महामीडिया न्यूज सर्विस
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समाचार

  • संपूर्ण जीवन के प्रतीक हैं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण

    भोपाल [ महामीडिया ] जन्माष्टमी भारतीय मानस में रचे-बसे योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। कृष्ण हमारी परंपरा के ऐसे प्रतीक हैं, जो संपूर्ण जीवन का चित्र प्रस्तुत करते हैं। वे पाप-पुण्य, नैतिक-अनैतिक से परे पूर्ण पुरुष की अवधारणा को साकार करते हैं। कृष्ण भारतीय मानस के नायक हैं। कृष्ण का चरित्र रससिक्त है, दार&# >>और पढ़ें

  • मस्तक के बीच में होती है छठी इंद्री, इसलिए यहां लगाया जाता है तिलक

    भोपाल [महामीडिया]   राखी बांधने का शुभ मुहूर्त इस बार 15 अगस्त को सुबह 5: 49 मिनट से शुरू होगा। इस शुभ मुहूर्त से लेकर बहनें अपने भाई शाम 6.01 बजे तक राखी बांध सकती हैं। वैसे, सुबह 6 से 7.30 बजे, और सुबह 10.30 बजे से दोपहर 3 बजे तक राखी बांधने का सबसे अच्छा मुहूर्त है। सावन के पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 15:45 (14 अगस्त ) से ही हो जाएगी। इसका समापन 17:58 (15 अगस्त) को हो जाएगा। खास बात ये &# >>और पढ़ें

  • युद्ध हिंसा एवं आतंकवाद की समाप्ति के लिए अजेय वैदिक सुरक्षा तकनीक

    भोपाल (महामीडिया) युद्धों का इतिहास साक्षी है कि संधियां, समझौते एवं कूटनीतिक प्रयास युद्धों को समाप्त करने में सफल नहीं हुए हैं। शक्तिशाली निकायों जैसे-संयुक्त राष्ट्र संघ में कुछ स्थायी सदस्य भी सम्मिलित हुए। आतंकवाद ने हिंसा के संप्रदाय को भयावह आयाम तक पहुंचाया हैं। मुठ्ठी भर आतंकवादी शक्तिशाली राष्ट्र को बंधक बना सकते हैं। स >>और पढ़ें

  • यज्ञ की प्रक्रिया अत्यन्त शुद्ध और विधान निश्चित हैं- ब्रह्मचारी गिरीश

    भोपाल (महामीडिया) गुरूदेव ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम, भोपाल में वैदिक यज्ञाचार्यों से चर्चा के दौरान परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी के प्रिय तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी ने यज्ञों में शुद्धता पर बहुत जोर डाला। उन्होंने बताया कि "वैदिक ग्रन्थों में वर्णित वैदिक विधानों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही यज्ञों का संपादन किया जाना चाì >>और पढ़ें

  • संतों और श्रेष्ठजनों के विचारों और सुझावों के क्रियान्वयन की महती आवश्यकता

    भोपाल (महामीडिया) ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा है कि "भारतभर में शिक्षा, ज्ञान, वेद सम्बन्धित अनेकों विचार संगोष्ठियों, सभाओं आदि का आयोजन होता है। सभी आयोजक बधाई और धन्यवाद के पात्र हैं। देश विदेश से पधारे अनेक विद्वान, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, समाजसेवी, साधु-संत, राजनेताओं की उपस्थिति और उनके द्वारा व्यक्त विचारों में कुछ अत्यन्त प्रायो >>और पढ़ें

  • एक व्रत और एक साधना है ब्रह्मचर्य

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि दधिचि का अस्थि-दान और महाराज भगीरथ की घोर तपस्या के फलस्वरूप गंगावतरण हमें स्वयं के प्रति कठोर और लोक के प्रति उद्धार होने का संदेश देते हैं। भावातीत ध्यान शैली इन्द्रियानुशासन द्वारा हमें लोकमंगल हेतु समर्थ होने का पथ प्रशस्त करती है। "ब्रह्माणि चरतीति ब्रह्मचारी।" ब्रह्म का पठन, पाठन, चिन्तन तथा रक्षण करने >>और पढ़ें

  • केदारनाथ धाम में अब तक 8 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए

    रुद्रप्रयाग[ महामीडिया ]   इस साल अभी  तककेदारनाथ पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या आठ लाख का आंकड़ा पार गई। यह केदारनाथ यात्रा के इतिहास में तीर्थयात्रियों की सर्वाधिक संख्या है। जबकि, यात्रा में अभी तीन माह का समय शेष है। इस बार केदारनाथ धाम के कपाट नौ मई को खोले गए थे और पहले हफ्ते से ही धाम में तीर्थयात्रियों का सैलाब उमड़ने लगा था। मई  >>और पढ़ें

  • भारत में जल संचय की परम्परायें और वैदिक साहित्य में जल

    भोपाल (महामीडिया) हजारों साल पहले, भारतीय मनीषियों ने वैदिक साहित्य में जल की महिमा का वर्णन किया है। इससे सम्बन्धित पूरा विवरण, वैसे तो बहुत बड़ी पुस्तक का विषय है पर पाठकों की जिज्ञासा को शान्त करने के उद्देश्य और वैदिक साहित्य में उल्लेखित पानी की महिमा से परिचित कराने के लिये कुछ उदाहरण आगे दिये जा रहे हैं।
    वेद, पुराण, उपनिषद् औ >>और पढ़ें

  • बाबा महाकाल भक्तों को ऐसे देंगे दर्शन

    उज्जैन [ महामीडिया ]  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास को लेकर दर्शन व्यवस्था की योजना तैयार की जा रही है। श्रावण मास में देशभर से श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन करने आएंगे। मंदिर में प्रतिदिन करीब 20 से 25 हजार भक्तों का जमावड़ा रहेगा। ऐसे में अधिकांश समय गर्भगृह में आम दर्शनार्थियों का प्रवेश बंद रहेगा। भक्तों को गणेश मंडपम् स >>और पढ़ें

  • आज है देवशयनी एकादशी

    भोपाल [ महामीडिया ] आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसी दिन से श्रीहरि का शयन-काल प्रारंभ होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वर्ष के 12 मास में 4-4 मास तीनों देवता का शयन-काल होता है। आज यह देवशयनी या आषाढ़ी एकादशी है।देवशयनी एकादशी से देव प्रबोधिनी या देवउठनी एकादशी तक श्रीहरि, देव प्रबोधिन& >>और पढ़ें

  • गुरु पूर्णिमा: 'गुरु' की महिमा अपरंपार

    भोपाल (महामीडिया) भारतीय परंपरा में 'गुरु' की महिमा अपरंपार बताई गयी है। गुरु बिन, ज्ञान नहीं प्राप्त हो सकता है, गुरु बिन आत्मा भी मुक्ति नहीं पा सकती है। हमारे पौराणिक ग्रंथों ने गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया है। मान्यता है कि ईश्वर से श्रापित है यदि कोई तो उसे गुरु बचा सकता है, लेकिन यदि किसी को गुरु ने ही श्राप दे दिया हो उसे फिर ईश्वर >>और पढ़ें

  • देवशयनी एकादशी का महत्व

    भोपाल  [ महामीडिया ]   आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसी दिन से श्रीहरि का शयन-काल प्रारंभ होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वर्ष के 12 मास में 4-4 मास तीनों देवता का शयन-काल होता है।देवशयनी एकादशी से देव प्रबोधिनी या देवउठनी एकादशी तक श्रीहरि, देव प्रबोधिनी एकादशी से महाशिवरात्रि तक शिव >>और पढ़ें

  • मां दुर्गा के महत्व की तुलना राम नवमी से नहीं की जा सकती

    कोलकाता  [महामीडिया ] नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि ?मां दुर्गा? के जयकारे की तरह ?जय श्री राम? का नारा बंगाली संस्कृति से नहीं जुड़ा है ।बीते शुक्रवार को कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान अमर्त्य सेन ने कहा, ?इन दिनों देश में जय श्री राम का नारा लोगों को पीटने के लिए इस्तेमाल किय >>और पढ़ें

  • चार लाख वर्ग फुट में फैला है जगन्नाथ मंदिर, शिल्पकला का है नायाब नमूना

    मुंबई [महामीडिया ]जगन्नाथ मंदिर सनातन संस्कृति के प्रमुख देव जगन्नाथ को समर्पित है। इसको हिन्दुओं के चार धामों में से एक माना जाता है । यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ होता है जगत के स्वामी । इस कारण इस नगर को जगन्नाथपुरी या पुरी कहा जाता है। जगन्नाथपुरी हिन्दुओं के चार & >>और पढ़ें

  • 12 जुलाई को शयन करेंगे देव

    उज्जेन [महामीडिया ]आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव शयन होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार देव शयन के बाद विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। चातुर्मास के चार माह धर्म पारायण, तीर्थाटन, भागवत श्रवण, जप-तप तथा व्रत का नियमन होगा। साथ ही विष्णु तथा शिव से संबंधित विशेष पर्व तथा त्योहार मनाए जाएंगे।आषाढ़ मास की देव शयनी एकादशी >>और पढ़ें


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