्ट रूप में तय होनी चाहिए। केंद्र सरकार सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के लिए राज्यों को अधिक संसाधन सौंप रही है, इसलिए लोगों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के मामले में राज्यों को अधिक जवाबदेही होनी चाहिए। किंतु ये बातें बहुत अस्पष्ट है और ठीक से समझी नहीं गई हैं। लोगों को न्यूनतम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में राज्यों के जवाबदेह नहीं होने का ही नतीजा है कि अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति में जमीन आसमान का अंतर है। यदि वर्तमान नीति स्वास्थ्य के संदर्भ में सतत विकास के लक्ष्यों में निर्धारित किए गए परिणाम प्राप्त करने हेतु भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य प्राप्त करने के संदर्भ में केंद्र एवं राज्यों के लिए जवाबदेही के ये न्यूनतम मानक निर्धारित कर सकी तो यह मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के क्रियान्वयन का विकेंद्रीकरण सेवा आपूर्ति के निम्नतम स्तर तक किया जाना नई राष्ट्रीय नीति की महत्वपूर्ण विशेषता होनी चाहिए।

और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in