महामीडिया न्यूज सर्विस
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समाचार

  • प्राकृतिक आपदाओं का कारण-प्रकृति के नियमों का उल्लंघन

    भोपाल (महामीडिया) "प्रकृति के नियमों का पालन न होकर उनका सामूहकि उल्लंघन ही प्राकृतिक असंतुलन और आपदाओं का कारण है। विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय वर्तमान की शिक्षा में प्रकृति के नियमों का कोई पाठ और प्रयोग नहीं है। व्यक्ति अज्ञान और अनेकानेक कामनाओं की पूर्ति न होने के कारण तनाव और चिंताग्रस्त होता है। व्यक्तिगत तनाव सामाजिक स्त&# >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः प्रशंसा और निंदा

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि कहते थे कि जब तक मानव के हृदय में अनुचित तृष्णा ने अपना स्थान बना रखा है तब तक उसे ज्ञान-विज्ञान के प्रकाश का मूल्य नहीं होगा और वह अन्धकारमय जीवन ही जीता रहेगा। सभी लोग आँखों पर अवचेतन की पट्टी बांधे शांति चाहते हैं। यह तृष्णा ठीक वैसी ही है जैसी एक कस्तुरी मृग भी अपनी नाभि से आ रही सुगंध को वन में खोजना चाहता है। वह & >>और पढ़ें

  • मन चंगा तो कठोती में गंगा

    भोपाल (महामीडिया) श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के जो 30 लक्षण बताए गये हैं। अब हमारा विषय है- 'शौच' जो कि पवित्रता का एक पर्यायवाची है और ईश्वर उपासना का मुख्य तत्व है। जिस प्रकार एक स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ आत्मा का वास होता है, ठीक उसी प्रकार एक स्वच्छ तन-मन, एक स्वच्छ विचार को जन्म देता है। महर्षि ने सदैव "मनसावाचाकर्मणा" अर्थात् त >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः धर्ममय जीवन ही तप है

    भोपाल (महामीडिया) अच्छा जीवन वह होता है जिसमें दुःख और सुख में संतुलन प्राप्त हो जाए। ऐसे जीवन के लिए ऐसे लक्ष्यों की आवश्यकता होती है जिनके माध्यम से इस संतुलन को बनाने के लिए आवश्यक तत्व मिलते रहें। महर्षि कहा करते थे- "प्रत्येक व्यक्ति के भीतर रचनात्मकता की अनन्त क्षमता होती है परंतु उस विशाल भंडार को आधुनिक शिक्षा प्रणालियां सक्रि >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञान: प्रार्थना में 'दया' का महत्व

    भुवनेश्वर (महामीडिया) आधुनिक वैश्विक समाज में चहुं और ईर्ष्या, वैर-विरोध और हिंसा व्याप्त है। सब मानवता को भूलते जा रहे है या ऐेसा प्रतीत होता है कि समाज के लोगों ने मानवता को जाना ही नहीं है। भारतीय वैदिक परंपरा में दया का महत्वपूर्ण स्थान है। दया ही मानव को मानवता की ओर ले जाती है अर्थात् सामुहिकता की ओर ले जाती है। मुझे ज्ञात है महर्षि è >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः प्रशंसा और निंदा

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि कहते थे कि जब तक मानव के हृदय में अनुचित तृष्णा ने अपना स्थान बना रखा है तब तक उसे ज्ञान-विज्ञान के प्रकाश का मूल्य नहीं होगा और वह अन्धकारमय जीवन ही जीता रहेगा। सभी लोग आँखों पर अवचेतन की पट्टी बांधे शांति चाहते हैं। यह तृष्णा ठीक वैसी ही है जैसी एक कस्तुरी मृग भी अपनी नाभि से आ रही सुगंध को वन में खोजना चाहता है। वह & >>और पढ़ें

  • श्री गुरुदेव की कृपा का फल

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि जी ने वेद को विश्व ब्रह्मण्ड के संचालन का संविधान बतलाया। उन्होंने बताया कि वेद ही वे प्रकृति के नियम-सृष्टि के संविधान हैं जिनसे समूचे विश्व ब्रह्मण्ड का निर्विघ्न, निरन्तर प्रशासन, अनादि काल से होता आ रहा है और अनन्त काल तक होता जायेगा। इसी सृष्टि के संविधान को आधार बनाकर उन्होंने "प्रशासन के पूर्ण सिद्धांतí >>और पढ़ें

  • सत्यमेवजयते बहुत महत्वपूर्ण सिद्धाँत

    भोपाल (महामीडिया) परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी के प्रिय तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी ने आज कहा कि "सत्यमेवजयते" एक बहुत बड़ा, महत्वपूर्ण और मूल्यवान सिद्धाँत है। जो मनुष्य अपनी दिनचर्या, जीवनचर्या सत्य पर आधारित रखेंगे उन्हें सदा विजय की प्राप्ति होगी, पराजय कभी नहीं देखनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वैदिक वांगमय सत्य सम्बन्धी गाथा >>और पढ़ें

  • भारतीय दर्शन की मूल भावना है 'अहिंसा'

    भोपाल (महामीडिया) परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी कहा करते थे कि जो व्यक्ति अपनी अंतरनिहित चेतना को जागृत और उदात्त करने हेतु नित्य प्रति सहजगम्य भावातीत ध्यान करता है वह गीता में योगिराज श्रीकृष्ण प्रणीत वैश्विक आनंद का अंग बन जाता है। अहिंसा का शाब्दिक अर्थ है कि किसी भी प्राणी को मन, वचन व कर्म से कष्ट नहीं पहुंचाना। महात्मा गांधी ने इ&# >>और पढ़ें

  • मन चंगा तो कठोती में गंगा

    भोपाल (महामीडिया) श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के जो 30 लक्षण बताए गये हैं। अब हमारा विषय है- 'शौच' जो कि पवित्रता का एक पर्यायवाची है और ईश्वर उपासना का मुख्य तत्व है। जिस प्रकार एक स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ आत्मा का वास होता है, ठीक उसी प्रकार एक स्वच्छ तन-मन, एक स्वच्छ विचार को जन्म देता है। महर्षि ने सदैव "मनसावाचाकर्मणा" अर्थात् त >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञानः धर्ममय जीवन ही तप है

    भोपाल (महामीडिया) अच्छा जीवन वह होता है जिसमें दुःख और सुख में संतुलन प्राप्त हो जाए। ऐसे जीवन के लिए ऐसे लक्ष्यों की आवश्यकता होती है जिनके माध्यम से इस संतुलन को बनाने के लिए आवश्यक तत्व मिलते रहें। महर्षि कहा करते थे- "प्रत्येक व्यक्ति के भीतर रचनात्मकता की अनन्त क्षमता होती है परंतु उस विशाल भंडार को आधुनिक शिक्षा प्रणालियां सक्रि >>और पढ़ें

  • महर्षि ज्ञान: प्रार्थना में 'दया' का महत्व

    भुवनेश्वर (महामीडिया) आधुनिक वैश्विक समाज में चहुं और ईर्ष्या, वैर-विरोध और हिंसा व्याप्त है। सब मानवता को भूलते जा रहे है या ऐेसा प्रतीत होता है कि समाज के लोगों ने मानवता को जाना ही नहीं है। भारतीय वैदिक परंपरा में दया का महत्वपूर्ण स्थान है। दया ही मानव को मानवता की ओर ले जाती है अर्थात् सामुहिकता की ओर ले जाती है। मुझे ज्ञात है महर्षि è >>और पढ़ें

  • युद्ध हिंसा एवं आतंकवाद की समाप्ति के लिए अजेय वैदिक सुरक्षा तकनीक

    भोपाल (महामीडिया) युद्धों का इतिहास साक्षी है कि संधियां, समझौते एवं कूटनीतिक प्रयास युद्धों को समाप्त करने में सफल नहीं हुए हैं। शक्तिशाली निकायों जैसे-संयुक्त राष्ट्र संघ में कुछ स्थायी सदस्य भी सम्मिलित हुए। आतंकवाद ने हिंसा के संप्रदाय को भयावह आयाम तक पहुंचाया हैं। मुठ्ठी भर आतंकवादी शक्तिशाली राष्ट्र को बंधक बना सकते हैं। स >>और पढ़ें

  • दुनिया की सबसे बड़ी श्रीमद्भगवद् गीता कुरुक्षेत्र के मंदिर में रखी जाएगी

    कुरुक्षेत्र (महामीडिया) कुरुक्षेत्र में निर्माणाधीन भव्य इस्कॉन श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर में दुनिया की सबसे बड़ी श्रीमद् भगवद् गीता रखी जाएगी। इस 800 किलो वजन की गीता को इटली के मिलान शहर में तैयार किया गया है। गीता की लंबाई नौ फीट, चौड़ाई छह फीट और ऊंचाई 10 फीट होगी। कवर को मजबूत बनाए रखने के लिए धातु का उपयोग किया जाएगा। 670 पृष्ठों की इस गीता के >>और पढ़ें

  • भोपाल में गाय के गोबर से बनेंगी शुद्ध लकड़ियां

    भोपाल (महामीडिया)  बृजमोहन रामकली गौ संरक्षण केंद्र में गाय के गोबर से लकड़ियां बनाई जाएंगी। गौ शाला ने बताया कि हलाली डेम स्थित बृजमोहन रामकली गौ संरक्षण केंद्र 28 अक्टूबर को गाय के गोबर से शुद्ध लकड़ी बनाने के प्लांट की शुरुआत करेगा।लकड़ी बनाने की मशीन का लोकार्पण गौ संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष अखलेश्वरानंद गिरी, पूर्व सांसद रघुनंदन शर्म >>और पढ़ें


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