महानवमी को आज माँ सिद्धिदात्री की पूजा

महानवमी को आज माँ सिद्धिदात्री की पूजा

भोपाल (महामीडिया) आज अश्विनी शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मां दुर्गा के नौवें रूप की पूजा-अर्चना की जाएगी. नवमी तिथि शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. बीते 7 अक्टूबर को शुरू हुए नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र पूजा आज सम्पूर्ण हो जायेगी.
नवरात्र के नवमी तिथि को महानवमी के नाम से जाना जाता है. नवरात्र के आखिरी दिन मां दुर्गा की नौवीं और अलौकिक शक्ति मां सिद्धिदात्री की पूजा की जायेगी. नाम से ही स्पष्ट है सिद्धियों को देने वाली मां सिद्धिदात्री. कहा जाता है कि इनकी पूजा से व्यक्ति को हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है.
मार्केण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व, कुल आठ सिद्धियां हैं, जो कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से प्राप्त की जा सकती हैं. देव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था और इन्हीं की कृपा से भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर कहलाएं. 
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
यह देवी भगवान विष्णु की प्रियतमा लक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान हैं और हाथों में कमल, शंख, गदा व सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं.
मां सिद्धिदात्री मंत्र
‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे | ऊँ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल
ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
मां सिद्धिदात्री पूजा विधि
इस दिन कमल में बैठी देवी मां सिद्धिदात्री का ध्यान करना चाहिए। सुंगधित फूल अर्पित करें। मां को शहद अर्पित करें इसके साथ ही इस मंत्र का जाप करें- ऊं सिद्धिरात्री देव्यै नम:
मां दुर्गा को लगाएं इन चीजों का भोग
दुर्गार्चन पद्धति के अनुसार आज नवमी तिथि को कांसे के पात्र में नारियल पानी और तांबे के पात्र में शहद डालकर देवी मां को चढ़ाना चाहिए. कालिका पुराण में कुम्हाड़ा या कद्दू की बलि का विधान है. गन्ने का रस भी देवी मां को चढ़ाया जा सकता है.
महानवमी को करें हवन
महानवमी को हवन करने का भी विधान है। इस दिन हवन आदि करने से घर की शुद्धि होती है और सबके जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है, साथ ही घर का वास्तु अच्छा होता है और परिवार के सदस्यों में नई ऊर्जा आती है. नवमी के दिन तिल, जौ, गुग्गुल आदि से हवन करना अच्छा होता है. 
नवरात्र के आखिरी या फिर नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए नौ प्रकार के अन्न का प्रसाद, नवरस युक्त भोजन तथा नौ प्रकार के फल-फूल आदि का अर्पण करना चाहिए. इस प्रकार नवरात्र का समापन करने से इस संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
 

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