नवरात्र के नौ दिनों में इन रंगों का करें प्रयोग

नवरात्र के नौ दिनों में इन रंगों का करें प्रयोग

भोपाल [महामीडिया ] नवरात्र का पर्व मां की आराधना का पर्व होता है। इन नौ दिनों में देवी की आराधना करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। नवरात्र को साल का एक बड़ा धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। इन दिनों में की गई साधना का विशेष फल मिलता है। नवरात्र के नौ दिनों में माता को उनकी पसंद के फल, फूल, मेवे और मिष्ठान्न चढ़ाए जाते हैं। माता प्रसन्न होकर अपने भक्तों की झोली भरती है। नवरात्र के नौ दिनों में रंगों का भी विशेष महत्व है। इसलिए नवरात्र के नौ अलग-अलग रंग होते हैं।
प्रतिपदा तिथि का रंग-प्रतिपदा तिथि का रंग पीला है। पीले रंग को पूजा-पाठ में काफी उपयोग में लिया जाता है। इस रंग को वैराग्य से जोड़कर देखा जाता है, वहीं इस रंग की पहचान पवित्रता और मित्रता से भी होती है। यह देवगुरु बृहस्पति का रंग है।
द्वितीया तिथि का रंग-द्वितीया तिथि का रंग हरा है। यह बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस रंग से जीवन में प्रेम की अधिकता होती है और खुशियों का आगमन होता है। इस रंग का मानव मन पर अच्छा असर पड़ता है।
तृतीया तिथि का रंग-तृतीया तिथि का रंग भूरा है। भ्रम के निवारण में यह रंग सहायक होता है। यह रंग व्यक्ति के भ्रम की बाधा को दूर रखता है। असमंजस की स्थिति से मुक्ति दिलाता है और विवादों से छुटकारा मिलता है।
चतुर्थी तिथि का रंग-चतुर्थी तिथि का रंग नारंगी है। यह लाल और पीले रंग के समावेश से बना है। इसलिए यह ज्ञान, ऊर्जा, शक्ति, प्रेम और आनंद का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र की चतुर्थी तिथि को इस रंग के प्रयोग से मंगल और बृहस्पति दोनों ग्रहों की कृपा एक साथ प्राप्त की जा सकती है।
पंचमी तिथि का रंग-पंचमी तिथि का रंग सफेद है जो शाति, सदभाव और सादगी का प्रतीक माना जाता है। यग रंग चंद्रमा और शुक्र से संबंधित हैा इसलिए इस रंग के प्रयोग से चंद्रमा और शुक्र की कृपा प्राप्त होती है।
षष्ठी तिथि का रंग-षष्ठी तिथि का रंग लाल है, जो मंगल और सूर्य दोनों का प्रतीक माना जाता है। लाल रंग प्रेम, उत्साह और साहस का प्रतीक है, लेकिन घर की दीवार में लाल रंग के प्रयोग की मनाही है। षष्ठी तिथि को लाल रंग के प्रयोग से लाभ होता है।
सप्तमी तिथि का रंग-सप्तमी तिथि का रंग नीला है। यह रंग सामाजिक क्षेत्र के लिए विशेष लाभदायक है। नीला रंग से साधक को कई तरह के लाभ मिलते हैं। सामाजिक क्षेत्र में इसका विशेष प्रभाव होता है और यह राहु का रंग है।
अष्टमी तिथि का रंग-अष्टमी तिथि का रंग गुलाबी है और इस रंग को शुक्र, चंद्र और मंगल तीनों का प्रतीक माना जाता है। इस रंग से शुक्र सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। नवरात्र की अष्टमी तिथि पर इस रंग का प्रयोग शारीरिक बल में वृद्धि करता है।
नवमी तिथि का रंग-नवमी तिथि का रंग बैगनी है। इस रंग से जीवन में ओज की वृद्धि होती है। ज्योतिष के अनुसार यह हिंसक रंग है, जबकि धार्मिक कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है। इसको नकारात्कता को दूर करने वाला ग्रह माना जाता है।
 

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