महामीडिया न्यूज सर्विस
स्वास्थ्य का समाजशास्त्रीय अध्ययन

स्वास्थ्य का समाजशास्त्रीय अध्ययन

admin | पोस्ट किया गया 633 दिन 20 घंटे पूर्व
24/12/2017
भोपाल (महामीडिया) राजकुमार शर्मा नतीजतन सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देषों द्वारा घोषित किया गया जिसममें से निम्नलिखित निर्विवाद रूप से स्वास्थ्य से जुड़ते हैं-
क. 1990 और 2015 के बीच भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या को आधा करना।
ख. 1990 और 2015 के बीच पांच वर्ष से कम उम्र में मरने वाले बच्चों की संख्या में दो तिहाई की कमी लाना।
ग.  1990 और 2015 क बीच मातृत्व मृत्यु अनुपात में तीन चौथाई की कमी लाना।
घ. सार्वभौमिक रूप से 2015 तक उत्पादक स्वास्थ्य को प्राप्त करना।
च. 2015 तक एचआईवी/एड्स की वृद्धि दर को रोक देना और वहां से इसकी वृद्धि दर को नकारात्मक करना।
छ. 2015 तक मलेरिया और अन्य बड़ी बीमारियों की वृद्धि दर को रोक देना और वहां से इसकी वृद्धि दर को नकारात्मक करना।
ज.  2015 तक सुरक्षित पेय जल और बुनियादी स्वच्छता के लिए सतत उपलब्धता के बिना रह रही आबादी के अनुपात को आधा करना।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 201 की रिपोर्ट के मुताबिक पांच वर्ष से नीचे तक के बच्चों की सभी मृत्यु में से 45 प्रतिशत में पोषण की कमी और कुपोषण बड़ा कारण रहा। 1990-2013 के दौरान विकासशील देशों में वजन की कमी वाले बच्चों का अनुपात 28 प्रतिशत से कम वाले बच्चों का अनुपात 28 प्रतिशत से कम होकर 17 प्रतिशत हो गया और 2015 में इसे 16 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद थी। वैश्विक स्तर पर यह 1990 में 25 प्रतिशत से घटकर 2013 में 1 प्रतिशत हो गया। जबकि भूख के शिकार लोगों की संख्या को आधी करने का लक्ष्य रखा गया था। इस संकेतक के लिए एमडीजी के लक्ष्य की प्राप्ति उब्ल्यूएचओ के उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोपीय क्षेत्र और पश्चिमी प्रशात क्षेत्र में हुई जबकि पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र, दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र और अफ्रीकी क्षेत्रों में लक्ष्य अधूरे रह गए। भारत में लगभग 47 प्रतिशत बच्चे सामान्य से कम वनज के हैं। उसी प्रकार से 1990-2013 के दौरान अविकसित बच्चों की संख्या वैश्विक स्तर पर 247 मिलियन से घटकर 161 मिलियन हो गई, इस प्रकार इसमें 37 प्रतिशत की कमी आई थी। हम इस लक्ष्य को छूने में नाकाम रहे। दूसरा, 1990-2013 के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 49 प्रतिशत कमी आई। यह संख्या प्रत्येक 1000 प्रसव में 90 मृत्यु से घटकर 46 हो गई। इस प्रकार वैश्विक स्तर पर 1990 की अपेक्षा 2013 में कुछ 17000 बच्चों की मृत्यु हुई। वैश्विक स्तर पर नवजात बच्चों की मृत्यु की संख्या 1990 में 4.7 मिलियन से घटकर 2013 में 2.8 मिलियन रह गई। उस दौरान प्रत्येक 1000 प्रसव में नवजात मृत्यु की संख्या 33 से घटकर 22 हो गई। पांच वर्ष से कम उम्र में मृत्यु दर में क्षेत्रवार लक्ष्यों पर नजर डालने पर पता चलात है कि 2013 तक अफ्रीकी देषों 6 देशों में यह संख्या घटकर दो तिहाई रह गई और दो देश इसके लिए अग्रसर हैं जबकि 25 देशों ने कम से कम आधा लक्ष्य पा लिया है, वहीं 14 देशों ने अभी आधे से भी कम लक्ष्य की प्राप्ति की है। यूरोपीय क्षेत्र में 23 ने लक्ष्य पा लिया है और 4 देश इसके लिए अग्रसर हैं जबकि 26 देशों ने कम से कम आधा लक्ष्य पा लिया है और एक भी देश ऐसा नहीं है जिसने आधा लक्ष्य भी नहीं पाया हो। पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में 6 ने लक्ष्य पा लिया है और 2 देश इसके लिए अग्रसर हैं जबकि 12 देशों ने कम से कम आधा लक्ष्य पा लिया है और एक ने अभी आधे से भी कम लक्ष्य को पाया हैं पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में 3 ने लक्ष्य पा लिया है और कोई भी देश इसके लिए अग्रसर नहीं है जबकि 18 देशों ने कम से कम आधा लक्ष्य पा लिया है और 6 ने अभी आधे से भी कम लक्ष्य को पाया है। वैश्विक स्तर पर 48 ने लक्ष्य पा लिया है और 13 इसके लिए अग्रसर हैं जबकि 109 देशों ने कम से कम आधा लक्ष्य पा लिया है और 24 ने अभी आधे से भी कम लक्ष्य को पाया हैं इस प्रकार ज्यादातर देश पांच वर्ष से कम उम्र में मृत्यु दर को 2015 तक दो तिहाई तक कम करने का लक्ष्य नहीं पा सके।
पांच वर्ष से कम उम्र में मृत्यु के बड़े कारण हैं- 
क. अपरिपक्व जन्म जटिलताएं
ख. न्यूमोनिया
ग. जन्म श्वासारोध
घ. मलेरिया।
वास्तव में नवजात अवस्था बच्चे के जीवन के लिए सबसे अधिक संवेदनशील अवधि होती है। 2013 में पांच वर्ष से कम आयु में लगभग 44 प्रतिशत मृत्यु जन्मजात अवस्था के दौरान हुई जो कि 1990 के समय से 37 प्रतिशत अधिक है। 
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