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जन्म शताब्दी समारोह से समाज में ऊर्जा, आनंद एवं उत्साह का प्रवाह

जन्म शताब्दी समारोह से समाज में ऊर्जा, आनंद एवं उत्साह का प्रवाह

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 123 दिन 7 घंटे पूर्व
19/04/2017

??यह हम सब भारतीयांे के लिये अत्यंत हर्ष एवं गर्व का विषय है कि भारत के एक महान सपूत, परम तपस्वी, चेतना वैज्ञानिक, विश्व प्रशासक एवं संत परम् पूज्य महर्षि महेश योगी जी का जन्म 12 जनवरी 1917 को मध्यप्रदेश ;वर्तमान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पासद्ध स्थित ग्राम पांडुका में हुआ था। तदानुसार वर्ष 2017-18 परम पूज्य महर्षिजी का जन्म शताब्दी वर्ष है। यह हम सभी के लिये अपने आप को परम पूज्य महर्षि जी एवं वेद विज्ञान के आदर्शों के प्रति पुनः समर्पित करने का शुभ अवसर है।?? महर्षि जी के तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी ने यह बतलाते हुए कहा कि महर्षि जी ने बद्रिकाश्रम ज्योतिष्पीठ के परम् पूज्य गुरूदेव स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी के सानिध्य में रहकर भारतीय वेदों में निहित ज्ञान को प्राप्त करके वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हुये उसका प्रचार-प्रसार सरल भाषा में कर पूरे विश्व में भारत के वैदिक ज्ञान, विज्ञान, वेदांत, योग और भावातीत ध्यान की कीर्ति स्थापित की। 

एक प्रश्न के उत्तर में ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि श्महर्षि जी ने ही प्रत्येक मानव में चेतना जागृत करने और उसे स्थायित्व देने हेतु ?भावातीत ध्यान? की एक सरल, सहज एवं प्रयास रहित पद्धति विश्व को प्रदान की। इसके प्रतिदिन प्रातः एवं संध्या मात्र 20 मिनट अभ्यास करने से अभ्यासकर्ता को बहुत अधिक शारीरिक व मानसिक लाभ प्राप्त होते हैंं जिनमें एकाग्रता तथा सकारात्मकता में वृद्धि, चिंता में कमी, उत्तम स्वास्थ्य, सहयोगियों के साथ संबंध में मधुरता आदि प्रमुख हैं। 33 देशों के 250 स्वतंत्र शोध संस्थानों व विश्व विद्यालयों में 700 से अधिक वैज्ञानिक  अनुसंधानों ने यह प्रतिपादित किया है कि जब किसी भी स्थान या राष्ट्र की जनसंख्याके 1 प्रतिशत व्यक्ति भावातीत ध्यान या जनसंख्या के 1 प्रतिशत के वर्गमूल के बराबर के व्यक्ति भावातीत ध्यान-सिद्धि कार्यक्रम का अभ्यास एक साथ एक स्थान पर करते हैं तब समाज की सामूहिक चेतना में सतोगुण की वृद्धि होती है एवं नकारात्मकता दूर होती है। वैज्ञाानिकों ने इसे ?महर्षि प्रभाव? का नाम दिया है। ऐसा होने पर प्रत्येक व्यक्ति समाज, देश एवं विश्व में स्थायी शांति की इकाई के रूप में स्थापित होगा और तभी विश्व में राष्ट्रों के बीच होेने वाले तनाव और फिर उससे उत्पन्न होने वाले आतंकवाद और युद्धों की स्थिति समाप्त हो सकेगी।श् 

ब्रह्मचारी जी ने आगे बतलाया कि ??महर्षि जी ने सदैव ?जीवन आनंद है? के ब्रह्यवाक्य के उद्घोष के साथ 20 वीं शताब्दी के 60 एवं 70 के दशक में निराशा एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों से ग्रस्त मानवता को आशा, उत्साह व सकारात्मकता की सुगंध से सुवासित कर दिया था। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के आधार पर वर्ष 1975 में ही ?ज्ञान युग? के अवतरण की घोषणा कर दी थी और कहा था कि भारत अपनी सनातन ज्ञान परंपरा के बल पर पुनः जगद्गुरु के रूप में विश्व के प्रत्येक देश व प्रत्येक नागरिक का जीवन आनंदमय बनाने हेतु मार्गदर्शन करेगा। अब ज्ञान युग का सूर्य आकाष के मध्य में पहुँच रहा है। हम सब जानते हैं कि मध्य का सूर्य समान रूप से सबको प्रकाष व ऊर्जा प्रदान करता है।

महर्षि जी का सदैव देश के भविष्य विद्यार्थियों एवं युवाओं की क्षमता में अपार विश्वास था। उनके द्वारा लिखित पुस्तक ?साइंस ऑफ बीईंग एण्ड आर्ट ऑफ लिविंग? में उन्होंने बतलाया कि प्रत्येक मनुष्य मंे अपार आंतरिक क्षमता होती है जो कि वह अपने विद्यार्थी जीवन में उचित रूप से विकसित कर सकता है और यदि ऐसा होता है तो विश्व का प्रत्येक नागरिक एक उच्च विकसित व्यक्तित्व होगा जो कि अपने पूरे सामर्थ्य का उपयोग स्वयं के एवं दूसरों के उत्थान के लिए करेगा। विद्यार्थी पूर्ण शिक्षा प्राप्त करें इस हेतु उन्होंने  चेतना आधारित शिक्षा प्रणाली विश्व को प्रदान की ?जो ज्ञान है तथा ज्ञान की क्रिया? के साथ साथ ज्ञान प्राप्त करने वालेे अर्थात ज्ञाता के विकास पर  भी केद्रित है जबकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल प्रथम दो पर ही केन्द्रित होने के कारण पूर्ण नहीं है।??

ब्रह्मचारी गिरीश जी ने एक प्रश्न के उत्तर में बतलाया कि परम पूज्य महर्षि जी के ज्ञान, दर्शन एवं शिक्षा के प्रचार प्रसार हेतु देश में कई शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक संस्थायें स्थापित की गई हैं जिनमें भारत के 16 राज्यो में संचालित 148 महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय, महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, महर्षि इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, महर्षि महाविद्यालय, महर्षि वेद विज्ञान विश्व विद्यापीठम् आदि प्रमुख हैं। सभी महर्षि संस्थान एवं अन्य सभी सहयोगी गण महर्षि जी की जन्म शताब्दी पूरे देश में वर्ष भर समारोहपूर्वक मनायेंगे। संपूर्ण वर्ष मनाये जाने वाले कार्यक्रमों में भारत की सामूहिक चेतना में सतोगुण की वृद्धि के लिए 3,500 और विष्व की सामूहिक चेतना के लिये 9000 साधकों के स्थायी समूह का निर्माण, प्रत्येक नगर में महर्षि चेतना पर आधारित शिक्षा का प्रदाय, प्रत्येक नगर व विकास खण्ड में अष्टांग योग, भावातीत ध्यान, सिद्धि कार्यक्रम, योगिक उड़ान व वेद विज्ञान का ज्ञान उपलब्ध कराने हेतु महर्षि वेद विज्ञान भवनों  की स्थापना, नित्य 1500 वैदिक पंडितों द्वारा यज्ञ अनुष्ठानों के संपादन से विश्व परिवार में सुख, शांति,संपन्नता, प्रबुद्धता और अजेयता लाने हेतु 48 ब्रह्मानंद सरस्वती नगरों की स्थापना, प्रत्येक नगर में महर्षि स्वास्थ्य विधान केंद्र व प्रत्येक प्रांत में महर्षि चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना, महर्षि जैविक कृषि के सिद्धातों और प्रयोगों का प्रचार प्रसार करना तथा महर्षि गंधर्ववेेद के अध्ययन, अध्यापन व कार्यक्रमों के आयोजन से प्रकृति में सामंजस्य एवं संतुलन बनाये रखना प्रमुख हैं। साथ ही पूरे भारतवर्ष मंे?जीवन की पूर्णता का उत्सव? विषय पर 100 सम्मेलन तथा सभी नागरिकों मेेें शांति, समृद्धि, पूर्ण स्वास्थ्य तथा प्रबुद्धता, एवं  सभी राष्ट़ªों में अजेयता के संकल्प के साथ मुख्य तीर्थ स्थानों में यज्ञ-अनुुष्ठान आयोजित किये जावेंगे। 1000 योग एवं भावातीत ध्यान षिविरों का आयोजन भी होगा।

12 जनवरी 2017 को प्रातः 10ः30 बजे महर्षि जन्म शताब्दी वर्ष का उद्घाटन समारोह देश की राजधानी नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम परिसर के सभाग्रह में संपन्न हुआ। इसी तारतम्य में तेलांगना में हैदराबाद, कर्नाटक में बेंगालूरू, केरल में शोरनूर तथा तमिलनाडू में चैन्नई में महर्षि जन्म शताब्दी समारोह गौरवमयी सनातन परम्परानुसार अत्यंत उत्साह पूर्वक आयोजित किये गये जिसमें हजारों की संख्या में गणमान्य नागरिकों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन समारोहों के आयोजन से महर्षि जी के संदेश ??जीवन पूर्ण है और जीवन आनंद है?? को जनमानस के अवचेतन में व्यापक रूप से संचारित किया गया।

ऐसे ही एक आनंद उत्सव का आयोजन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 19 फरवरी 2017 प्रातः 10ः30 से रवीन्द्र भवन में श्री विश्वास सारंग माननीय मंत्री सहकारिता मध्य प्रदेश शासन, श्री आलोक संजर माननीय सांसद लोकसभा, महर्षि विद्या मन्दिर विद्यालय समूह के माननीय अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश जी, भोपाल स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों के माननीय कुलपतिगणों तथा प्रदेश के अनेक माननीय गणमान्यों, वैदिक विद्धानों एवं पंडितों की पावन उपस्थिति में आयोजित किया जा रहा है। 

ब्रह्मचारी गिरीश जी ने विश्वास प्रगट किया कि परमपूज्य महर्षि जी केे जन्मशताब्दी वर्ष में महर्षि द्वारा प्रणीत विचारों से भारत देश के समस्त विद्यार्थियों तथा नागरिकों में अत्यंत उत्साह एवं ऊर्जा का संचार होगा। साथ ही इस ज्ञान से इन सभी को भविष्य में उचित मार्ग के चुनाव करने में सहायता मिलेगी एवं हम सभी मिलकर महर्षि जी के ब्रह्मवाक्य ?जीवन आनंद है? का उद्घोष करते हुए उनकी कल्पना ?भूतल पर स्वर्ग? को साकार करने में समर्थ होंगे।


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