योग, ध्यान और मधुर संगीत से शरीर को रखें स्वस्थ     

भोपाल [महामीडिया] योग एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है। जिसका इतिहास लगभग 5000 साल पुराना है। हालांकि कई लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम ही मानते हैं, जहाँ लोग शरीर को मोडते, मरोड़ते, खींचते हैं और श्वास लेने के जटिल तरीके अपनाते हैं। पर वास्तव में यह सत्य नहीं है। योग धर्म, आस्था और अंधविश्वास से परे है, योग एक सीधा विज्ञान है जिसमें शरीर,मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। वैज्ञानिक अब इसके महत्व को मान चुके है और बहुत सी रिसर्च में ये साबित हो चूका है की योग हमें शारीरिक लाभ के साथ मानसिक लाभ भी पहुंचाता है।
इसीलिए योग सेहतमंद जीवन के लिए बहुत जरूरी माना जाताहै I ऐसा माना जाता है कि जब से सभ्यता शुरू हुई है, तभी से योग किया जा रहा हैl योग मुख्यत:  संस्कृत का शब्द हैl इसकी उत्पत्ति रुग्वेद से हुई हैl इसकी सरल व्याख्या यही है कि यह वह शक्ति है जिससे हम अपने मन, मस्तिष्क और शरीर को एक सूत्र में पिरो सकते हैंl योग के नियमित अभ्यास से मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता हैl  जिससे तनाव दूर होकर अच्छी निद्रा आती हैl भूख अच्छी लगती है और पाचन भी सही रहता हैl  योग से मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता है, लेकिन चिकित्सा शोधों ने ये साबित कर दिया है की योग शारीरिक और मानसिक रूप से वरदान हैI योग से तनाव दूर होता है और अच्छी नींद आती है, भूख अच्छी लगती है, इतना ही नहीं पाचन भी सही रहता हैI अत: योग, ध्यान और संगीत का मेल जीवन के लिए आवश्यक हैl
योग हमारी पुरातन पारंपरिक अमूल्य देन हैl  यह स्वास्थ्य कल्याण का समग्र दृष्टिकोण हैl इसे शरीर और  और आत्मा के बीच समंज्यस्य का अद्भूत शास्त्र माना जाता हैl आज कोरोना वायरस की इस महामारी के दौर में हर तरफ़ तनाव एवं अवसाद का वातावरण बना हैl ऐसे में नियमित और संतुलित आहार वाली दिनचर्या, योग, और ध्यान ही हमें स्वस्थ एवं ऊर्जावान रख सकता हैl इसी तरह संगीत वह जादू है जो मिनटो में आपके मूड को ठीक कर सकता हैl  आपको थिरकने पर विवश कर सकता हैl  साइंटिफिक अध्ययन भी यही बताते हैं कि संगीत शरीर में तनाव के हर्मोन्स  के स्तर को कम करता है, वही योगासन के अंतर्गत ध्यान और प्राणयम के माध्यम से तनाव, ब्लडप्रेशर पर नियंत्रण, दिल की बीमारी का खतरा कम होता हैl मांसपेशियों के रिलेक्स होने से मन प्रसन रहता हैl हल्का मधुर संगीत सुनते हुए योग और ध्यान करने का विचार अति उत्तम हैl
विश्वभर में योग की लोकप्रियता का अन्दजा विभिन आंकडो के आधार पर लगाया जा सकता है कि इटली में 53 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं फिटनेस के लिए योग का अभ्यास करती हैं, नीदरलैंड्स में 30 प्रतिशत लोग मन-मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए योग अभ्यास करते हैं, पिछले चार सालों में अमेरिका में योग करने वालों की संख्या 50 प्रतिशत बढ गई , स्टडी यह भी बताती है कि यदि हम सप्ताह में दो-तीन दिन भी योग अभ्यास करते हैं तो अनिद्रा या स्लिपिंग डिसआर्डर जैसी समस्यायों से बचा जा सकता हैl
वैदिक साहित्य की अथर्ववैदिक संहिताओं में आयुर्वेद एवं योग सम्बन्धी तथ्यों की सार्थक चर्चा दृष्टिगोचर होती है, किन्तु आगे आर्ष औपनिषदिक स्तर पर स्वास्थ्य सम्बन्धी चर्चाओं को गौण स्थान प्राप्त हुआ एवं आध्यात्मिक उत्कर्ष की साधना को विशेष प्रश्रय प्रदान किया गया। आर्ष औपनिषदिक स्तर पर योग को आध्यात्मिक साधना के रूप में निरूपित किया गया।  योग विद्या के विकास के अगले क्रम में भगवद्गीता के वक्तव्यों में योग की चर्चा करते हुए प्रारम्भ से ही योग में स्थित होकर कर्तव्य कर्मों को सम्पन्न करने का निर्देशन हुआ है। यहाँ दैनन्दिन सांसारिक कर्तव्यगत सक्रियता के साथ योग को जोड़कर भगवान कृष्ण ने कर्तव्यकर्मों को आध्यात्म की ओर उन्मुख करने हेतु कर्मसन्यास की अवधारणा एवं साधना का उपदेश दिया।
महामुनि पतंजलि ने अपने से पूर्ववर्ती समस्त योग सम्बन्धी प्रतिपादनों का संकलन करते हुए योग को चेतना विकास के विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया। इसी मध्य जैन परम्परा में योग को मोक्ष मार्ग एवं बौद्ध परम्परा में अष्टांगिक मध्यम मार्ग के रूप में विवेचित किया गया। शाक्त एवं शैव परम्परा से संबद्ध तन्त्र एवं आगम ग्रन्थों में प्रवृत्ति एवं निवृत्ति के मध्य सम्यक् समन्वयन पर बल दिया तथा कुण्डलिनी जागरण की महत्वपूर्ण साधना प्रणाली का अवदान प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार से तन्त्र एवं आगम मार्ग में साधना को सामान्य जीवनपरक स्वरूप दिया गया। आधुनिक युग में योग को स्वास्थ्यवर्धन एवं रोगोपचारक विधा के रूप में ही प्रचार एवं प्रसार प्राप्त हो रहा है।
वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि योग करने से आपकी आने वाली पीढ़ी ओजस्वी बनेंगी। अब तक के अनेक प्रयोग और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि ध्यान साधना से भय क्रोध चिंता तनाव अवसाद या मूड खराब रहने जैसी शिकायतें ना केवल घटते हैं, लंबे और नियमित अभ्यास द्वारा उनसे छुटकारा भी पाया जा सकता है। एम्स ने कई शोध करके योग की अहमियत पर मुहर लगा दी है। 
मोटापा तनाव मधुमेह में, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के इलाज में योग किया जाए, तो यह टॉनिक का काम करता है। इसे ध्यान में रखते हुए एम्स प्रोटोकॉल तैयार करने में लगा है कि किस बीमारी में कौन सा योग कौन सा आसन लाभदायक रहेगा, इसके लिए संस्थान के विभिन्न विभागों में योग से जुड़ी 20 परियोजनाओं पर शोध चल रहा है I योग को लेकर एम्स में होने वाले रिसर्च का इतिहास ,वैसे  बेहद पुराना है योगियों के ज्ञान इंद्रियों पर विजय पाने को लेकर पहला शोध 1957 में हुआ था। जो 61-62 में पब्लिश भी हुआ अतिशयोक्ति को दरकिनार करते हुए वैज्ञानिकों ने यह बताया कि योग के जरिए योगी अपनी धड़कनों को रोक तो नहीं सकते लेकिन योगाभ्यास से उस पर एक हद तक काबू जरूर पा सकते हैं।
जर्मनी के एक ताजा अध्ययन में देखा गया है कि उन्हें 10 सप्ताह तक हठयोग करने के बाद हृदय की धड़कन और रक्तचाप के बीच तालमेल रखने वाली तथाकथित रिफ्लेक्स प्रणाली में स्पष्ट सुधार आ गया। नार्वे के वैज्ञानिकों ने हाल ही में पाया कि हठयोग बहुत थोड़े ही समय में शरीर की रोग प्रतिरक्षण प्रणाली पर अनुकूल प्रभाव डालने लगता है, नियमित योग ना केवल तनाव घटाता है हड्डियों को भी मजबूत करता है। क्रॉनिक बीमारियों में मरीज के तनाव का स्तर तेजी से बढ़ता है जिससे उनमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है ऐसी स्थिति में योग के जरिए उसमें आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है और लीवर और गोल ब्लैडर का मोटापा भी कम करता है योग से डायबिटीज बांझपन, कैंसर ,एड्स गठिया के साथ-साथ अन्य ऑटोइम्यून डिजीज को काबू करने में सफलता मिल रही है। मोटापा तनाव मधुमेह में, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के इलाज में योग किया जाए, तो यह टॉनिक का काम करता है।
आधुनिक युग की अपेक्षानुसार योगशास्त्र के आयुर्वेदशास्त्र के साथ नव्य समन्वयन एवं संयोजन की अपेक्षायें क्रमशः बलवती होकर दृढ़भूमि प्राप्त कर रही हैं। अत: योग और ध्यान को अपने जीवन नियमित शैली में लाए और शरीर एवं मन को स्वस्थ रखें।
 

- -प्रभाकर पुरंदरे

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