महामीडिया न्यूज सर्विस
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समाचार

  • एक व्रत और एक साधना है ब्रह्मचर्य

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि दधिचि का अस्थि-दान और महाराज भगीरथ की घोर तपस्या के फलस्वरूप गंगावतरण हमें स्वयं के प्रति कठोर और लोक के प्रति उद्धार होने का संदेश देते हैं। भावातीत ध्यान शैली इन्द्रियानुशासन द्वारा हमें लोकमंगल हेतु समर्थ होने का पथ प्रशस्त करती है। "ब्रह्माणि चरतीति ब्रह्मचारी।" ब्रह्म का पठन, पाठन, चिन्तन तथा रक्षण करने >>और पढ़ें

  • संतों और श्रेष्ठजनों के विचारों और सुझावों के क्रियान्वयन की महती आवश्यकता

    भोपाल (महामीडिया) ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा है कि "भारतभर में शिक्षा, ज्ञान, वेद सम्बन्धित अनेकों विचार संगोष्ठियों, सभाओं आदि का आयोजन होता है। सभी आयोजक बधाई और धन्यवाद के पात्र हैं। देश विदेश से पधारे अनेक विद्वान, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, समाजसेवी, साधु-संत, राजनेताओं की उपस्थिति और उनके द्वारा व्यक्त विचारों में कुछ अत्यन्त प्रायो >>और पढ़ें

  • यज्ञ की प्रक्रिया अत्यन्त शुद्ध और विधान निश्चित हैं- ब्रह्मचारी गिरीश

    भोपाल (महामीडिया) गुरूदेव ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम, भोपाल में वैदिक यज्ञाचार्यों से चर्चा के दौरान परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी के प्रिय तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी ने यज्ञों में शुद्धता पर बहुत जोर डाला। उन्होंने बताया कि "वैदिक ग्रन्थों में वर्णित वैदिक विधानों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही यज्ञों का संपादन किया जाना चाì >>और पढ़ें

  • भारत देश से ही विश्व शान्ति सम्भव

    भोपाल (महामीडिया) "विश्व शान्ति का स्वप्न और संकल्प न जाने कितने शाँति प्रियजनों ने देखा और लिया किन्तु यह केवल एक दिवास्वप्न ही रह गया। स्वप्न और संकल्प वास्तविक रूप से फलीभूत क्यों नहीं हुआ, इसका विश्लेषण किसी ने नहीं किया। शायद हर एक ने केवल बौद्धिक स्तर पर विचार और प्रचार करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। आज भी यही हो रहा है। विश्व श >>और पढ़ें

  • सत्यमेवजयते बहुत महत्वपूर्ण सिद्धाँत

    भोपाल (महामीडिया) परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी के प्रिय तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी ने आज कहा कि "सत्यमेवजयते" एक बहुत बड़ा, महत्वपूर्ण और मूल्यवान सिद्धाँत है। जो मनुष्य अपनी दिनचर्या, जीवनचर्या सत्य पर आधारित रखेंगे उन्हें सदा विजय की प्राप्ति होगी, पराजय कभी नहीं देखनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वैदिक वांगमय सत्य सम्बन्धी गाथा >>और पढ़ें

  • भारत देश से ही विश्व शान्ति सम्भव

    भोपाल (महामीडिया) "विश्व शान्ति का स्वप्न और संकल्प न जाने कितने शाँति प्रियजनों ने देखा और लिया किन्तु यह केवल एक दिवास्वप्न ही रह गया। स्वप्न और संकल्प वास्तविक रूप से फलीभूत क्यों नहीं हुआ, इसका विश्लेषण किसी ने नहीं किया। शायद हर एक ने केवल बौद्धिक स्तर पर विचार और प्रचार करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। आज भी यही हो रहा है। विश्व श >>और पढ़ें

  • भारतीय दर्शन की मूल भावना है 'अहिंसा'

    भोपाल (महामीडिया) परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी कहा करते थे कि जो व्यक्ति अपनी अंतरनिहित चेतना को जागृत और उदात्त करने हेतु नित्य प्रति सहजगम्य भावातीत ध्यान करता है वह गीता में योगिराज श्रीकृष्ण प्रणीत वैश्विक आनंद का अंग बन जाता है। अहिंसा का शाब्दिक अर्थ है कि किसी भी प्राणी को मन, वचन व कर्म से कष्ट नहीं पहुंचाना। महात्मा गांधी ने इ&# >>और पढ़ें

  • मानवता चेतना को जागृत करने का योग

    भोपाल (महामीडिया) 'भावातीत ध्यान' का अनुभव जो भी करना चाहता है उन सभी के लिये 'भावातीत ध्यान' उपलब्ध है। परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी प्रदत्त यह ध्यान प्रक्रिया वैदिक योग विज्ञान पर आधारित है। यह मानव की चेतना को जागृत करने का योग है। प्रकृति भी चेतना द्वारा ही चलायमान है। यह चराचर विश्व अपनी गति से चल रहा है किंतु मानव भौतिकवादिता के मोह ë >>और पढ़ें

  • मन चंगा तो कठोती में गंगा

    भोपाल (महामीडिया) श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के जो 30 लक्षण बताए गये हैं। अब हमारा विषय है- 'शौच' जो कि पवित्रता का एक पर्यायवाची है और ईश्वर उपासना का मुख्य तत्व है। जिस प्रकार एक स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ आत्मा का वास होता है, ठीक उसी प्रकार एक स्वच्छ तन-मन, एक स्वच्छ विचार को जन्म देता है। महर्षि ने सदैव "मनसावाचाकर्मणा" अर्थात् त >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः धर्ममय जीवन ही तप है

    भोपाल (महामीडिया) अच्छा जीवन वह होता है जिसमें दुःख और सुख में संतुलन प्राप्त हो जाए। ऐसे जीवन के लिए ऐसे लक्ष्यों की आवश्यकता होती है जिनके माध्यम से इस संतुलन को बनाने के लिए आवश्यक तत्व मिलते रहें। महर्षि कहा करते थे- "प्रत्येक व्यक्ति के भीतर रचनात्मकता की अनन्त क्षमता होती है परंतु उस विशाल भंडार को आधुनिक शिक्षा प्रणालियां सक्रि >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः धर्ममय जीवन ही तप है

    भोपाल (महामीडिया) अच्छा जीवन वह होता है जिसमें दुःख और सुख में संतुलन प्राप्त हो जाए। ऐसे जीवन के लिए ऐसे लक्ष्यों की आवश्यकता होती है जिनके माध्यम से इस संतुलन को बनाने के लिए आवश्यक तत्व मिलते रहें। महर्षि कहा करते थे- "प्रत्येक व्यक्ति के भीतर रचनात्मकता की अनन्त क्षमता होती है परंतु उस विशाल भंडार को आधुनिक शिक्षा प्रणालियां सक्रि >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञान: प्रार्थना में 'दया' का महत्व

    भोपाल (महामीडिया) आधुनिक वैश्विक समाज में चहुं और ईर्ष्या, वैर-विरोध और हिंसा व्याप्त है। सब मानवता को भूलते जा रहे है या ऐेसा प्रतीत होता है कि समाज के लोगों ने मानवता को जाना ही नहीं है। भारतीय वैदिक परंपरा में दया का महत्वपूर्ण स्थान है। दया ही मानव को मानवता की ओर ले जाती है अर्थात् सामुहिकता की ओर ले जाती है। मुझे ज्ञात है महर्षि कहा क >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः प्रशंसा और निंदा

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि कहते थे कि जब तक मानव के हृदय में अनुचित तृष्णा ने अपना स्थान बना रखा है तब तक उसे ज्ञान-विज्ञान के प्रकाश का मूल्य नहीं होगा और वह अन्धकारमय जीवन ही जीता रहेगा। सभी लोग आँखों पर अवचेतन की पट्टी बांधे शांति चाहते हैं। यह तृष्णा ठीक वैसी ही है जैसी एक कस्तुरी मृग भी अपनी नाभि से आ रही सुगंध को वन में खोजना चाहता है। वह & >>और पढ़ें

  • जीवन-मुक्ति

    भोपाल (महामीडिया) गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन-मुक्ति के लिये चार मार्गों के विषय में कहा है, ये मार्ग हैं कर्मयोग, सांख्ययोग, ज्ञानयोग और भक्ति (ध्यान) योग। साथ ही मनुष्य अपने जीवन में इन चार पुरुषार्थों के लिये लक्ष्य का निर्धारण करता है, ये हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। मोक्ष का तात्पर्य सभी पुरुषार्थों को वर्तते हुए जीवन के सभी बन्ध >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः धर्ममय जीवन ही तप है

    भोपाल (महामीडिया) अच्छा जीवन वह होता है जिसमें दुःख और सुख में संतुलन प्राप्त हो जाए। ऐसे जीवन के लिए ऐसे लक्ष्यों की आवश्यकता होती है जिनके माध्यम से इस संतुलन को बनाने के लिए आवश्यक तत्व मिलते रहें। महर्षि कहा करते थे- "प्रत्येक व्यक्ति के भीतर रचनात्मकता की अनन्त क्षमता होती है परंतु उस विशाल भंडार को आधुनिक शिक्षा प्रणालियां सक्रि >>और पढ़ें


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