महामीडिया न्यूज सर्विस
स्वास्थ्य को लेकर मेरी चिंतायें

स्वास्थ्य को लेकर मेरी चिंतायें

admin | पोस्ट किया गया 155 दिन 22 घंटे पूर्व
22/12/2017
भोपाल (महामीडिया) राजकुमार शर्मा बड़े बच्चों, किशोंरो, वयस्क पुरुषों, गैर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इससे बाहर रखा गया था। मात्र मृत्यु दर मे कमी पर विचार किया गया था, जबकि रुग्णता में कमी और विकलांगता एमडीजी के दायरे में नहीं थी। सबसे महत्वपूर्ण तौर पर, इन ऊर्ध्वाधर दृष्टिकोणों ने मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली निर्माण की आवश्यकता को शामिल नहीं किया था, जो अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यों की उपेक्षा किए बिना इन वादों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकता है। इस बात को स्वीकार नहीं किया गया था कि ऊर्ध्वाधर कार्यक्रम चाहे इरादे में कितने भी महान और डिजाइन में कितने भी विस्तृत हों, उन्हें कमजोर या बेकार स्वास्थ्य प्रणालियों में जबरन शामिल नहीं कराया जा सकता है। वास्तव में, उन्होंने ऊपर से उतारे गए वित्त पोषित कार्यक्रमों के माध्यम से, जिनके लिए कम और मध्यम आय वाले देशों के सीमित संस्थागत और मानव संसाधनों से पूरा ध्यान और पूर्ण समर्पण की आवश्यकता थी, स्वास्थ्य व्यवस्था में खलल डालने का जोखिम पैदा कर दिया था। स्वास्थ्य समानता के लक्ष्य के लिए, एमडीजी ने राष्ट्र के भीतर आय, शिक्षा, ग्रामीण-शहरी, लैंगिक और अन्य सामाजिक जनसांख्यिकीय विभाजनों के बीच समानता के अंतरों पर गौर किए बिना केवल सकल राष्ट्रीय संकेतों को मापने की जरूरत समझी। एमडीजी कई मायनों में एक विशिष्ट सुधार है। सबसे पहली बात यह कि इसके पाठ पर एक खुली और लोकतांत्रिक अंतर-सरकारी प्रक्रिया के माध्यम से बातचीत हुई थी। दूसरा, इसके लक्ष्य सभी देशों के लिए प्रासंगिक हैं। लक्ष्य विकास के कई डोमेन को कवर करते हैं, लेकिन सतत विकास के एक ढांचे के भीतर एकीकृत कर देते हैं, जो इन संबंधों को स्वीकार करता है। चौथे, पर्यावरण संरक्षण पर बहुवांछित ध्यान जाता है, जो हमें यह याद दिलाता है कि आर्थिक विकास और वैश्विक विकास का मार्ग इस धरती के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक न होना चाहिए और न होने की जरूरत है। पांचवे, स्वास्थ्य एसडीजी, स्वास्थ्य के प्रति जीवन का संदर्भगत अध्ययन करने की दृष्टिकोण अपना कर और स्वास्थ्य इक्विटी को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य देखभाल की लागत के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने में स्वास्थ्य प्रणाली की भूमिका पर बल देकर, स्वास्थ्य एमडीजी की त्रुटियों को ठीक करता हैं 17 एमडीजी का एकमात्र लेकिन बुलंद स्वास्थ्य लक्ष्य सभी के लिए स्वस्थ जीवन और हर उम्र में आरोग्य का आह्वान करता है। यद्यपि यह थोड़ा अस्पष्ट लगता है, लेकिन यह एक सार्वभौमिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जो सभी लोगों तक जाती है और एक सकारात्मक ढंग से स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। स्वास्थ्य लक्ष्य ये जुड़े नौ लक्ष्य कार्रवाई का मार्गदर्शन करने के लिहाज से विशिष्ट हैं। उनमें आह्वान किया हैः 2030 तक मातृ मृत्यु दर को कम करके 70 करना, वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को 2 और नवजात मृत्यु दर को 12 करना, एड्स मलेरिया और टीबी की महामारी को समाप्त करना, असंक्रामक रोगों से समय से पहले होने वाली मौतों को कम करना, सड़क यातायात दुर्घटनों से होने वाली मौतों को आधा करना, मादक द्रव्यों के सेवन को कम करना और वायु, जल और मृदा प्रदूषण से होने वाले नुकसान को कम करना। इसमें आवश्यक दवाओं और टीकों की उपलब्धता और वित्तीय सुरखा और साथ ही प्रजनन और यौन स्वास्थ्य सेवाओं की भी निर्बाध उपलब्धता के साथ सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का आह्वान किया गया है। इसक अलावा, यह तंबाकू नियंत्रण के लिए डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन के प्रभावी क्रियान्वयन की भी मांग करता है। स्वास्थ्य के लक्ष्यों के साथ अन्य एमडीजी का संबंध बहुत स्पष्ट है, चाहे वह गरीबी में कमी से संबंधित हो, या भूख खत्म करने से, शिक्षा तक सार्वभौत्मक पहुंच प्रदान करने से, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने से, योजनाबद्ध शहरी विकास से, स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने से, महासागरीय जीवन और वानिकी की रक्षा करने से, उपभोग कम करने से, शांति को बढ़ावा देने और सबसे महत्वपूर्ण तौर पर धरती की रक्षा करने से संबंधित हो। स्वास्थ्य पर वातावरण का प्रभाव एक बहुत ज्यादा चिंता का विषय है, क्योंकि वायु प्रदूषण का स्तर दुनिया भर में बढ़ रहा है, और रासायिनिक प्रदूषण भी पानी और मिट्टी की गुणवत्ता में कमी ला रहा है। तेज से तेज हो रही ग्लोबल वार्मिंग के साथ जलवायु परिवर्तन गर्म हवाओं, बाढ़, चरम मौसम की घटनाओं, वेक्टर जनित रोगों के प्रसार के माध्यम से- जैसे कि अधिक ऊंचाई और आर्थिक अक्षांसों पर मच्छरों की पैदाइश के रूप में, कई फसलों के कम उत्पादन और उनमें पौषक तत्वों की निम्न गुणवत्ता, तनाव से संधित मानसिक बीमारी और जलवायु संबंधित प्रवास के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया हैं स्वास्थ्य अब दृढ़ता से विकास डोमेन की इस परस्पर संबंधित मैट्रिक्स के भीतर स्थित है। हालांकि विभिन्न लक्ष्यों से जुड़े हुए लक्ष्यों को मापने के लिए संकेतक मार्च 2016 में स्वीकार किए जाएंगे, देशों को भी अन्य क्षेत्रों में नीतियों के स्वास्थ्य पर प्रभावों के आकलन का संचालन करने के लिए क्षमता का निर्माण करने की जरूरत है। भारत में संयुक्त राष्ट्र में, सितंबर 2015 में एमडीजी पर हस्ताक्षर किए थे। एमडीजी द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य एजेंडा भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक है क्योंकि यह व्यापक विकास का एजेंडा है। बात चाहे एमडीजी के एजेंडे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखने की हो, असंक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे नए तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई की या सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के एक सुनियोजित कार्यक्रम को लागू करने की शुरूआत करने की हो, भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताएं एमडीजी लक्ष्यों के साथ अच्छी तरह तालमेल बैठाती हैं। इन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए हमें अपनी स्वास्थ्य प्रणाली के प्रदर्शन को बेहतर बनाने की जरूरत है। समान रूप से महत्वपूर्ण तौर पर, हमें विभिन्न विकास क्षेत्रों में कार्यों में तालमेल में अधिक से अधिक नीतिगत तालमेल की दिशा में काम करने की जरूरत है, ताकि वे एक दूसरे को सबल बनाएं, न कि एक-दूसरे को नष्ट करें। तभी हम स्वंय के लिए एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। स्थायी और समान विकास के लिए हमारे मार्ग पर आगे एक बड़ी छलांग लगाने के लिए 2016 का लीप वर्ष एक अच्छा शकुन है। सभी एमडीजी में सफलता का सबसे अच्छा योगात्मक संसूचक स्वास्थ्य है। सतत विकास के इस युग में हमारी सफलता का मंत्र हमारे लोगों के स्वास्थ्य हो। 

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