टेस्ट को ज्यादा साइंटिफिक बनाने परीक्षा कराएगी नैशनल टेस्टिंग एजेंसी!

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नई दिल्ली [महामीडिया]: उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए सारी परीक्षाएं कराने वाली  नैशनल टेस्टिंग एजेंसी रैंकिंग की बजाय अब योग्यता की परीक्षा ले सकती है। इसी महीने हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को लेकर कई सुझाव दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब पीएमओ ने एचआरडी मिनिस्ट्री से कहा है इन सुझावों को एनटीए के ड्राफ्ट में शामिल किया जाए। मिनिस्ट्री इस पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में हायर एजुकेशन सेक्रटरी के साथ कई आईआईटी के डीन, ऐडमिशन बॉडी के चेयरपर्सन, एसएससी सेक्रटरी और जेएनयू समेत कुछ यूनिवर्सिटी के वीसी भी मौजूद रहे। मीटिंग से जो सुझाव आए हैं अब उनपर पीएमओ की तरफ से काम करने को कहा गया है। कहा गया है कि एनटीए को शुरू में वही एग्जाम कराने चाहिए, जो फिलहाल सीबीएसई करा रही है। एक बार जब एनटीए सही से स्थापित हो जाएगा, फिर दूसरे एग्जाम कराए जा सकते हैं। टेस्ट को ज्यादा साइंटिफिक बनाने के लिए ऑनलाइन एग्जाम जरूरी कराने का भी सुझाव है। इसके लिए मौजूदा स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारना होगा।एक अहम सुझाव, जिसपर पीएमओ ने विचार करने को कहा है, वह ये है कि एनटीए एग्जाम में स्टूडेंट्स को रैंकिंग देने की बजाय महज योग्यता की परीक्षा ले। यानी एनटीए क्वॉलिफाइंग एग्जाम कराए, न कि रैंकिंग। रैंकिंग एग्जाम में एग्जाम देने वाले को नतीजों के आधार पर रैंक दी जाती है, जिस आधार पर एडमिशन होता है। लेकिन सुझाव है कि एनटीए बस क्वॉलिफाइंग एग्जाम कराए, यानी एक तय पर्सेंटाइल तक नंबर लाने वालों को सफल घोषित करे। एनटीए पर्सेंटाइल स्कोर देगा। अगर जरूरी हुआ तो यूजर इंस्टिट्यूट पर्सेंटाइल के आधार पर सही कैंडिडेट चुनने के लिए अडिशनल टेस्ट ले सकता है। हालांकि, इसके लिए एग्जाम पैटर्न में बदलाव करना होगा।
यह भी सुझाव है कि एनटीए साल में एक ही बार एग्जाम आयोजित न कर इसे दो बार या जरूरत हुई तो तीन बार भी
करवा सकती है। इससे स्टूडेंट्स को अच्छा परफॉर्म करने में मदद मिलेगी। साथ ही एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी नियंत्रित रहेगी। यह भी सुझाव है कि एनटीए में साइकोमेट्रिशन भी होने चाहिए, जो ऐप्टिट्यूट टेस्ट डिजाइन कर सकें।
एनटीए जो भी एग्जाम कराए, उसमें विषय के ज्ञान के साथ ही ऐप्टिट्यूट का भी टेस्ट होना चाहिए।
क्यों अहम है एनटीए नैशनल टेस्टिंग एजेंसी बनने के बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) टेस्ट कराने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे और ऐकडेमिक्स पर फोकस कर सकेंगे। कुछ महीनों पहले सीबीएसई ने अचानक नैशनल इलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) कराने को लेकर हाथ खड़े कर दिए थे। तब सीबीएसई और यूजीसी के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ था कि यह टेस्ट कौन कराएगा। सीबीएसई के मुताबिक, उन्हें ये टेस्ट करवाने के लिए बहुत रिसॉर्स इस्तेमाल करने पड़ते हैं और उनका अपना काम प्रभावित होता है। एनटीए बनने के बाद यह दिक्कत दूर हो जाएगी। सरकार ने इस बजट में टेस्टिंग एजेंसी बनाने का ऐलान किया था।