मध्यप्रदेश में बिना रिश्वत के राशनकार्ड नहीं मिलता तो राशन कैसे मिलेगा ? 

मध्यप्रदेश में बिना रिश्वत के राशनकार्ड नहीं मिलता तो राशन कैसे मिलेगा ? 

भोपाल [ महामीडिया] सरकार दावा कर रही है कि देश के 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन बांटा जा रहा है। लेकिन पड़ताल में पता चला है कि गरीब दो जून की रोटी का इंतजाम अब भी बमुश्किल कर पा रहे हैं, क्योंकि दिल्ली से मिला मुफ्त राशन उन तक पहुंच ही नहीं रहा।प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, यानी PMGKY योजना के तहत गरीबों को हर महीने 5 किलो गेहूं या चावल मुफ्त बांटा जा रहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को ही इस स्कीम को 5 महीने के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी है। साथ ही इससे फायदा पाने वाले लोगों की संख्या भी 80 करोड़ से बढ़ाकर 81.35 करोड़ बताई गई है।केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की सच्चाई जानने के लिए हमने सबसे पहली पड़ताल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में की। सरकार के आंकड़े कहते हैं कि मध्यप्रदेश के 7.33 करोड़ लोगों में से 5.46 करोड़, यानी करीब 75% को मुफ्त राशन मिल रहा है।हमने गणेश से बात की पहले मजदूरी पर जाते थे, लेकिन कोरोना के बाद से काम-धंधा कभी-कभी ही मिल पाता है। मैंने पूछा आपको राशन मिल रहा है? तो बोले, हमें तो एक साल से नहीं मिला। क्यों नहीं मिला? तो बोले, वो देते ही नहीं हैं। पत्नी के नाम से राशन कार्ड है, लेकर जाओ तो कहते हैं, कार्ड बंद है। राशन दुकान वाले ने कहा था कि कलेक्ट्रेट चले जाओ, वहां से कार्ड चालू हो जाएगा। पत्नी वहां भी गई थी, लेकिन कार्ड चालू हुआ ही नहीं।गणेश से बात हो ही रही थी कि कैमरा देखकर आसपास के कई लोग इकट्‌ठा हो गए। इन्हीं में से एक थीं 55 साल की दुर्गाबाई। परिवार में एक लड़का है। मैंने पूछा- राशन मिलता है? तो बोलीं, कार्ड ही नहीं है। क्यों नहीं है? तो बोलीं, वो बनाते ही नहीं। कहते हैं कागज कम हैं। मेरे पास आधार कार्ड और परिचय पत्र है, लेकिन उस पर कार्ड नहीं बन रहा।दुर्गाबाई के सामने के घर में रहने वाली तारा बोलीं, सर मुझे भी कुछ नहीं मिलता। मेरे पास भी कार्ड नहीं है। 7 नंबर पर कार्ड बनवाने जाओ तो कहते हैं 5 हजार रुपए दो, 7 हजार रुपए दो। कलेक्टर ऑफिस में बाबू, कर्मचारी रिश्वत मांगते है और कंट्रोल में जाओ तो वहां भी रिश्वत मांगी जाती है। अब मैं कहा से ले आऊं 6 हजार रुपए? मेरा लड़का दूध की गाड़ी पर जाता है, उसी से गुजर-बसर चल रही है।अन्ना नगर भोपाल का पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां रहने वाले अधिकतर लोग दिहाड़ी करके ही जिंदगी चला रहे हैं। कोरोना वैक्सीन की जागरूकता बढ़ाने के लिए हाल ही में यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे थे।
 

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