फूलों के रास्ते धरती पर उतरा बसंत

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भोपाल (महामीडिया) बसंत ऋतु का आज से आगमन हो गया है। ऋतुराज के स्वागत के लिये प्रकृति में चारों ओर पीले रंग की चादर बिछ गई है। आम के पेड़ों पर नए बौर आ गये हैं। खेतो में सरसों, जौ और गेहूँ की बालियाँ लहलहा रही है। फूलों पर तितलियां और भौरें मंडराने लगे हैं। सचमुच प्रकृति पीताम्बरी हो गई है। मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए बसंत पचमी के दिन सरस्वती माता की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है । माँ सरस्वती को विद्या एवम् बुद्धि की देवी माना जाता है | बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती से विद्या, बुद्धि, कला एवं ज्ञान का वरदान मांगा जाता है। सेहत की दृष्टि से देखा जाए तो यह मौसम बहुत अच्छा होता है | इंसानों के साथ-साथ पशु पक्षियों में नई चेतना का संचार होता है, यह त्यौहार हिंदुओं के लिए बहुत खास है | इस त्यौहार पर पवित्र नदियों में लोग स्नान आदि करते हैं, इसके साथ ही बसंत मेला आदि का भी आयोजन किया जाता है| बसंत पंचमी के दिन को बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के आरंभ के लिए शुभ मानते हैं। इस दिन बच्चे की जीभ पर शहद से ॐ बनाना चाहिए। माना जाता है कि इससे बच्चा ज्ञानवान होता है व शिक्षा जल्दी ग्रहण करने लगता है। अन्नप्राशन के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है। बसंत पंचमी को परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है, इसके साथ-साथ गृह प्रवेश से लेकर नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ माना जाता है।