महामीडिया न्यूज सर्विस
अरविंद पानगड़िया ने की बैंकों के निजीकरण की वकालत

अरविंद पानगड़िया ने की बैंकों के निजीकरण की वकालत

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 545 दिन 2 घंटे पूर्व
26/03/2018
मुंबई (महामीडिया)नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पानगड़िया ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंकको इस दायरे से बाहर रखने पर जोर दिया है।वर्तमान में कोलंबिया विश्वविद्यालय  में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक पानगड़िया ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों में घोटाले और बढ़ते फंसे कर्ज  की अधिकता उनके निजीकरण के बहुत से कारणों में सिर्फ एक, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि जो भी राजनीतिक दल वर्ष 2019 में सरकार बनाने के बारे में वाकई गंभीर हैं, उन्हें सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण का मुद्दा अपने चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल करना चाहिए। पानगड़िया ने हाल ही में हुए बैंकिंग फ्रॉड, जिसमें करीब 13000 करोड़ रुपये का पंजाब नेशनल बैंक फ्रॉड शामिल है, के संदर्भ में ये जवाब दिया है।इंफोसिस के चेयरमैन और आधार कार्ड के प्रमुख रह चुके नंदन नीलेकणि ने कहा कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मूल तर्क का अस्तित्व अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने करदाताओं का हवाला देते हुए कहा कि निजीकरण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आगे बढ़ाने का तरीका है।नंदन नीलेकणि ने बताया कि पांच दशक पहले बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ क्योंकि वे बड़े उद्योगों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे थे और छोटे उद्योगों को नजरअंदाज कर रहे थे। एक तकनीकी विशेषज्ञ ने बताया कि बड़ी कंपनियों को उधार देने के कारण 21 सरकारी बैंकों को नुकसान हुआ था। प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों का परिचय भी छोटे उधारकर्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करना संभव बनाता है, जिनकी राष्ट्रीयकरण के दौर में उपेक्षा की जा रही थी।


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