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माता सिद्धिदात्री की कृपा से होती है सिद्धियों का प्राप्ति

माता सिद्धिदात्री की कृपा से होती है सिद्धियों का प्राप्ति

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 515 दिन 14 घंटे पूर्व
25/03/2018
भोपाल (महामीडिया) चैत्र नवरात्रि के अंतर्गत नवम दुर्गा देवी सिद्धिदात्री के पूजन के साथ ही नवरात्रि का पारण और पूर्णाहुति की जाएगी। सिद्धिदात्री केतु ग्रह पर अपना आधिपत्य रखती है। सिद्धिदात्री का स्वरुप उस देह त्याग कर चुकी आत्मा का है जिसने जीवन में सर्व सिद्धि प्राप्त कर स्वयं को परमेश्वर में विलीन कर लिया है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व व वशित्व यह आठों सिद्धियां सिद्धिदात्री से ही उत्तपन हैं। महादेव ने इन्हीं के ही मिलकर सर्व सिद्धियों को प्राप्त कर अर्धनारीश्वर रूप लिया था। शास्त्रनुसार परम सौम्य चतुर्भुजी देवी सिद्धिदात्री अपनी ऊपरी दाईं भुजा में चक्र धारण का संपूर्ण जगत का जीवनचक्र चलाती हैं। नीचे वाली दाईं भुजा में गदा धारण कर दुष्टों का दलन करती हैं। ऊपरी बाईं भुजा में शंख धारण कर संपूर्ण जगत में धर्म स्थापित करती है, नीचे वाली बाईं भुजा में कमल के फूल से ये संपूर्ण जगत का पालन करती हैं। कमल आसन पर विराजमान देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है। नाना प्रकार के स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित देवी रक्त वर्ण के वस्त्र धरण करती हैं। आदिशक्ति परंबा अपने सिद्धिदात्री रूप में सम्पूर्ण जगत को रिद्धि सिद्धि अप्रदान करती हैं।
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