महामीडिया न्यूज सर्विस
समग्र शिक्षा पर शिक्षाविदों का मार्ग दर्शन

समग्र शिक्षा पर शिक्षाविदों का मार्ग दर्शन

admin | पोस्ट किया गया 185 दिन 6 घंटे पूर्व
12/01/2018
भोपाल (महामीडिया) महर्षि महेश योगी जी जन्म शताब्दी पूर्णताः समारोह के उपलक्ष में आज ज्ञानयुग दिवस के अन्तर्गत महर्षि संस्थान द्वारा समग्र शिक्षा वर्तमान-आवश्यकता विषय पर विभिन्न विश्व विद्यालयों के कुलपति और राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षाविदों ने अपने-अपने सुझाव और मार्ग दर्शन दिया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अनन्त श्री विभूषित स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज बद्रिकाश्रम हिमालय, थे और शिक्षा विद के रुप में ब्रह्मचारी गिरीश जी के अलावा महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भुवनेश शर्मा, बिलासपुर छत्तीसगढ़ विश्व विद्यालय के कुलपति जी.डी. शर्मा, बरकतउल्लाह विश्व विद्यालय के कुलपति डा. प्रमोद वर्मा, भोजमुक्त विश्व विद्यालय के कुलपति डा. रविन्द्र कान्हेरे, मेवाड़ विश्वविद्यालय के शशांक द्विवेदी, हिन्दी विश्व विद्यालय के कुलपति आचार्य रामदेव आदि शामिल थे। 
इस अवसर पर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने सभी शिक्षाविदों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज महर्षि महेश योगी जी की प्रथम जन्म शताब्दी पूर्ण होकर दूसरी शताब्दी में प्रवेश कर रहें हैं। मैं भी सोचता हूं कि भारत में वर्तमान उच्च शिक्षा पद्धति और पूर्व की मैकाले की शिक्षा पद्धति ठीक नहीं है इससे बेहतर हमारी गुरुकुल शिक्षा पद्धति अच्छी थी। किंतु महर्षि समूह द्वारा भावातीत शिक्षा पद्धति आज के समय में न केवल भारत की वरन् पूरे विश्व की जरूरत है।
राजधानी स्थित महर्षि उत्सव भवन में आयोजित महर्षि जन्म शताब्दी वर्ष पूर्णता समारोह में सरस्वती पूजन और गुरूवंदना के बाद अपने उद्बोधन में महर्षि वैदिक विद्यालय के कुलाधिपति एवं महर्षि विद्यालय समूह के चेयरमेन ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि समग्र शिक्षा की परिकल्पना महर्षि महेश योगी जी ने 40 वर्ष पूर्व ही कर ली थी। इसका उल्लेख महर्षि जी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम में भी किया था। इस कार्यक्रम की विडियो रिकोर्डिंग भी उत्सव भवन में दिखाई गई जिसमें महर्षि के समग्र शिक्षा पर दिये गये अपने विचार को अमेरिका ने बड़े ध्यान पूर्वक सुना और अपनाने का फैसला किया। ब्रह्मचारी गिरीश ने शिक्षा विषयांतर्गत बताया कि महर्षि महेश योगी जी का मानना था कि केवल एक विषय पढ़ लेते हैं तो सारी पीड़ा दूर हो जाती है और वह विषय है ?आत्मा?। अन्तर्रात्मा का अध्ययन कर लेना ही शिक्षा की प्रथम सीढ़ी है। इसी सिद्धांत को लेकर ही महर्षि द्वारा देश के कई राज्यों में विद्यालय, और विश्व विद्यालय की स्थापना की गई। ब्रह्मचारी गिरीश जी ने शिक्षा के साथ- साथ महर्षि जी के भावातीत ध्यान के बारे में उपस्थित जनसमूह को अवगत कराया। साथ ही उन्होंने बाताया कि महर्षि जी के जितने संकल्प बचे हैं उन्हें महर्षि परिवार रात-दिन एक करके पूरा करेगा।
ब्रह्मचारी जी ने बताया कि महर्षि जन्म शताब्दी पूर्णता समारोह में सालभर सौ से ज्यादा कार्यक्रम विभिन्न राज्यों में आयोजित किये गये और एक हजार से ज्यादा भावातीत शिविर लगाए गये जिनमें दो लाख से ज्यादा लोगों ने ध्यान योग अपनाया।
बिलासपुर विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. जी.डी शर्मा का मानना है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भावातीत ध्यान को आवश्यक रुप से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा की उच्च शिक्षा के नियमों ने ऐसा जकड़ रखा है कि कई विषय शामिल न हो पाने के कारण रोष उत्पन्न होता रहता है उन्होंने कहा की नई शिक्षा नीति संभवताः इस वर्ष लागु हो जायेगी जिससे हमें काफी संभावना हैं। उन्होंने  कहा की हम शीघ्र ही अपने विश्व विद्यालय को भावातित ध्यान से जोड़ने जा रहे हैं।
समग्र शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए इंडियन मेडिकल एसोशियेशन के डा. के.के. अग्रवाल ने कहा कि महर्षि महेश योगी ने आज से पचास वर्ष पूर्व कंप्यूटर में संस्कृत भाषा का बेहतर योगदान निरूपित किया था जो आज बाईनरी के रूप में हम सबके सामने है। इस विषय को आगे बढ़ाते मंच पर मंचासीन कुलपति अटल बिहारी बाजपई हिन्दी विश्व विद्यालय के आचार्य रांमचन्द्र भरद्वाज ने कहा की हमारी वर्तमान उच्च शिक्षा पद्धति ने व्यक्ति को स्वकेन्द्रित कर दिया है। यही करण है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था सांचे में ढली हुई है जिसमें ढाल कर बच्चों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता हैै। भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डा. रवीन्द्र कान्हेरे ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी यह है कि उसमें मानवीय मूल्यों का आभाव है वह मूल्यों के प्रति निष्ठावान व्यक्ति तैयार नहीं कर पा रहे हैं। इस अवसर पर महर्षि वेद विज्ञान विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. भुवनेश शर्मा ने कहा की जो ज्ञान हमारे पास है उसे समाज में व्यापक प्रचार प्रसार करने का संकल्प लें ताकि महर्षि महेश योगी के वैश्विक शांति के विचारों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुचाया जा सके अंत में महर्षि विद्या समूह के निदेशक जनसंपर्क एवं संचार व्ही. आर. खरे ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए स्वामी सरस्वती जी से आग्रह किया कि उनका सानिध्य निरंतर महर्षि समूह को मिलता रहे इसकी सम्पूर्ण महर्षि परिवार कामना करता है। कार्यक्रम संचालन श्रीमती प्रमिता परमार ने किया।

-धर्मेंद्र सिंह ठाकुर 
और ख़बरें >

समाचार