कोरोना से बच्चों को सुरक्षित रखा जाये

कोरोना से बच्चों को सुरक्षित रखा जाये

नई दिल्ली [महामीडिया] भारत में इस समय कोरोना की दूसरी लहर चल रही है और अगले चार हफ्ते अधिक हानिकारक हो सकते हैं। कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे भी काफी संख्या में संक्रमित हो रहे हैं। अभी हाल ही में बेंगलुरु में 400 बच्चे कोरोना संक्रमित पाए गए थे। महाराष्ट्र में 0-5 साल के लगभग 9,900 और 6 से 10 साल के 15 हज़ार बच्चे संक्रमित हुए है। छत्तीसगढ़ में 0-5 साल के 900 और 6 से 10 साल के 1400, कर्नाटक में 0-5 साल के 900 और 6 से 10 साल के 1200, दिल्ली में 0-5 साल के 450 और 6 से 10 साल के 700, उत्तर प्रदेश में 0-5 साल के करीब 500 और 6 से 10 साल के करीब 700 बच्चे संक्रमित हुए है। इसके अलावा दूसरे राज्यों में भी बच्चों के संक्रमित होने के मामले आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के वायरस से संक्रमित होने की आशंका अधिक होती है। अब जब स्कूल खुल गए हैं और बच्चे एक-दूसरे से बात कर रहे हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं, इस कारण से वायरस के संपर्क में आ रहे हैं। वैसे तो हर वर्ग को लोग संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन बच्चों की तुलना वे कम रिस्क पर हैं। कोरोना से बच्चों के मौतों के मामले बहुत कम सामने आए हैं। वहीं, कोविड का नया वेरिएंट ज्यादा खतरनाक है और यह बच्चों को आसानी से संक्रमित कर सकता है। साथ ही साथ अभी बच्चों को वैक्सीन देने की अनुमित भी नहीं दी गई है।
कई रिसर्च में दावा किया गया है कि वायरस के नया संस्करण घातक है और आसानी से इम्यून डिफेंस और एंटीबॉडी को सरपास कर सकता है। विज्ञानियों का मानना है कि वायरस के नया स्ट्रेन बच्चों की इम्यून सिस्टम को बिगाड़ सकता है और आसानी से स्ट्राइक कर सकता है। जिसके चलते बच्चों को लेकर और ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, कई बच्चों में कोई लक्षण नहीं होते हैं और कई जो बीमार पड़ते हैं उनमें हल्के लक्षण होते हैं, जैसे लो-ग्रेड फीवर, थकान और खासी होना शामिल होता है। संभावित रूप से गंभीर और खतरनाक मल्टीसिस्ट इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम नामक बच्चों में हो सकते है, जो हृदय और अन्य अंगों के लिए समस्या खड़ी कर सकते हैं। वहीं, शरीर के विभिन्न अंग हृदय, फेफड़े, गुर्दे, मस्तिष्क, त्वचा, आंखों में सूजन आ सकती है।
मल्टीसिस्ट इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम-C के लक्षण 

  • कई दिनों से अधिक समय तक बुखार आना
  • रैश
  • आखों का लाल रहना
  • पेट दर्द
  • उल्टी या दस्त
  • गर्दन में दर्द
  • होठों का लाल होना और फट जाना
  • जीभ का ज्यादा लाल होना
  • हाथ और पैरों का सूज जाना
  • चिड़चिड़ापन, असामान्य नींद और कमजोरी आना
     

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