नंदी और मूषक के कान में क्यों कही जाती है मनोकामना

नंदी और मूषक के कान में क्यों कही जाती है मनोकामना

भोपाल (महमीडिया) कई मंदिरों में आपने देखा होगा कि लोग भगवान शिव जी के वाहन नंदी और भगवान गणपति के वाहन मूषक के कान में धीरे से अपनी मनोकामना कह रहे होते हैं। इसके पीछे लोगों की मान्यता है कि नंदी और मूषक भगवान के दूत होते हैं। अगर इनके कान में अपनी मनोकामना कह दी जाए तो वो भगवान तक पहुंचा देते हैं। 
नंदी को लेकर ये है मान्यता
नंदी को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव की तपस्या में किसी प्रकार के विध्न को रोकने के लिए वे मंदिरों में बारह की तरफ तैनात रहते हैं। जब कोई शिव जी के पास अपनी मनोकामना लेकर आता है तो वो उसकी मनोकामना को आगे नहीं बढ़ने देते ताकि भगवान की तपस्या भंग नहीं हो। इसलिए लोग उनके कान में अपनी बात कहते हैं ताकि वे शिव जी तक लोगों की मनोकामना पहुंचा दें। शिव जी को नंदी बेहद प्रिय हैं और वे उनका कहा कभी नहीं टालते।
इसलिए मूषक के कान में कहते हैं मन्नत
गणेशजी विद्या और बुद्धि के अधिष्‍ठाता हैं और तर्क वितर्क में बेजोड़ हैं, यही गुण मूषक में भी होते हैं। इसी कारण वो गणपति का वाहन है और गणपति का बेहद करीबी माना जाता है। लोगों का विश्वास है कि अगर आप कोई बात मूषक के कान में कहते हैं तो वो बहुत जल्दी गणपति तक पहुंचती है। प्रिय होने के कारण मूषक की बातों को गणपति टाल नहीं पाते और मनोकामना पूरी हो जाती है। यही कारण है कि लगभग सभी बड़े मंदिरों में मूषक की अलग से बड़ी मूर्ति लगाई जाती है और लोग उनकी पूजा करते हैं। वहीं गणेश चतुर्थी पर भी कुछ लोग गणपति के साथ मूषक की भी मूर्ति लाकर घर में रखते हैं।
 

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