महामीडिया न्यूज सर्विस
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समाचार

  • श्रीयंत्र का निर्माण देवगुरु बृहस्पति ने करवाया था

    भोपाल  [ महामीडिया ]  मानव जीवन में सुख-दुख, सफलता-असफलता और अमीरी-गरीबी का चक्र हमेशा चलता रहता है। हर इंसान की कामना होती होती है कि उसको इस जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति हो और अंत में मोक्ष प्राप्त हो। इसलिए वह देवी-देवता की आराधना करता है। दिपावली को सनातन संस्कृति का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। दिपावली के पांच दिनों में धन के साथ सì >>और पढ़ें

  • करवा चौथ पर गजकेसरी योग का संयोग

    भोपाल   [ महामीडिया ]हिंदू संवत्सर के अनुसार जिस दिन सूर्योदय से लेकर अगले तीन घंटे तक जो तिथि होती है, उसे ही उस दिन की तिथि माना जाता है, भले ही इसके बाद दूसरी तिथि शुरू हो जाए। चूंकि इस बार 17 अक्टूबर को सूर्योदय पर तृतीया तिथि है, जो सुबह 6.48 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। सूर्योदय पर तृतीया तिथि होने के बावजूद इस दिन करव >>और पढ़ें

  • छत्तीसगढ़ के कामधेनु विवि में तैयार होंगे नवग्रह पौधे

    रायपुर [ महामीडिया ]पशुओं पर रिसर्च व पढ़ाई के साथ छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा, दुर्ग अब ज्योतिश-शास्त्रों में उपयोग होने वाली लकड़ियों पर भी रिसर्च करने जा रहा है। इसके लिए विवि के कैंपस में तैयार लगभग एक एकड़ जमीन को तीन भागों में बांटकर नवग्रह, नक्षत्र और मानव वन वाटिका के सौ पौधे लगाए गए हैं। पहली बार शुरू हो रहे इस वाटिका का उê >>और पढ़ें

  • युद्ध हिंसा एवं आतंकवाद की समाप्ति के लिए अजेय वैदिक सुरक्षा तकनीक

    भोपाल (महामीडिया) युद्धों का इतिहास साक्षी है कि संधियां, समझौते एवं कूटनीतिक प्रयास युद्धों को समाप्त करने में सफल नहीं हुए हैं। शक्तिशाली निकायों जैसे-संयुक्त राष्ट्र संघ में कुछ स्थायी सदस्य भी सम्मिलित हुए। आतंकवाद ने हिंसा के संप्रदाय को भयावह आयाम तक पहुंचाया हैं। मुठ्ठी भर आतंकवादी शक्तिशाली राष्ट्र को बंधक बना सकते हैं। स >>और पढ़ें

  • श्री गुरुदेव की कृपा का फल

    भोपाल (महामीडिया) केवल गुरुकृपा से ये जो विश्व में सब प्रचार हुआ, ये जो विश्वचेतना में अत्यन्त पवित्रता का अनुभव प्रारम्भ हुआ, ये तो बाहर हुआ। भीतर क्या हुआ, वेद तत्व जागृत हुआ, संहिता तत्व जागृत हुआ, योग तत्व जागृत हुआ, कर्म तत्व जागृत हुआ, षट्दर्शन जागृत हुये, षडंग जागृत हुये, इतिहास की वास्तविकता, पुराण का परम गूढ़ रहस्य, स्मृति की उपादेयता & >>और पढ़ें

  • महर्षि विद्यापीठ भोपाल में अयुतचण्डी महायज्ञ सम्पन्न

    भोपाल [ महामीडिया ] गुरुदेव ब्रह्मानंद स्वरस्वती आश्रम, भोजपुर मंदिर मार्ग में महर्षि वेद विज्ञान विश्व विद्यापीठ द्वारा आयोजित अयुतचण्डी-श्रीयुतचण्डी की पूर्णता आज शारदीय नवरात्रि की दुर्गानवमी -७ अक्टूबर के पावन दिवस पर की गई।  ४००  महर्षि वैदिक पंडितों ने इस महायज्ञ को पूर्ण किया।  इस महायज्ञ में दुर्गासप्तशती के १०००० पाठ एव& >>और पढ़ें

  • ब्रह्मचारी गिरीश जी की अंतिम आहुति के साथ श्रीयुत्चण्डी महायज्ञ संपन्न

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि महेश योगी संस्थान में चल रहे श्रीयुत्चण्डी महायज्ञ आज ब्रह्मचारी गिरीश जी के कर कमलों द्वारा अंतिम आहुति के साथ संपन्न हुआ। भोपाल के ब्रह्मानंद सरस्वती आश्रम में विगत 29 सितंबर से 7 अक्टूबर तक धार्मिक उल्लास भरे वातावरण में लगभग साढ़े 300 से अधिक वैदिक पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह महायज्ञ वैदिक विधि विध&# >>और पढ़ें

  • श्रीयुत्चण्डी महायज्ञ का महर्षि संस्थान छान में भंव्य शुभारंभ

    भोपाल (महामीडिया) परंम पूज्य महर्षि महेश योगी जी की दैवीय प्रेरणा एवं उनके तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी के सानिध्य में श्री युत्चण्डी महायज्ञ का आगाज आज स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती आश्रम छान, भोपाल में हुआ।
    सर्वप्रथम सुबह 8.00 बजे कलश यात्रा प्रारंभ हुई। तीन सौ वैदिक पंडितों के मंत्रोच्चार के साथ यज्ञस्थल से स्वामी ब्रह्म >>और पढ़ें

  • नवरात्रि में इस विधि से हवन करें

    भोपाल [महामीडिया]  नवरात्रि के अवसर पर देवी आराधना के साथ हवन का विशेष महत्व है। धर्मशास्त्रों के अनुसार हवन करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मकता समाप्त होती है। हवन में प्राकृतिक पदार्थों, विशेषकर जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है, जिससे घर और उसके आसपास की आबोहवा शुद्ध होती है। हवन या यज्ञ सनातन संस्कृति का एक महत्वपí >>और पढ़ें

  • शारदीय नवरात्रि 29 सितम्बर से

     भोपाल [ महामीडिया ]मां दुर्गा की आराधना का पर्व है नवरात्रि।नवरात्रि   में भक्त पूजा, जप, तप और उपवास करते हैं और मां को प्रसन्न करने के लिए, अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि नौ शक्तियों के मिलन को नवरात्रि कहते हैं। देवी पुराण के अनुसार एक साल में चार नवरात्र होते हैं।साल के पहले म >>और पढ़ें

  • श्री गुरुदेव की कृपा का फल

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि जी ने स्थापत्यवेद-वास्तु विद्या के अनेक पाठ्यक्रम बनवाये और अपने सभी केंन्द्रों और शैक्षणिक संस्थानों में इसे उपलब्ध करवाया। साथ ही सारे विश्व में वास्तु परामर्श देने की व्यवस्था भी की। महर्षि जी ने ज्योतिष विद्या की खोती हुई प्रतिष्ठा पुन: प्रतिस्थापित की। सैकड़ों ज्योतिषी विभिन्न देशों में भ्रमण कर पराë >>और पढ़ें

  • पितृपक्ष में इन परिजनों को है पितृों के श्राद्ध का अधिकार

    भोपाल [ महामीडिया ]   श्राद्धकर्म के संबंध में शास्त्रों में कई सारी बाते कही गई है। इसमें विधि-विधान से लेकर उसके महिमामंडन तक का वर्णन किया गया है। पितृकर्म कैसे किए जाते है, कौन कर सकता है इसकी विधि क्या है, कौन-कौन सी जगहों पर श्राद्ध किया जा सकता है इन सभी बातों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। पितृों का पितृपक्ष के मौके पर धरती पर आè >>और पढ़ें

  • 141 दिन बाद कल मार्गी होंगे शनि

    भोपाल  [ महामीडिया ]  141 दिन बाद वक्री शनिदेव 18 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर मार्गी होकर सीधी चाल चलेंगे। ज्योतिर्विदों के अनुसार उनके मार्गी होने पर शनि की साढ़े साती, ढैया के साथ शनि से पीड़ित लोगों को कष्टों से राहत मिलेगी। शनिदेव 24 जनवरी 2020 तक मार्गी रहेंगे। शनिदेव इससे पहले 30 अप्रैल 2018 को वक्री हुए थे। शनि के मार्गी होने का अलग-अलग असर 12 राशियों & >>और पढ़ें

  • पितृपक्ष के नियम और सावधानियां

    भोपाल [ महामीडिया ]  आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक के सोलह दिन पितृों को समर्पित हैं और इस समय पितृों को तृप्त कर उनसे आशिर्वाद लिए जाते हैं। इन सोलह दिनों में उनकी मृत्यु तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है और उनकी आत्मा की शांति के साथ उनको तृप्त करने के लिए कर्मकांड किया जाता है।
    ।। श्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ ।।
  • विधि पूर्वक पितरों का श्राद्ध करने से दूर होते हैं ये दोष

    भोपाल [महामीडिया ]  धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध पक्ष के 16 दिन पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का समय है। श्राद्ध पक्ष 2019, 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। इससे एक दिन पहले 13 सितंबर यानि शुक्रवार को पूर्णिमा का श्राद्ध हुआ। मान्यता है कि श्राद्ध पितरों के प्रति मन में सम्मान और श्रद्धा का भाव लेकर करने चाहिए। 16 दिन तक चलने वाले श्राद्ध पक्&# >>और पढ़ें


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