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दूरसंचार एकीकरण में नोकिया-एरिक्सन को दिख रहा बड़ा मौका

दूरसंचार एकीकरण में नोकिया-एरिक्सन को दिख रहा बड़ा मौका

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 556 दिन 1 घंटे पूर्व
15/03/2018
 पुणे (महामीडिया)    दूरसंचार  एकीकरण  वास्तविकता में तब्दील होने और भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में निजी क्षेत्र की महज तीन कंपनियों के रहने से नेटवर्क उपकरण मुहैया कराने वाली कंपनियों मसलन नोकिया व एरिक्सन को बड़ा कारोबारी मौका दिख रहा है। उनका कहना है कि अच्छे ऑपरेटर उनके कारोबार के लिए बेहतर होंगे। इसकी वजह यह है कि डेटा ट्रैफिक में भारी बढ़ोतरी को संभालने के लिए मोबाइल ऑपरेटरों को बुनियादी ढांचे में भारी निवेश करना होगा, जो सालाना 40 फीसदी से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ रही है।भारत में दूरसंचार बाजार में एकीकरण के बारे में पूछे जाने पर नोकिया के भारत प्रमुख ने कहा कुल मिलाकर मेरा मानना है कि नेटवर्क वेंडर के लिहाज से यह अच्छा संकेत है। शायद अल्पावधि में हमारे ऊपर कुछ असर पड़ेगा, लेकिन लंबी अवधि में हमारे पास ज्यादा अच्छे ऑपरेटर होंगे और यह हमारे लिए यह अच्छी बात है।विश्लेषकों ने कहा, यह क्षेत्र तीन अग्रणी कंपनियों के वर्चस्व वाले बाजार की ओर बढ़ रहा है जहां भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया सेल्युलर और रिलायंस जियो होंगे और 95 फीसदी राजस्व पर इनका नियंत्रण होगा। उच्च स्पेक्ट्रम शुल्क और रिलायंस जियो का प्रवेश एकीकरण की प्रमुख वजह है। स्पेक्ट्रम की उच्च कीमत ने छोटी कंपनियों को किनारे कर दिया है और इस तरह से बड़ी कंपनियों के लिए जगह बना दी है जो इसके लिए भुगतान कर सकती हैं। जियो ने भी पुरानी कंपनियों के राजस्व को प्रभावित किया है और छोटी कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ा है। आने वाले समय में हालांकि बाजार में कुछ ही कंपनियों के रहने से प्रतिस्पर्धा का निपटान हो जाएगा और ऑपरेटरों को अपने लाभ में सुधार लाने में मदद मिलेगी। उनके मार्जिन के लिए डेटा अहम होगा। विश्लेषकों का मानना है कि 20-25 फीसदी बाजार हिस्सेदारी पाने के बाद जियो अपने शुल्क को स्थिर कर सकती है।

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