मकर संक्राति  में देवता भी प्रयागराज में त्रिवेणी स्नान करते हैं 

मकर संक्राति  में देवता भी प्रयागराज में त्रिवेणी स्नान करते हैं 

भोपाल [ महामीडिया] मकर संक्राति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक दिन पूर्व 14 को शुक्रवार रात 8.58 बजे होगा। सूर्य आराधना के इस बड़े पर्व से पांच पौराणिक प्रसंग भी जुड़े है, जिनका उल्लेख धर्मग्रंथों में भी मिलता है। किसी ग्रंथ में मोक्ष पाने के लिए भीष्म पितामह का इसी दिन प्राण त्यागने का उल्लेख है तो कहीं मकर संक्रांति पर ही भगवान राम द्वारा पतंग उड़ाने और राजा भागीरथ द्वारा पूर्वजों को गंगा में तिल से तर्पण करने की बात कही गई है।सूर्य पूजा मकर संक्रांति का सबसे बड़ा पर्व है। इसकी वजह सूर्य का इस दिन उत्तरायण होना है। सूर्य 6 महीने दक्षिणायन और 6 माह उत्तरायण रहते हैं। शास्त्रोक्त मान्यता है कि देवताओं के दिवसों की गणना इस दिन से ही प्रारम्भ होती है। सूर्य जब दक्षिणायन में रहते है तो उस अवधि को देवताओं की रात्रि व उत्तरायण के 6 माह को दिन कहा जाता है।रामचरित मानस के बालकांड में चौपाई है - माघ मकर गत रवि जब होई, तीरथ पतिहि आव सब कोई…देव दनुज किन्नर नर श्रेनी, सादर मज्जहि सकल त्रिवेणी…अर्थात माघ माह में जब सूर्य मकर राशि में जाते हैं, तब देवता ही नहीं, मनुष्य, दैत्य और किन्नर भी तीर्थराज प्रयाग में त्रिवेणी में स्नान करते हैं।

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