अनुपम ऐश्वर्य को प्राप्त कराता है ज्येष्ठ का महीना

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भोपाल (महामीडिया) ज्येष्ठ मास का आरंभ होता है तो गर्मी का मौसम ऊफान पर होता है। ज्येष्ठ महीने में सूर्य अत्यंत ताक़तवर होता है , इसलिए गर्मी भी भयंकर होती है. सूर्य की ज्येष्ठता के कारण इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है. गर्मियों में पानी की किल्लत से हर कोई परेशान रहता है यही कारण हैं कि बड़े बुजूर्गों ने इन पर्व त्यौहारों के जरिये पानी का महत्व समझाने का प्रयास किया है। जल के महत्व को बताने वाले ज्येष्ठ मास की शुरूआत 1 मई से हो चुकी है। 28 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ ही ज्येष्ठ माह की समाप्ति होगी। ऋषि-मुनियों ने ज्येष्ठ में जल का महत्व बहुत अधिक माना है। जल को समर्पित व्रत और त्यौहार भी इसी मास में मनाये जाते हैं। इस महीने में धर्म का सम्बन्ध जल से जोड़ा गया है, ताकि जल का संरक्षण किया जा सके. इस मास में सूर्य और वरुण देव की उपासना विशेष फलदायी होती है. मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है इसी कारण इस माह का नाम ज्येष्ठ रखा गया है।
2018 में ज्येष्ठ मास में ही अधिक मास भी पड़ रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि इस बार ज्येष्ठ मास की अवधि दो मास के बराबर होगी। 1 मई को यह मास आरंभ चुका है। इसके पश्चात 16 मई को अधिक मास की शुरुआत हो रही है। 29 मई को पहली ज्येष्ठ पूर्णिमा रहेगी जो कि अधिक मास में पड़ने के कारण अशुद्ध मानी जाती है। इसके पश्चात अधिक मास का समापन ज्येष्ठ मास की दूसरी अमावस्या जो कि 13 जून को पड़ रही है, को होगा। ज्येष्ठ मास का समापन 28 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ ही होगा।  ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष में जल के महत्व को बताने वाले दो महत्वपूर्ण त्यौहार गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी हैं। गंगा नदी का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। क्योंकि गुणों के मामले में गंगा नदी का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। 
महाभारत अनुशासनपर्व अध्याय 106 के अनुसार "ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्। ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।।" जो एक समय ही भोजन करके ज्येष्ठ मास को बिताता है वह स्त्री हो या पुरुष, अनुपम श्रेष्ठ एश्‍वर्य को प्राप्त होता है। ज्येष्ठा में तिल का दान बलवर्धक और मृत्युनिवारक होता है ज्येष्ठ मास हनुमान जी का प्रिय मास है। श्रीराम से हनुमान जी की पहली मुलाकात ज्येष्ठके महीने में हुई थी। यही वजह है कि ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले मंगलवार का बड़ा महत्व होता है। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन स्नान करके विधिवत् व्रत-उपवास करके भगवान कृष्ण की पूजा उपासना करते हुए श्री नारदपुराण का श्रवण करें तो भक्ति जन्म-जन्मान्तरों के पाप से मुक्त हो जाता है। माया के जाल से मुक्त होकर निरंजन हो जाता है। भगवान् विष्णु के चरणों में वृत्ति रखने वाला संसार के प्रति अनासक्त होकर फलस्वरूप जीव मुक्ति को प्राप्त करता हुआ वैकुंठ वासी हो जाता है।