पहली बार इंश्योरेंस एंड क्रेडिट संशोधन बिल को मंजूरी मिली 

पहली बार इंश्योरेंस एंड क्रेडिट संशोधन बिल को मंजूरी मिली 

नईदिल्ली [ महामीडिया] बैंक ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन एक्ट  संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है। इससे बंद या  डूब चुके बैकों के ग्राहकों के लिए बड़ी राहत होगी। क्योंकि अब बैंक डूबने की स्थिति पर जमाकर्ताओं को 90 दिन के भीतर 5 लाख मिल जाएंगे। हालांकि, सरकार ने 2020 में ही डिपॉजिट इंश्योरेंस की लिमिट 5 गुना बढ़ाने का फैसला किया था।अभी तक के नियमों के मुताबिक बैंक का लाइसेंस कैंसिल होने और लिक्विडेशन प्रोसेस में जाने पर बैंक ग्राहकों को 5 लाख रुपए तक का डिपॉजिट इंश्योरेंस मिलता है। यह 4 फरवरी 2020 से लागू है। डिपॉजिट इंश्योरेंस में 1993 के 27 साल बाद पहली बार बदलव किया गया। DICGC एक्ट, 1961 की धारा 16 (1) के मुताबिक अगर कोई बैंक डूब जाता है या दिवालिया हो जाता है, तो DICGC प्रत्येक जमाकर्ताओं को पेमेंट करने के लिए जिम्मेदार होता है। क्योंकि वह जमाकर्ताओं द्वारा जमा किए गए रकम पर 5 लाख रुपए तक का बीमा होता है।जबकि, ग्राहक का एक ही बैंक की कई ब्रांच में अकाउंट है, तो सभी अकाउंट में डिपॉजिट अमाउंट और ब्‍याज जोड़ा जाएगा और केवल 5 लाख तक जमा को ही सुरक्षित माना जाएगा। इसमें मूल राशि और ब्‍याज दोनों शामिल होंगे। यानी बैंक ग्राहक द्वारा जमा राशि दोनों जोड़कर 5 लाख से ज्यादा है. तो केवल 5 लाख ही सेफ माना जाएगा।इंश्योरेंस कवर बढ़ने के साथ बैंक ग्राहकों को एक तरफ फायदा तो हुआ लेकिन दूसरी ओर, प्रति 100 रुपए पर लगने वाला प्रीमियम भी 10 पैसे से बढ़कर 12 पैसे हो गया है। बताते चलें कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी रिजर्व बैंक की स्वामित्व वाली एक संस्था है, जो बैंक डिपॉजिट पर इंश्योरेंस कवर मुहैया कराती है।

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