क़ानून-व्यवस्था के उल्लंघन की संभावना हिरासत में रखने का आधार नहीं -सुप्रीम कोर्ट

क़ानून-व्यवस्था के उल्लंघन की संभावना हिरासत में रखने का आधार नहीं -सुप्रीम कोर्ट

नईदिल्ली [ महामीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा है कि ‘कानून और व्यवस्था’, ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ और ‘राज्य की सुरक्षा’ का मतलब अलग-अलग होता है, इसलिए कानून एवं व्यवस्था के संभावित उल्लंघन के आधार पर नजरबंदी कानूनों का इस्तेमाल कर व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात जैसे कार्य ‘कानून और व्यवस्था’ को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि इसने ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ को भी प्रभावित किया है। सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने के लिए ‘सार्वजनिक अव्यवस्था’ होनी चाहिए, जो किसी समुदाय या बड़े पैमाने पर जनता को प्रभावित करती हो।अदालत बांका रविकांत नामक व्यक्ति की पत्नी बांका स्नेहा शीला द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो सितंबर 2020 में साइबराबाद पुलिस आयुक्त के आदेश पर तेलंगाना खतरनाक गतिविधि रोकथाम अधिनियम 1986 के तहत हिरासत में है।

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