इंदौर के मंच पर एकाकार हो गए सुर, लय और ताल http://www.mahamediaonline.com

इंदौर के मंच पर एकाकार हो गए सुर, लय और ताल

इंदौर [ महामीडिया ]यह खूबसूरती घरानों की समृद्ध परंपरा की कही जाए या कलाकारों की साधना, जिन्होंने नृत्य के मंच पर अपने कदमों का ऐसा प्रभाव जमाया कि सुर, लय और ताल सब एकाकार होकर दर्शकों के मन में बस गए। पढ़ंत से लेकर प्रस्तुतियों तक में कलाकारों के बीच गजब का तालमेल दिखा। ये तालमेल रिश्तों के बीच के समन्वयन का भी खूबसूरत उदाहरण साबित हुआ, जहां कभी पति-पत्नी, कभी गुरु-शिष्य और कभी गुरु भाईबहनों ने सुरों से ताल मिलाई।लाभ मंडपम में जारी तीन दिवसीय कथक उत्सव के दूसरे दिन रिश्तों के साथ परंपराओं को निभाया गया। कथक केंद्र, लोक संस्कृति मंच ओर नादयोग गुरुकुल के साझे प्रयास से हो रहे इस आयोजन में गुरुवार को भी शानदार प्रस्तुतियां दी गई। इस शाम प्रस्तुतियों की शुरुआत नादयोग गुरुकुल के शिष्यों की प्रस्तुति से हुई।नारी शक्ति को समर्पित इस प्रस्तुति में नृत्यांगनाओं ने नवदुर्गा प्रस्तुति से मंच पर अपनी आमद दर्ज कराई। इसके बाद बनारस घराने से कथक की शिक्षा लेने के बाद जयपुर घराने के गुरु से कथक का ज्ञान लेने वाले दंपती मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी आड़कर ने प्रस्तुतियां दी।शिव को समर्पित श्लोक से अपने नृत्य की शुरुआत करने के बाद तीन ताल में प्रस्तुति दी, जिसमें जयपुर घराने की ठानें, बनारस घराने का शुद्ध अंग की बंदिशें थीं। इन बंदिशों से घराने के मूल स्वरूप को जानने का मौका साधकों को मिला। तीन ताल में ही पारंपरिक गतों को देखना भी सुखद पल रहा।

सम्बंधित ख़बरें