नवरात्र के पहले दिन होती है माँ शैलपुत्री की पूजा

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भोपाल (महामीडिया) चैत्र नवरात्र का प्रारम्भ आज से हो रहा है। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। जीवन में स्थिरता और शक्ति की कमी दूर करने के लिये मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। 
शैलपुत्री माता का मंत्र 
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। सबसे पहले जिस जगह पूजा की जानी है उस जगह को पहले साफ करें और उस लकड़ी के एक पाटे पर मां शैलपुत्री की तस्वीर रखें। उसे शुद्ध जल से साफ करें। कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाएं। उसके बाद हाथ में कुछ चावल लेकर भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पाटे पर रख दें। अब जिस कलश को स्थापित करना है उसमें शुद्ध जल भरें, आम के पत्ते लगाएं और पानी वाला नारियल उस कलश पर रखें। इसके बाद उस कलश पर रोली से स्वास्तिक का निशान बनाएं। अब उस कलश को स्थापित कर दें। नारियल पर कलावा और चुनरी भी बांधें। अब एक तरफ एक हिस्से में मिट्टी फैलाएं और उस मिट्टी में जौं डाल दें।
अब मां शैलपुत्री को कुमकुम लगाएं। चुनरी उढ़ाएं और घी का दीपक जलाए। अज्ञारी में सुपारी, लोंग, घी, प्रसाद इत्यादि का भोग लगाएं। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और मां शैलपुत्री की कथा पढ़ें।