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साधु संतों के आशीर्वाद से महर्षि जन्म शताब्दी वर्ष समारोह आरम्भ

साधु संतों के आशीर्वाद से महर्षि जन्म शताब्दी वर्ष समारोह आरम्भ

admin | पोस्ट किया गया 281 दिन 3 घंटे पूर्व
12/01/2018
भोपाल (महामीडिया) महर्षि महेश योगी जन्म शताब्दी वर्ष पूर्णता समारोह के अन्तर्गत आज आशीर्वाद दिवस समारोह में स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज, बद्रिकाश्रम हिमालय, अयोध्या मन्दिर न्यास के प्रमुख नृत्यगोपाल दास, मण्डलेश्वर विश्वेश्वरानन्द, सद्गुरू जितेन्द्र नाथ महाराज, मण्डलेश्वर स्वामी उमाकान्त सरस्वती, देश व्यापी ज्योति प्राप्त संत पुरूष वेदांती महाराज सहित अनेक साधु-संतों ने महर्षि महेष योगी जी के देश-विदेश में की गई विभिन्न कार्यों का उल्लेख करते हुए उनके शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी और संस्थान को आशीर्वाद वचन दिये इस अवसर पर मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षामंत्री जयभान सिंह पवैया, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुरेन्द्र पटवा, भोपाल के सांसद आलोक संजर, प्रकाश श्रीवास्तव सहित अधिकारी, कार्मचारी, शिक्षक, शिक्षिकायें एवं छात्र छात्रायें भारी संख्या में मौजूद थे। 
इस अवसर पर स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों सहित महात्मा गांधी ने की थी किन्तु अब समय आ गया कि रामराज्य की स्थापना हो कर रहेगी।  इसमें महर्षि महेश योगी संस्थान की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। उन्होंने बताया कि विश्व हिन्दु परिषद् 2-3 बार आग्रह कर चुका था कि अयोध्या में भगवान राम परम्परा का एक स्मारक होना चाहिए इसलिए महर्षि महेश योगी संस्थान से सहयोग लेना चाहिए। इसके लिए महर्षि संस्थान ने 20 एकड़ जमीन विश्व हिन्दु परिषद् को दे दी है। इसके साथ ही महर्षि संस्थान ने अयोध्या में रामायण विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु सहमति जताई है।
इससे पूर्व महर्षि जन्म शताब्दी के अवसर पर तीन दिवसीय कार्यक्रम राजधानी के छान स्थित ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम में नवनिर्मित उत्सव भवन में आरम्भ हुआ। सर्वप्रथम ब्रह्मचारी गिरीष जी ने अतिथियों का स्वागत के बाद सरस्वती पूजन, गुरू वंदना की गई इसके बाद इन्होंने गुरूदेव स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती महाराज की चरण पादुका पूजन का कार्यक्रम शुरू किया। कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए ब्रह्मचारी गिरीशजी ने बताया कि सारे भारतवर्ष में महर्षि जी की भावातीत ध्यान को प्रचार-प्रसार करने के लिए पिछली 12 जनवरी से आज तक जन्म शताब्दी वर्ष में भारत में मनाया गयां इस दौरान विभिन्न प्रदेशो, जिलों में 102 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसकी शुरूआज दिल्ली से की गई थी। उन्होंने बताया कि महर्षि जी के ब्रह्मवाक्य जीवन ही आनन्द है वाक्य को लेकर जनमानस को ज्ञान, वेदज्ञान, भावातीत ध्यान आदि विचारों को जनमानस से अवगत कराया गया। उन्होंने का कि अगर महर्षि जी के सिद्धांतो का पालन करें तो वह कभी धूमिल नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और समाज को आज साधनामय जीवन व्यतीत करना चाहिए। ब्रह्मचारी ने महर्षि जी द्वारा देश विदेश में किस प्रकार ज्ञान की पताका फहराई उनके बारे में संक्षित विवरण बताया।
ब्रह्मचारी गिरीश जी यह महत्वपूर्ण बात भी बताई की इसकी सफलता के बावजूद महर्षि जी ने इसका श्रेय स्वयं न लेते हुए उन्होंने गुरूदेव को पूरा श्रेय सौंप दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे एवं पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा सभी साधु संतों का आशीर्वाद लेते हुए का कि हम सबका प्रयास यही है कि हमारी संस्कृति परंपरा हमारे रीतिरिवाज सबको सृजित करना हमारा धर्म है और यह हम सबको मिलकर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश एक ऐसा राज्य है जो संस्कृति के विकास के लिए कार्य कर रही है। इसके अन्तर्गत प्रतिवर्ष 1200 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा आनंद विभाग के गठन को सराहनीय बताया।
इस अवसर पर उपस्थित उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने म. प्र. सरकार की एकात्म यात्रा की जानकारी देेते हुए बताया कि आंकारेश्वर में 108 फुट ऊँची शंकराचार्य की मूर्ति स्थापित की जा रही है पवैया जी ने हिन्दु धर्म और उसकी संस्कृति पर किस प्रकार कुठारघात किया जा रहा है उसका भी उल्लेख किया उन्होंने नर्मदा यात्रा और वृक्षारोपण के बारे में भी जानकारी दी। पवैया जी ने हिन्दू धर्म और उसकी संस्कृति पर किस प्रकार कुठारघात किया जा रहा है उसका भी उल्लेख किया। महर्षि महेष योगी जी का उदय 12 जनवरी को हुआ था इसलिए तीन दिवसीय समारोह में कल का दिन ज्ञान युग दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इस कार्यक्रम में देश के ख्यातिप्राप्त शिक्षाविद और विश्वविद्यालयों के कुलपति शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में प्रकाश डालेंगे। इस अवसर पर फैजाबाद के पूर्व सांसद वेदांती जी महाराज ने कहा कि पूरे विश्व में महर्षि महेश योगी संस्थान में ब्राह्मणों को पंडितों का रोजगार दिलाया। रोजगार दिलाया है उतना किसी ने नहीं दिलाया इस संदर्भ में एक वृतांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार मुझे महर्षि संस्थान के एक छात्र का फोन इंग्लैंण्ड से आया जब मैं उससे पूछा कि कहाँ हो क्या कर रहे हो तो उसने कहा कि महर्षि संस्थान से संस्कृत एवं वेद का प्रशिक्षण पूरा कर एक मन्दिर में पुजारी एवं संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहा हूँ। उन्होंने इस अवसर पर सरकारों से आग्रह किया कि वह संस्कृत विद्यालयों में केवल संस्कृत के ही विद्वान शिक्षक नियुक्त करें इसकी स्पस्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। उन्होंने इस अवसर पर यह भी कहा कि संस्कृत शिक्षक के पदों पर आरक्षण न लागू किया ।

-धर्मेंद्र सिंह ठाकुर 



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