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चूहों के दिमाग पर इंसानी बच्चों के खून से उत्तेजक प्रभाव

चूहों के दिमाग पर इंसानी बच्चों के खून से उत्तेजक प्रभाव

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 121 दिन 13 घंटे पूर्व
20/04/2017
लंदन। एक नए अध्ययन में पता चला है कि इंसानी शिशुओं से खून से बूढ़े हो रहे चूहों में सीखने की क्षमता और याददाश्त में सुधार होता है। शोध के नतीजों से उत्साहित वैज्ञानिक अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या युवा बच्चों के खून से वृद्ध लोगों को फिर से जीवंत बना सकता है। 
यह अध्ययन 19 अप्रैल को जर्नल नेचर में प्रकाशित किया गया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि इंसानी गर्भनाल के खून से निकाले गए प्लाज्मा का चूहों के दिमाग पर एक उत्तेजक प्रभाव पड़ा। शोधकर्ताओं ने पाया कि यंग ब्लड से चूहे के हिप्पोकैम्पस में नए न्यूरॉन्स के निर्माण को बढ़ावा होता दिख रहा था।
यह दिमाग का वह क्षेत्र है, जो नई यादों को बनाने में शामिल होता है। यह भी देखा गया कि इंसानी गर्भनाल के प्लाज्मा का इंजेक्शन लगाने वाले चूहों ने भूलभुलैया में दिए गए टास्क को अधिक तेजी से पूरा कर लिया। वहीं, सेलाइन का इंजेक्शन दिए जाने वाले चूहे इसे उतनी तेजी से पूरा नहीं कर सके।
शोधकर्ता खून में मौजूद उन कारकों की भी पहचान कर रहे हैं, जो इसके प्रभाव को स्पष्ट करने में मदद कर सके। उन्होंने टीआईएमपी2 नामक एक प्रोटीन का पता किया है। यह नए न्यूरॉन्स के गठन और न्यूरोप्लास्टिसिटी के प्रमोशन के लिए जिम्मेदार है। यानीनए अनुभवों के आधार पर बदलने और सीखने की क्षमता इसी से प्रभावित होती है।

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