महामीडिया न्यूज सर्विस
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समाचार

  • भावातीत ध्यान से 'सत्य' को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है

    भोपाल (महामीडिया) भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रीमद्भागवत में तीस लक्षण बताये गये हें जिनके पालन से सर्वात्मा भगवान प्रसन्न होते है। वे तीस लक्षण इस प्रकार है- सत्य, दया, तपस्या, शौच, तितिक्षा, आत्म निरीक्षण, बाह्य इन्द्रियों का संयम, अन्तः इन्द्रियों का संयम, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, त्याग, स्वाध्याय, सरलता, संतोष, समदृष्टि, सेवा, सदाचार, सुचे >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम

    भोपाल (महामीडिया) बाह्य इन्दियों को संयमित करने से आंतरिक शक्तियों का उन्नयन होता है। भावातीत ध्यान शैली के नियमित अभ्यास से यह प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के लिए सुझाये गये तीस लक्षणों में से "बाह्य इंद्रियों का संयम" भी एक लक्षण है। जो परमपिता परमेश्वर के समीप ले जाता है। अब तक हम इस श्र >>और पढ़ें

  • शशांकासन योग के लाभ

    भोपाल (महामीडिया) शशांकासन को 'शशक (खरगोश) आसन' भी कहा जाता है क्योंकि इसकी अंतिम मुद्रा एक खरगोश जैसी होती है। यह आसन तनाव से मुक्ति पाने में मदद करता है और पूरे शरीर को आराम पहुंचाता है। उम्र की परवाह किए बिना कोई भी शशांकासन कर सकता है। यह रीढ़ की हड्डी को स्ट्रेच करता है और पीठ दर्द से भी मुक्ति दिलाता है।
    शशांकासन योग विधि 
  • ध्यान-योग के फायदे

    भोपाल (महामीडिया) ध्यान, योग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अस्थिर मन बहुत परेशानी का कारण बनता है। ध्यान योग का प्राचीन विज्ञान है जो मन को शांत और सुखदायक अनुभव प्रदान करता है, यह आपके मन से नकारात्मक विचारों को दूर करता है। ध्यान आपके मस्तिष्क को स्वस्थ करने और बेहतर प्रदर्शन में मदद करने के विभिन्न तरीको में से एक हैं। ध्यान योग आपके >>और पढ़ें

  • भावातीत ध्यान से 'सत्य' को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है

    भोपाल (महामीडिया) भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रीमद्भागवत में तीस लक्षण बताये गये हें जिनके पालन से सर्वात्मा भगवान प्रसन्न होते है। वे तीस लक्षण इस प्रकार है- सत्य, दया, तपस्या, शौच, तितिक्षा, आत्म निरीक्षण, बाह्य इन्द्रियों का संयम, अन्तः इन्द्रियों का संयम, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, त्याग, स्वाध्याय, सरलता, संतोष, समदृष्टि, सेवा, सदाचार, सुचे >>और पढ़ें

  • 'ध्यान' और 'योग' से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ

    भोपाल (महामीडिया) 'ध्यान' चेतन मन की एक प्रक्रिया है जिसमें साधक अपनी चेतना बाह्य जगत के किसी चुने हुए दायरे या स्थल विशेष पर केन्द्रित करता है। इसे अंग्रेजी में ?अटेंशन? कहते हैं। योग सम्मत ध्यान और सामान्य ध्यान में अंतर है। योग सम्मत ध्यान लम्बे समय के अभ्यास के परिणाम स्वरूप आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर ले जाता है और सामान्य ध्यान भौतिक शक >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम, भावातीत ध्यान से संभव

    भोपाल (महामीडिया) भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रीमद्भागवत में तीस लक्षण बताए गए हैं। इस श्रृंखला में अब तक सत्य, दया, तपस्या, शोच, तितिक्षा तथा आत्मनिरीक्षण पर चर्चा कर चुके हैं। आज का विषय है बाह्य इन्द्रियों का संयम। समाज में व्याप्त नकारात्मकता व अवगुणों की आलोचना ने अनेक महत्वपूर्ण प्रतिभाओं को अपना शिकार बनाया है। इसका अर्थ यह ह >>और पढ़ें

  • भारतीय दर्शन की मूल भावना है 'अहिंसा'

    भोपाल (महामीडिया) परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी कहा करते थे कि जो व्यक्ति अपनी अंतरनिहित चेतना को जागृत और उदात्त करने हेतु नित्य प्रति सहजगम्य भावातीत ध्यान करता है वह गीता में योगिराज श्रीकृष्ण प्रणीत वैश्विक आनंद का अंग बन जाता है। अहिंसा का शाब्दिक अर्थ है कि किसी भी प्राणी को मन, वचन व कर्म से कष्ट नहीं पहुंचाना। महात्मा गांधी ने इ&# >>और पढ़ें

  • आत्मबुद्धि व इष्टदेव बुद्धि

    भोपाल (महामीडिया) वैदिक और वैज्ञानिक दोनों ही सिद्धांतों पर महर्षि जी प्रणीत भावातीत ध्यान खरा बैठता है। इससे आत्मबुद्धि तथा इष्ट बुद्धि का सहज समन्वय हो जाता है। श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि मैं अपने भक्त के हृदय में वास करता हूँ और उसे भी इसका बोध रहता है। जीव व इन्द्रियों के बीच जो ज्ञान है वह 'मन' कहलाता है। इसी प्रका >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम

    भोपाल (महामीडिया) बाह्य इन्दियों को संयमित करने से आंतरिक शक्तियों का उन्नयन होता है। भावातीत ध्यान शैली के नियमित अभ्यास से यह प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के लिए सुझाये गये तीस लक्षणों में से "बाह्य इंद्रियों का संयम" भी एक लक्षण है। जो परमपिता परमेश्वर के समीप ले जाता है। अब तक हम इस श्र >>और पढ़ें

  • मानवता चेतना को जागृत करने का योग

    भोपाल (महामीडिया) 'भावातीत ध्यान' का अनुभव जो भी करना चाहता है उन सभी के लिये 'भावातीत ध्यान' उपलब्ध है। परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी प्रदत्त यह ध्यान प्रक्रिया वैदिक योग विज्ञान पर आधारित है। यह मानव की चेतना को जागृत करने का योग है। प्रकृति भी चेतना द्वारा ही चलायमान है। यह चराचर विश्व अपनी गति से चल रहा है किंतु मानव भौतिकवादिता के मोह ë >>और पढ़ें

  • भावातीत ध्यान से 'सत्य' को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है

    भोपाल (महामीडिया) भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रीमद्भागवत में तीस लक्षण बताये गये हें जिनके पालन से सर्वात्मा भगवान प्रसन्न होते है। वे तीस लक्षण इस प्रकार है- सत्य, दया, तपस्या, शौच, तितिक्षा, आत्म निरीक्षण, बाह्य इन्द्रियों का संयम, अन्तः इन्द्रियों का संयम, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, त्याग, स्वाध्याय, सरलता, संतोष, समदृष्टि, सेवा, सदाचार, सुचे >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम, भावातीत ध्यान से संभव

    भोपाल (महामीडिया) भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रीमद्भागवत में तीस लक्षण बताए गए हैं। इस श्रृंखला में अब तक सत्य, दया, तपस्या, शोच, तितिक्षा तथा आत्मनिरीक्षण पर चर्चा कर चुके हैं। आज का विषय है बाह्य इन्द्रियों का संयम। समाज में व्याप्त नकारात्मकता व अवगुणों की आलोचना ने अनेक महत्वपूर्ण प्रतिभाओं को अपना शिकार बनाया है। इसका अर्थ यह ह >>और पढ़ें

  • मानवता चेतना को जागृत करने का योग

    भोपाल (महामीडिया) 'भावातीत ध्यान' का अनुभव जो भी करना चाहता है उन सभी के लिये 'भावातीत ध्यान' उपलब्ध है। परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी प्रदत्त यह ध्यान प्रक्रिया वैदिक योग विज्ञान पर आधारित है। यह मानव की चेतना को जागृत करने का योग है। प्रकृति भी चेतना द्वारा ही चलायमान है। यह चराचर विश्व अपनी गति से चल रहा है किंतु मानव भौतिकवादिता के मोह ë >>और पढ़ें

  • भारत देश से ही विश्व शान्ति सम्भव

    भोपाल (महामीडिया) "विश्व शान्ति का स्वप्न और संकल्प न जाने कितने शाँति प्रियजनों ने देखा और लिया किन्तु यह केवल एक दिवास्वप्न ही रह गया। स्वप्न और संकल्प वास्तविक रूप से फलीभूत क्यों नहीं हुआ, इसका विश्लेषण किसी ने नहीं किया। शायद हर एक ने केवल बौद्धिक स्तर पर विचार और प्रचार करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। आज भी यही हो रहा है। विश्व श >>और पढ़ें


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