महामीडिया न्यूज सर्विस
रेलवे AC-II कोच को बंद करेगा

रेलवे AC-II कोच को बंद करेगा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 6 दिन 55 मिनट पूर्व
21/04/2017
नई दिल्ली [महामीडिया]: रेलवे सभी तरह की ट्रेनों से AC-2 कोच धीरे-धीरे खत्म कर देगा। इनकी जगह AC-3 कोच बढ़ाए जाएंगे। यही नहीं, नॉन-एसी स्लीपर कोच की संख्या घटाकर भी AC-3 कोच बढ़ाए जा सकते हैं। कम रिस्पॉन्स के चलते 143 ट्रेनों में फ्लैक्सी फेयर सिस्टम को भी वापस लिया जा सकता है। इसकी जगह सभी ट्रेनों के बेसिक फेयर में 10 से 15% इजाफा किया जा सकता है। ट्रेनों में AC-III कोच ही बढ़ेंगे...
- न्यूज एजेंसी वार्ता ने रेलवे बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि रेलवे की 13 हजार पैसेंजर ट्रेनों में धीरे-धीरे AC-2 कोच कम होंगे और फिर इन्हें खत्म कर दिया जाएगा। जिन पैसेंजर ट्रेनों में अभी 20 या 22 कोच लगते हैं, उन्हें बढ़ाकर 24 करने का फैसला हुआ है। ऐसी ट्रेनों में जो एक्स्ट्रा कोच बढ़ाए जाएंगे, वो AC-3 के ही रहेंगे।
रेलवे ने क्यों लिया ऐसा फैसला?
- रेलवे के सूत्रों ने एजेंसी को बताया कि AC-3 के कोच से ऑपरेशनल कॉस्ट निकल रही है। जो पैसेंजर ट्रेनें पूरी तरह से AC-3 हैं, उनसे रेलवे को प्रॉफिट भी हो रहा है। रेलवे की अब कोशिश रहेगी कि ट्रेनों में नॉन-एसी स्लीपर कोच भी कम करें और उनकी जगह AC-3 के डिब्बे बढ़ाएं जाएं।
दावा: स्लीपर के 40% यात्री एसी-3 में सफर करना चाहते हैं
- रेलवे का तर्क है कि एसी-2 के लिए उसी समय मांग होती है। जब एसी-3 में जगह नहीं होती।
- स्लीपर में चलने वाले करीब 30-40% यात्री अब एसी-3 का सफर चाहने लगे हैं।
- एसी-2 के मुकाबले एसी-3 में 26 पैसेंजर ज्यादा आएंगे। इससे रेलवे को भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
- इससे स्लीपर के पैसेंजर एसी-3 में आएंगे। जिससे रेलवे की कमाई भी बढ़ेगी।
जल्द ही ट्रेन लेट होने की सूचना SMS पर दी जाएगी
- मंथली सीजनल टिकट का किराया भी बढ़ाया जा सकता है। जल्दी ही टिकट कैंसल करने के नियमों में भी बदलाव किया जाएगा।
- ट्रेन लेट होने पर पैसेंजर्स को इसकी जानकारी एसएमएस पर दी जाएगी।
- चार दर्जन से अधिक ट्रेनों की पहचान कर उन्हें समय से चलाने, उन्हें अप टू टाइम बनाने को लेकर भी कदम उठाए जाएंगे।
- रेलवे आगे चलकर स्लीपर कोच की संख्या भी कम कर सकती है।
फ्लैक्सी फेयर का क्या होगा?
- राजधानी, शताब्दी, दुरंतो ट्रेनों में फ्लैक्सी फेयर सिस्टम का भी रेलवे रिव्यू कर रहा है। इस सिस्टम को बंद करने और इसके बदले में ऑप्शनल सिस्टम लाने पर सोचा जा रहा है। यह भी सोचा जा रहा है कि सभी ट्रेनों के बेसिक फेयर में 10% से 15% का इजाफा किया जाए। मंथली सीजन टिकटों के रेट भी बढ़ाए जाएं।
क्या है फ्लैक्सी फेयर?
- फ्लैक्सी फेयर यानी कम होती सीटों के साथ बढ़ता किराया। पिछले साल सितंबर में रेलवे ने एविएशन सेक्टर की तर्ज पर इसकी शुरुआत की थी। 163 साल में पहली बार ट्रेनों में ऐसा सिस्टम शुरू हुआ था।
- 54 दुरंतो, 42 राजधानी और 46 शताब्दी एक्सप्रेस में यह लागू किया गया था। बीते दिसंबर में जब फुल AC हमसफर ट्रेन की शुरुआत हुई तो उसमें भी फ्लैक्सी फेयर सिस्टम लागू किया गया। इस तरह अभी कुल 143 ट्रेनों में यह सिस्टम है।
- उदाहरण के तौर पर राजधानी एक्सप्रेस की बात करें तो इसमें हर 10% सीटें बुक होने पर बेसिक फेयर 10% बढ़ता है। 40% सीटें बुक होने तक किराया 10%-10% बढ़ता है। 40% सीटों के बाद किराया डेढ़ गुना ही लगता है।
क्यों फ्लॉप हो रहा है ये सिस्टम?फेस्टिव सीजन में प्रमुख ट्रेनों में 6 हजार बर्थ खाली रहीं
- प्रीमियम ट्रेनों का सफर महंगा होने से लोग ऑप्शन के तौर पर बसों या एयर ट्रेवल का ऑप्शन चुन रहे हैं। एग्जाम्पल के लिए चंडीगढ़ से नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में पैसेंजर ऑक्यूपेंसी 30% तक कम हो गई है। लोग बस और एयर ट्रेवल प्रिफर कर रहे हैं।
- शताब्दी एक्सप्रेस में 12 कोच होते हैं। एक कोच में 78 सीटें होती हैं। इस हिसाब से एक शताब्दी में करीब 936 सीटें होती हैं। 90 सीटें बुक होने के बाद ही फ्लैक्सी फेयर शुरू हो जाता है।
- रेलवे के मुताबिक, पिछले साल 9 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच राजधानी, दुरंतो और शताब्दी एक्सप्रेस में 5 हजार 871 बर्थ खाली रही थीं। फ्लैक्सी फेयर सिस्टम को ही इसकी वजह माना गया था।
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