भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ की धरती के नीचे हो रही है हलचल

भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ की धरती के नीचे हो रही है हलचल

नईदिल्ली [ महामीडिया] वाराणसी में स्थित भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का पचास मीटर का क्षेत्र रुक-रुककर हिल रहा है। लोग भूकम्प की आशंका में दहशतजदां हैं। रविवार की शाम शुरू हुआ हिलने का दौरा सोमवार की शाम तक जारी रहा तो अधिकारियों ने जांच के लिए टीम भेजने की बात कही। लेकिन मंगलवार की दोपहर तक कोई टीम नहीं आई। इलाके के लोग टीम के आने का इंतजार करते रहे। भूकंप को लेकर स्थानीय लोगों में जहां चिंता है वहीं कुछ लोग अनहोनी की आशंका में डूबे नजर आए। सारनाथ के पचास मीटर के क्षेत्र में काफी देर तक धरती का हिस्सा हिलता रहा। इस दौरान दुकानों के शटर, गाड़ियां, बेंच, कुर्सियां और बोतल में पानी भी बहुत तेजी से कंपन करने लगा। शटर से तेज आवाजें भी आने लगीं तो किसी अनहोनी की आशंका में लोग घबराकर दूर भाग खड़े हुए। लेकिन दिनभर यही हाल रहने और ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी हलचल खत्म नहीं हुई तो लोगों की चिंता काफी बढ़ गई और दिनभर लोग भूकम्प का अनुभव लेने सारनाथ आने लगे। वहीं पुरातात्विक महत्व के स्थल के पास यह भूकम्पीय स्थिति होने से स्थलों के संरक्षण पर भी लोग सवाल उठाने लगे हैं कि आखिर धरती के नीचे चल क्या रहा है जो लोगों को दहशत में रखे हुए है।सोमवार की सुबह से ही अचानक तिब्बती बौद्ध मंदिर से आगे जापानी बौद्ध मंदिर मोड़ स्थित तिराहे पर सुबह धरती कांपने लगी। यह देख पूरे दिन दुकानदार और स्थानीय लोग भय के साये में रहे। दुकानों से बाहर निकल कर लोग भूकंप का आंकलन करने लगे। कुछ लोगों का कहना है कि यहीं से एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की मोटी पाइप गुजरती है, जिसमें लीकेज की संभावना हो सकती है। हालांकि, रात तक यह कंपन का दौर थमने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमि में कंपन पिछले पांच दिनों से था। पहले लोगों ने समझा कि आसपास कहीं जनरेटर चल रहा है। इसके बाद भूमि में कंपन को लेकर तरह तरह चर्चाएं होने लगी। सोमवार की शाम लोगों को जानकारी हुई कि आसपास कहीं कोई जनरेटर नहीं चल रहा है। इसके बाद लोगों में घबराहट होने लगी। कंपन का केंद्र ट्रेवल्स एजेंसी की दुकान थी। इस दुकान के शटर में कंपन की वजह से हल्की आवाजें हो रही थी। दुकान के टेबल पर ग्लास में पानी रखने पर वह भी कांप रहा था। दुकान से चार मीटर पूरब दिशा में बने नाली के बाद भूमि में कंपन महसूस नहीं हो रहा था। दुकान के उत्तर, पश्चिम व दक्षिण दिशा में लगभह पांच मीटर की त्रिज्या में भूमि में लोग कंपन महसूस कर रहे थे। दुकान मालिक रिंशु यादव का कहना है कि कल रात में भी भूमि में कंपन बंद हो गया था। सुबह सात बजे दुकान खोला तब फिर से कंपन शुरू हो गया।स्थानीय लोगों के अनुसार नीचे से पानी की पाइप भी गुजरी है। सम्भव है उसमें समस्या होने या गैस अथवा पेट्रोल की पाइप की वजह से भी यह समस्या हो सकती है। हालांकि, पुरातात्विक महत्व के स्थल के पास यह भूकम्पीय स्थिति होना भी किसी खतरे से कम नही है। भूकम्पीय स्थिति की वजह से ऐतिहासिक धरोहरों को भी काफी क्षति पहुंचने का अंदेशा है। जबकि पुरातत्व विभाग की ओर से इस हालात की न तो सोमवार को जानकारी ली गई और न ही इस बारे में विभागीय स्तर पर चर्चा हुई कि आखिर सारनाथ की धरती के नीचे चल क्या रहा है।विद्यापीठ के पूर्व कुलपति ने कहा कि काफी कम परिक्षेत्र में भूमि का कंपन होने की मुख्य वजह आसपास के क्षेत्र से कोई मोटी पाइप गुजरी हो और उसके लिए मशीन चल रहा हो। इसकी वजह से ही कंपन आ रहा होगा। कहाकि हो सकता है कि आस-पास कोई बड़ी मशीन चल रहा हो। मौके पर जाकर ही स्पष्ट होगा कि भूमि कंपन के पीछे कारण क्या है।भू एवं मौसम विज्ञानियों का कहना है कि कंपन वाले इलाके के दायरे में कोई पुरातात्विक अवशेष भी हो सकता है। हालांकि बिना जांच किए प्रमाणिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। विज्ञानियों का कहना है कि इस क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट जैसी कोई बात नहीं है। संभव है इस खास क्षेत्र में धरती के नीचे गैस बन रही हो और उसे निकलने का स्थान न मिल रहा हो। कुछ समय पहले बेंगलुरु के एक गांव में भी धरती के छोटे से क्षेत्र में हलचल की समस्या आई थी, जिसकी वजह गैस ही थी। पानी की पाइप के मामले पर जल निगम का कहना है कि ऐसा संभव नहीं है कि पेयजल पाइप में लीकेज की वजह से धरती में कंपन हो। फिलहाल जो भी हो जांचके बाद ही पता चल सकेगा। 

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